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जलकुंभी से अटी यमुना
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sat, 09 Jul 2016 12:02 AM IST
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यमुना नदी
आसपास क्षेत्रों में हो रही बरसात का असर यमुना में जल कुंभी के रूप में देखने को मिल रहा है। मथुरा में यमुना के सभी घाट जलकुंभी से अट गए हैं।
फिलहाल दिल्ली और उसके ऊपरी क्षेत्रों में बरसात का प्रभाव न होने के कारण यमुना का जल शांत है। किसी प्रकार की वृद्धि यमुना जल में नजर नहीं आ रही है। हालांकि दो दिन पहले ओखला बैराज और ताजे वाला बांध से निर्धारित से कुछ अधिक मात्रा में पानी छोड़ा गया था, जिसे शुक्रवार को फिर कम कर दिया गया है।
लेकिन, मथुरा और हरियाणा के यमुना से जुडे़ क्षेत्रों में बरसात का पानी यमुना में आने से इस क्षेत्रों में एकत्रित जलकुंभी पानी के साथ बहने लगी है। शहर में विश्रामघाट, स्वामीघाट और बंगालीघाट जलकुंभी से अट गए हैं।
स्थिति यह हो गई है कि इन घाटों के सामने यमुना का पानी जलकुंभी के कारण नजर नहीं आ रहा है। श्रद्धालुओं को आचमन और स्नान के लिए जलकुंभी को हटाना पड़ रहा है। शुक्रवार को ओखला से 1700 क्यूसेक और ताजेवाला से 352 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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फिलहाल दिल्ली और उसके ऊपरी क्षेत्रों में बरसात का प्रभाव न होने के कारण यमुना का जल शांत है। किसी प्रकार की वृद्धि यमुना जल में नजर नहीं आ रही है। हालांकि दो दिन पहले ओखला बैराज और ताजे वाला बांध से निर्धारित से कुछ अधिक मात्रा में पानी छोड़ा गया था, जिसे शुक्रवार को फिर कम कर दिया गया है।
लेकिन, मथुरा और हरियाणा के यमुना से जुडे़ क्षेत्रों में बरसात का पानी यमुना में आने से इस क्षेत्रों में एकत्रित जलकुंभी पानी के साथ बहने लगी है। शहर में विश्रामघाट, स्वामीघाट और बंगालीघाट जलकुंभी से अट गए हैं।
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स्थिति यह हो गई है कि इन घाटों के सामने यमुना का पानी जलकुंभी के कारण नजर नहीं आ रहा है। श्रद्धालुओं को आचमन और स्नान के लिए जलकुंभी को हटाना पड़ रहा है। शुक्रवार को ओखला से 1700 क्यूसेक और ताजेवाला से 352 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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