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Mathura News: खंभों पर बिजली के तारों के साथ दौड़ रहीं इंटरनेट केबलें
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यादव चौराहे पर एक खंभे पर केबलों का जाल। संवाद
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मथुरा। निजी इंटरनेट प्रदाता कंपनियां बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किए बगैर बिजली के खंभों का इस्तेमाल कर रही हैं। इन खंभों पर अब बिजली से ज्यादा से इंटरनेट की केबलें पड़ी हुई हैं। इससे न केवल शहर की सुंदरता पर दाग लग रहा है बल्कि हादसों का सबब भी बन सकता है।
शहर में चाहे वह पॉश कॉलोनी हो या तंग गली, बिजली के खंभों पर काले, सफेद और नीले तारों का जाल दिखाई दे जाएगा। कई स्थानों पर तो यह जाल इतना घना है कि बिजली के तार भी इन्हीं में छिपे नजर आते हैं। तेज हवा या बारिश में बिजली व इंटरनेट तार टकराने से शॉर्ट सर्किट से करंट फैलने का खतरा बना रहता है। नियमानुसार बिजली के खंभों का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए दूरसंचार कंपनियों को बिजली विभाग और नगर निगम से विधिवत अनुमति लेनी होती है। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना होता है, लेकिन अधिकांश निजी कंपनियां इस प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही हैं। वह अपनी लागत बचाने के लिए अवैध रूप से खंभों पर केबल डाल रही हैं, जिससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। संबंधित विभाग की ओर से भी शिकायतें मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
क्या बोले लोग
निजी संस्थानों के मुनाफे के आगे आम नागरिक की सुरक्षा और सरकारी नियमों को ताक पर रख दिया गया है। इस अवैध नेटवर्क पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इस जाल को समय रहत दुरुस्त कराना जरूरी है।
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-अमृतलाल खंडेलवाल, व्यापारी
इंटरनेट केबलों के जाल से आए दिन बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट होने से फाल्ट बढ़ जाते हैं। इससे घंटों की तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। कई बार लोगों की जान पर भी बन आती है। विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
-संतोष चौधरी, समाजसेवी
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शहर में चाहे वह पॉश कॉलोनी हो या तंग गली, बिजली के खंभों पर काले, सफेद और नीले तारों का जाल दिखाई दे जाएगा। कई स्थानों पर तो यह जाल इतना घना है कि बिजली के तार भी इन्हीं में छिपे नजर आते हैं। तेज हवा या बारिश में बिजली व इंटरनेट तार टकराने से शॉर्ट सर्किट से करंट फैलने का खतरा बना रहता है। नियमानुसार बिजली के खंभों का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए दूरसंचार कंपनियों को बिजली विभाग और नगर निगम से विधिवत अनुमति लेनी होती है। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना होता है, लेकिन अधिकांश निजी कंपनियां इस प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही हैं। वह अपनी लागत बचाने के लिए अवैध रूप से खंभों पर केबल डाल रही हैं, जिससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। संबंधित विभाग की ओर से भी शिकायतें मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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क्या बोले लोग
निजी संस्थानों के मुनाफे के आगे आम नागरिक की सुरक्षा और सरकारी नियमों को ताक पर रख दिया गया है। इस अवैध नेटवर्क पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इस जाल को समय रहत दुरुस्त कराना जरूरी है।
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-अमृतलाल खंडेलवाल, व्यापारी
इंटरनेट केबलों के जाल से आए दिन बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट होने से फाल्ट बढ़ जाते हैं। इससे घंटों की तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। कई बार लोगों की जान पर भी बन आती है। विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
-संतोष चौधरी, समाजसेवी