{"_id":"5dc97aff8ebc3e5b2c1d3446","slug":"guru-nanak-mathura-news-agr4147141118","type":"story","status":"publish","title_hn":"507 साल पहले मथुरा आए थे गुरुनानक देव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
507 साल पहले मथुरा आए थे गुरुनानक देव
विज्ञापन
मथुरा। मसानी स्थित गुरुद्वारे में कुंआ जहां गुरू नानकदेव जी आये थे।
- फोटो : MATHURA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव अपनी चार उदासी में से पहली उदासी (धार्मिक यात्रा) के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला भूमि मथुरा भी आए थे। यहां उन्होंने 40 दिन का प्रवास किया था। इस दौरान उन्होंने लोगों को शांति, सद्भाव और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का संदेश दिया था।
गुरुनानक बगीची प्रबंध समिति के सचिव गुरुवचन सिंह ने बताया कि 507 साल पहले गुरुनानक देव मथुरा आए थे। 40 दिन के प्रवास के दौरान उन्होंने मथुरा के साथ वृंदावन, बरसाना, नंदगांव आदि धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया था। उन्होंने बताया कि प्रवास के एक दिन बगीची पर संगत मौजूद थी। इसी बीच उन्हें किसी ने कुएं के खारे पानी के बारे में बताया। इस पर उन्होंने कहा कि पानी खारा नहीं हो सकता। इस पर जब मौजूद लोगों ने कुएं उसे पानी को निकाल पिया तो वह मीठा था। इसके बाद इस बगीची का नाम गुरुद्वारा गुरुनानक बगीची पड़ गया।
अखंड पाठ साहिब का आयोजन
गुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर सुबह 10 बजे से अखंड पाठ साहिब, 11 से 12 बजे तक कथा और 12.30 से 2 बजे तक शबद कीर्तन के आयोजन होंगे। गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी गोपी सिंह ने बताया कि शबद कीर्तन, लंगर और प्रसाद वितरण होगा।
विज्ञापन
-
2006 में शुरू हुआ था जीर्णोद्धार
गुरुनानक बगीगी पर पहली बार वर्ष 1926 पर गुरुद्वारे का निर्माण कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2006 से 2008 के बीच जीर्णोद्धार कराया गया। गुरुनानक देव के चरण यहां पड़ने के कारण यह स्थल सिख समाज के लिए बेहद पवित्र स्थल है।
विज्ञापन
गुरुनानक बगीची प्रबंध समिति के सचिव गुरुवचन सिंह ने बताया कि 507 साल पहले गुरुनानक देव मथुरा आए थे। 40 दिन के प्रवास के दौरान उन्होंने मथुरा के साथ वृंदावन, बरसाना, नंदगांव आदि धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया था। उन्होंने बताया कि प्रवास के एक दिन बगीची पर संगत मौजूद थी। इसी बीच उन्हें किसी ने कुएं के खारे पानी के बारे में बताया। इस पर उन्होंने कहा कि पानी खारा नहीं हो सकता। इस पर जब मौजूद लोगों ने कुएं उसे पानी को निकाल पिया तो वह मीठा था। इसके बाद इस बगीची का नाम गुरुद्वारा गुरुनानक बगीची पड़ गया।
विज्ञापन
अखंड पाठ साहिब का आयोजन
गुरुनानक देव के प्रकाशोत्सव पर सुबह 10 बजे से अखंड पाठ साहिब, 11 से 12 बजे तक कथा और 12.30 से 2 बजे तक शबद कीर्तन के आयोजन होंगे। गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी गोपी सिंह ने बताया कि शबद कीर्तन, लंगर और प्रसाद वितरण होगा।
विज्ञापन
-
2006 में शुरू हुआ था जीर्णोद्धार
गुरुनानक बगीगी पर पहली बार वर्ष 1926 पर गुरुद्वारे का निर्माण कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2006 से 2008 के बीच जीर्णोद्धार कराया गया। गुरुनानक देव के चरण यहां पड़ने के कारण यह स्थल सिख समाज के लिए बेहद पवित्र स्थल है।