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सौ फीसदी नुकसान में दे रहे अधूरा मुआवजा
रामकुमार रौतेला
Updated Thu, 28 May 2015 12:06 AM IST
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किसानों को दैवी आपदा से होने वाले नुकसान से बचने के लिए सरकार और अधिकारी जिस फसल बीमा की दुहाई दे रहे हैं वह भी किसान के बजाय बीमा कंपनी को ही मालामाल कर रही है। इसका उदाहरण है मथुरा में दैवी आपदा से फसल बर्बाद होने के बाद भी फसल बीमा कराने वाले किसानों को पूरा मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। यहां तक कि कंपनी के पास जितनी प्रीमियम राशि पहुंची उसके बराबर भी किसानों को मुआवजे का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
मथुरा जिले में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से रबी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। जिला प्रशासन ने गेहूं की फसल में सौ फीसदी नुकसान मानते हुए 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से 321 करोड़ के मुआवजे का आकलन किया है। केंद्र की संशोधित मुआवजा पॉलिसी के मुताबिक यह आकलन 478 करोड़ के करीब होता है। बर्बादी का आलम यह है कि सदमे से जिले में 43 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है।
इस गंभीर आपदा में किसानों को बीमा कंपनी से उम्मीद थी कि इससे उन्हें राहत मिल सकेगी। जिले में 13 हजार से अधिक किसानों ने बैंक से लिए क्रॉप लोन के दौरान फसल बीमा कराया था। इसमें 13376.81 हेक्टेयर फसल के एरिया को बीमा कंपनी चोला मंडलम ने कवर प्रदान किया।
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इसके लिए बीमा कंपनी चोला मंडलम को 5.28 करोड़ रुपये फसल बीमा प्रीमियम के भुगतान किए गए। इसमें 2.26 करोड़ किसान का अंशदान और अनुदान के रूप में सरकार ने 3.02 करोड़ बीमा कंपनी को दिए। इस प्रीमियम के अनुसार शतप्रतिशत फसल नुकसान पर किसान को 28222 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलने थे।
अब बीमा कंपनी ने जिले में ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात से फसल के नुकसान का अपने अनुसार आकलन करते हुए कृषि विभाग को रिपोर्ट दी है। इसके मुताबिक बीमा कंपनी ने 5.28 करोड़ रुपये फसल बीमा प्रीमियम राशि हासिल करने के बाद किसानों को कुल 4.92 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। इसमें सबसे अधिक बीमा राशि बलदेव ब्लॉक के किसानों को 5253.39 रुपये प्रति हेक्टेयर और नौहझील ब्लॉक के किसानों को सबसे कम 2951.09 रुपये प्रति हेक्टेयर आंकी है।
खरीफ के आकलन में भी किया था गोलमाल
इस बीमा कंपनी ने खरीफ की फसल में भी किसानों के साथ धोखा किया था। सूखा से प्रभावित जिले के किसानों को फसल बीमा प्रीमियम के बराबर भी भुगतान नहीं किया गया। खरीफ की फसल में 18811 किसानों ने बीमा कराया था। कंपनी ने फसल बीमा के रूप में 9.67 करोड़ रुपये प्रीमियम प्राप्त किया था, जबकि भुगतान 9.28 करोड़ रुपये ही किया था। इस पर किसानों के साथ अफसरों ने भी सवाल खड़े किए थे।
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मथुरा जिले में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से रबी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। जिला प्रशासन ने गेहूं की फसल में सौ फीसदी नुकसान मानते हुए 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से 321 करोड़ के मुआवजे का आकलन किया है। केंद्र की संशोधित मुआवजा पॉलिसी के मुताबिक यह आकलन 478 करोड़ के करीब होता है। बर्बादी का आलम यह है कि सदमे से जिले में 43 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है।
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इस गंभीर आपदा में किसानों को बीमा कंपनी से उम्मीद थी कि इससे उन्हें राहत मिल सकेगी। जिले में 13 हजार से अधिक किसानों ने बैंक से लिए क्रॉप लोन के दौरान फसल बीमा कराया था। इसमें 13376.81 हेक्टेयर फसल के एरिया को बीमा कंपनी चोला मंडलम ने कवर प्रदान किया।
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इसके लिए बीमा कंपनी चोला मंडलम को 5.28 करोड़ रुपये फसल बीमा प्रीमियम के भुगतान किए गए। इसमें 2.26 करोड़ किसान का अंशदान और अनुदान के रूप में सरकार ने 3.02 करोड़ बीमा कंपनी को दिए। इस प्रीमियम के अनुसार शतप्रतिशत फसल नुकसान पर किसान को 28222 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलने थे।
अब बीमा कंपनी ने जिले में ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात से फसल के नुकसान का अपने अनुसार आकलन करते हुए कृषि विभाग को रिपोर्ट दी है। इसके मुताबिक बीमा कंपनी ने 5.28 करोड़ रुपये फसल बीमा प्रीमियम राशि हासिल करने के बाद किसानों को कुल 4.92 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। इसमें सबसे अधिक बीमा राशि बलदेव ब्लॉक के किसानों को 5253.39 रुपये प्रति हेक्टेयर और नौहझील ब्लॉक के किसानों को सबसे कम 2951.09 रुपये प्रति हेक्टेयर आंकी है।
खरीफ के आकलन में भी किया था गोलमाल
इस बीमा कंपनी ने खरीफ की फसल में भी किसानों के साथ धोखा किया था। सूखा से प्रभावित जिले के किसानों को फसल बीमा प्रीमियम के बराबर भी भुगतान नहीं किया गया। खरीफ की फसल में 18811 किसानों ने बीमा कराया था। कंपनी ने फसल बीमा के रूप में 9.67 करोड़ रुपये प्रीमियम प्राप्त किया था, जबकि भुगतान 9.28 करोड़ रुपये ही किया था। इस पर किसानों के साथ अफसरों ने भी सवाल खड़े किए थे।