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अब यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति के विद्यालय निशाने पर
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मथुरा। एक के बाद एक समाज कल्याण विभाग में व्याप्त अनियमितताओं और घोटालों की जांच शुरू हो गई है। अभी छात्रवृत्ति घोटाले की परत खुलना बाकी है। वहीं यूनानी और तिब्बती चिकित्सा पद्धति से चल रहे विद्यालयों के मास्टर डाटा से पांच नाम गायब हो गए हैं। शासन ने इन पांच विद्यालयों की जानकारी विभाग से मांगी है। जानकारी रहे अधिकतर ऐसे विद्यालय सिर्फ कागजों में चल रहे हैं। जबकि सरकार द्वारा एक बड़ी धनराशि उनके नाम दी जा रही है।
यूनानी और तिब्बती चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए सरकार न केवल इन विद्यालयों के संचालकों को बल्कि इनमें पढ़ने वाले छात्रों को भी आर्थिक तथा अन्य सहायता प्रदान करती है। विगत दिनों छात्रवृत्ति घोटाले से सजग हुए शासन ने यूनानी और तिब्बती चिकित्सा पद्धति से चलने वाली शिक्षण संस्थाओं का डाटा देखा तो वह चौंक गया। विभाग द्वारा भेजी गई मास्टर सूची से पांच शिक्षण संस्थाओं के नाम ही गायब थे। इन नामों के गायब होने से समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक सदस्य जांच समिति सिद्धार्थ मिश्र ने समाज कल्याण विभाग से इन पांच शिक्षण संस्थाओं का डाटा उपलब्ध कराने को कहा है।
जानकारी रहे जनपद में शासन के रिकॉर्ड में 35 शिक्षण संस्थाएं संचालित हैं जबकि विभाग ने सिर्फ 30 शिक्षण संस्थाओं के नाम ही भेजे थे। जो शिक्षण संस्थाएं नदारद हैं उनमें चौधरी चिरंजीलाल कॉलेज ऑफ आयुर्वेदिक फार्मेसी अड्डा कारब, हजारीलाल महाविद्यालय सौंख खेड़ा मथुरा, आरबीएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी मथुरा, एसजीएस आयुर्वेदिक एंड फार्मेसी कॉलेज, श्रीमती विमला देवी आयुर्वेदिक नर्सिंग एंड फार्मेसी कॉलेज शामिल हैं। विभाग द्वारा इन शिक्षण संस्थाओं की जानकारी तो जुटाई ही जाएगी, साथ ही अन्य विद्यालयों से भी तीन वर्ष का डाटा मांगा जा रहा है। उनसे मान्यता संबंधी सभी कागजात भी मांगे गए हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर गुप्ता ने बताया कि इन शिक्षण संस्थाओं के बारे में डाटा जुटा रहे हैं। साथ ही इनके यहां पर अध्ययनरत उन छात्रों का डाटा भी मांग रहे हैं जिन्होंने आवेदन तो किए परंतु परीक्षा में शामिल नहीं थे।
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यूनानी और तिब्बती चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए सरकार न केवल इन विद्यालयों के संचालकों को बल्कि इनमें पढ़ने वाले छात्रों को भी आर्थिक तथा अन्य सहायता प्रदान करती है। विगत दिनों छात्रवृत्ति घोटाले से सजग हुए शासन ने यूनानी और तिब्बती चिकित्सा पद्धति से चलने वाली शिक्षण संस्थाओं का डाटा देखा तो वह चौंक गया। विभाग द्वारा भेजी गई मास्टर सूची से पांच शिक्षण संस्थाओं के नाम ही गायब थे। इन नामों के गायब होने से समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक सदस्य जांच समिति सिद्धार्थ मिश्र ने समाज कल्याण विभाग से इन पांच शिक्षण संस्थाओं का डाटा उपलब्ध कराने को कहा है।
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जानकारी रहे जनपद में शासन के रिकॉर्ड में 35 शिक्षण संस्थाएं संचालित हैं जबकि विभाग ने सिर्फ 30 शिक्षण संस्थाओं के नाम ही भेजे थे। जो शिक्षण संस्थाएं नदारद हैं उनमें चौधरी चिरंजीलाल कॉलेज ऑफ आयुर्वेदिक फार्मेसी अड्डा कारब, हजारीलाल महाविद्यालय सौंख खेड़ा मथुरा, आरबीएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी मथुरा, एसजीएस आयुर्वेदिक एंड फार्मेसी कॉलेज, श्रीमती विमला देवी आयुर्वेदिक नर्सिंग एंड फार्मेसी कॉलेज शामिल हैं। विभाग द्वारा इन शिक्षण संस्थाओं की जानकारी तो जुटाई ही जाएगी, साथ ही अन्य विद्यालयों से भी तीन वर्ष का डाटा मांगा जा रहा है। उनसे मान्यता संबंधी सभी कागजात भी मांगे गए हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर गुप्ता ने बताया कि इन शिक्षण संस्थाओं के बारे में डाटा जुटा रहे हैं। साथ ही इनके यहां पर अध्ययनरत उन छात्रों का डाटा भी मांग रहे हैं जिन्होंने आवेदन तो किए परंतु परीक्षा में शामिल नहीं थे।
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