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बंदरों के झुंड ने शरारत की तो गिर सकती हैं जर्जर इमारत
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मथुरा। शहर की पुरानी आबादी वाले क्षेत्र में एक सैकड़ा से अधिक इमारतें जर्जर अवस्था में हैं। बारिश के दौरान इनके गिरने की संभावना ज्यादा है, बंदर भी इनके लिए खतरे से कम नहीं हैं। यदि बंदरों का झुंड एक साथ निकला और किसी ने शरारत करते हुए दीवार को हिला दिया तो यह धराशायी हो सकती है। ऐसी घटना पहले हो भी चुकी है। इन जर्जर भवनों के गिरने से यहां निवासरत लोगों का ही नहीं आसपास के निवासियों का जीवन भी संकट में पड़ सकता है।
मथुरा की पुरानी आबादी का अधिकांश हिस्सा टीलेनुमा क्षेत्र पर बसा है। इस हिस्से में १०० से अधिक ऐसी इमारतें हैं, जो १५० से २०० साल पुरानी हैं। इनमें से अधिकांश की स्थिति बेहद खराब है। जर्जर अवस्था में होने के कारण यह इमारतें वर्तमान में गिरासू हैं। आसपास के लोग इनकी स्थिति को देखकर निरंतर भयभीत रहते हैं। खासकर बारिश के दिनों में अनेक इमारतों के हिस्से गिरते रहते हैं। कई इमारतें इसमें ऐसी हैं, जिनमें अब कोई नहीं रहता है। यह खंडहर हो चुकी हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
माता गली स्थित बिहारीपुरा में ऐसी ही इमारत की शिकायत क्षेत्रीय लोगों ने नगर निगम से की है। शीतला घाटी में पानी की टंकी के निकट भी जर्जर इमारत को लेकर भी शिकायत दर्ज हुई है। चौबिया पाड़ा में ऐसी इमारतें सर्वाधिक हैं। इनमें से कुछ इमारतों में आए दिन टूट-फूट होती है। सतघड़ा स्थित काला महल के पत्थर आए दिन गिरते हैं।
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छत्ता बाजार होली वाली गली के सामने, द्वारिकाधीश के निकट भी ऐसी जर्जर इमारत मौजूद है। इन स्थितियों को देखते हुए नगर निगम ने इमारतों के मालिकों को नोटिस देना शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया में नगर निगम ने ३५ इमारतों को लेकर नोटिस जारी किया है। इसमें संबंधितों को निर्देश दिए हैं उक्त भवनों की मरम्मत करा ली जाए या फिर उन्हें हटा लिया जाए। यह हादसे का कारण बन सकते हैं।
बंदरों के कारण और खतरा
पुराने शहर में बंदरों की भरमार है। सैकड़ों की संख्या में एक साथ बंदरों का झुंड चलता है। कुछ माह पहले द्वारिकाधीश मंदिर के पास एक जर्जर इमारत पर बंदरों ने चढ़कर उसकी दीवार को हिलाकर छज्जा गिरा दिया था जिससे एक महिला श्रद्धालु बुरी तरह जख्मी हो गई थी। कई ऐसी चार से पांच मंजिल इमारतें हैं, जिनमें कोई नहीं रहता है लेकिन आसपास रह रहे लोगों की जान का खतरा बना रहता है। पिछले दिनों वृंदावन में बंदरों ने एक इमारत से ईंट गिरा दी थी जिसके कारण एक श्रद्धालु चोटिल हो गया था। आए दिन इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।
जर्जर अवस्था वाली इमारतों को चिन्हित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में अब तक ३५ इमारतों को नोटिस जारी करते हुए उनकी मरम्मत या फिर हटाए जाने के आदेश दिए हैं। इन इमारतों के गिरने से दुर्घटना भी हो सकती है। अन्य इमारतों की सूची भी जल्द तैयार कर ली जाएगी।
-एससी मिश्रा, अधिशासी अभियंता निर्माण मथुरा-वृंदावन नगर निगम
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मथुरा की पुरानी आबादी का अधिकांश हिस्सा टीलेनुमा क्षेत्र पर बसा है। इस हिस्से में १०० से अधिक ऐसी इमारतें हैं, जो १५० से २०० साल पुरानी हैं। इनमें से अधिकांश की स्थिति बेहद खराब है। जर्जर अवस्था में होने के कारण यह इमारतें वर्तमान में गिरासू हैं। आसपास के लोग इनकी स्थिति को देखकर निरंतर भयभीत रहते हैं। खासकर बारिश के दिनों में अनेक इमारतों के हिस्से गिरते रहते हैं। कई इमारतें इसमें ऐसी हैं, जिनमें अब कोई नहीं रहता है। यह खंडहर हो चुकी हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
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माता गली स्थित बिहारीपुरा में ऐसी ही इमारत की शिकायत क्षेत्रीय लोगों ने नगर निगम से की है। शीतला घाटी में पानी की टंकी के निकट भी जर्जर इमारत को लेकर भी शिकायत दर्ज हुई है। चौबिया पाड़ा में ऐसी इमारतें सर्वाधिक हैं। इनमें से कुछ इमारतों में आए दिन टूट-फूट होती है। सतघड़ा स्थित काला महल के पत्थर आए दिन गिरते हैं।
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छत्ता बाजार होली वाली गली के सामने, द्वारिकाधीश के निकट भी ऐसी जर्जर इमारत मौजूद है। इन स्थितियों को देखते हुए नगर निगम ने इमारतों के मालिकों को नोटिस देना शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया में नगर निगम ने ३५ इमारतों को लेकर नोटिस जारी किया है। इसमें संबंधितों को निर्देश दिए हैं उक्त भवनों की मरम्मत करा ली जाए या फिर उन्हें हटा लिया जाए। यह हादसे का कारण बन सकते हैं।
बंदरों के कारण और खतरा
पुराने शहर में बंदरों की भरमार है। सैकड़ों की संख्या में एक साथ बंदरों का झुंड चलता है। कुछ माह पहले द्वारिकाधीश मंदिर के पास एक जर्जर इमारत पर बंदरों ने चढ़कर उसकी दीवार को हिलाकर छज्जा गिरा दिया था जिससे एक महिला श्रद्धालु बुरी तरह जख्मी हो गई थी। कई ऐसी चार से पांच मंजिल इमारतें हैं, जिनमें कोई नहीं रहता है लेकिन आसपास रह रहे लोगों की जान का खतरा बना रहता है। पिछले दिनों वृंदावन में बंदरों ने एक इमारत से ईंट गिरा दी थी जिसके कारण एक श्रद्धालु चोटिल हो गया था। आए दिन इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।
जर्जर अवस्था वाली इमारतों को चिन्हित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में अब तक ३५ इमारतों को नोटिस जारी करते हुए उनकी मरम्मत या फिर हटाए जाने के आदेश दिए हैं। इन इमारतों के गिरने से दुर्घटना भी हो सकती है। अन्य इमारतों की सूची भी जल्द तैयार कर ली जाएगी।
-एससी मिश्रा, अधिशासी अभियंता निर्माण मथुरा-वृंदावन नगर निगम