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जान जोखिम में डाल तय किया सफर
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Mon, 16 Nov 2015 11:38 PM IST
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दीपावली का त्योहार मनाकर ड्यूटी पर लौटने वाले लोगों की भीड़ के चलते बसों और ट्रेनों में भारी भीड़ रही। यहां तक कि अपनी जान की परवाह न करते हुए यात्रियों ने ट्रेन की छत पर बैठकर भी सफर किया। इस दौरान आरपीएफ और जीआरपी कर्मी मूकदर्शक बने रहे।
दूर-दराज क्षेत्रों में नौकरी करने वाले लोग दीपावली, गोवर्धन और भैया दूज और इसके बाद रविवार तक छुट्टी के बाद सोमवार से एक बार फिर अपनी ड्यूटी के लिए रवाना हो गए। सोमवार की सुबह से ही बसस्टैंड और रेलवे स्टेशन पर लोगों की भीड़ नजर आ रही थी।
रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म पर यात्रियों के बैठने की भी जगह नहीं थी तो ट्रेन में भी पैर रखने की जगह नहीं मिल रही थी। छावनी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ट्रेन में अंदर खड़े होने को भी स्थान नहीं मिला तो उन्होंने मथुरा-कासगंज रूट की ट्रेनों की छत पर बैठकर सफर किया।
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यात्रियों ने अपनी जान जोखिम में डाली वहीं यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही आरपीएफ इस दौरान मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने यात्रियों को ट्रेन की छत से उतारने का कोई प्रयास नहीं किया। बसस्टैंड पर जो भी बस आती पलक झपके फुल हो जाती। यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान पर जाने के लिए बस का घंटों इंतजार करना पड़ा।
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दूर-दराज क्षेत्रों में नौकरी करने वाले लोग दीपावली, गोवर्धन और भैया दूज और इसके बाद रविवार तक छुट्टी के बाद सोमवार से एक बार फिर अपनी ड्यूटी के लिए रवाना हो गए। सोमवार की सुबह से ही बसस्टैंड और रेलवे स्टेशन पर लोगों की भीड़ नजर आ रही थी।
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रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म पर यात्रियों के बैठने की भी जगह नहीं थी तो ट्रेन में भी पैर रखने की जगह नहीं मिल रही थी। छावनी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ट्रेन में अंदर खड़े होने को भी स्थान नहीं मिला तो उन्होंने मथुरा-कासगंज रूट की ट्रेनों की छत पर बैठकर सफर किया।
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यात्रियों ने अपनी जान जोखिम में डाली वहीं यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही आरपीएफ इस दौरान मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने यात्रियों को ट्रेन की छत से उतारने का कोई प्रयास नहीं किया। बसस्टैंड पर जो भी बस आती पलक झपके फुल हो जाती। यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान पर जाने के लिए बस का घंटों इंतजार करना पड़ा।