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गायन सौं ब्रज छायौ बैकुंठ हू बिसरायौ...
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 19 Nov 2015 11:58 PM IST
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कन्हैया प्रथम गोचारन से लौटे तो गोस्वामी समाज ने उनकी थकान मिटाने और मन प्रसन्न करने के लिए हास्य पद, साग लाई पात लाई और लाई हलुआ, सास बहू जब जैमन बैठी नाकै लै गयौ कउआ, पीसत सोबै पोमत रोबै भरभूजा मन मान्यौ, लै डल्ला पीसन कूं बैठी मीडेई बिना चबानौ आदि का गायन किया।
नंदगांव में यह नजारा देख भक्तों के मन में द्वापर जी उठा। मान्यता है कि नंदगांव निवास के दौरान नंद-यशोदा ने गर्ग ऋषि से गाय चराने का मुहूर्त निकलवाया तो उन्होंने गोपाष्टमी को शुभ मुहूर्त बताया।
द्वापरकालीन लीला को चित्रित करने के लिए कान्हा के गांव नंदगांव में गुरुवार को आनंद घन बाबा की मूर्ति के पास गोस्वामी कुमार छोटे-छोटे बच्चों यश और लव को श्रीकृष्ण और बलराम के रूप में सजाया गया।
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सुबह नौ बजे से श्रीकृष्ण बलराम के स्वरूपों में सजे बालकों के साथ ग्वालवालों के टोल पूरे कस्बे में प्रसाद के लिए घर-घर गए। जगह-जगह कन्हैया और उनकी टोली का स्वागत किया गया।
दोपहर में नंदभवन पहुंचे। नंदभवन में समाज गायन किया गया। इसके पश्चात श्रीकृष्ण बलराम सखा स्वरूप गोपों के साथकारे मंदिर, हाऊ विलाऊ, यशोदा कुंड, नंद बैठक, बंटा वाली कुंज होते हुए कदंब टेर पहुंचे, जहां बरसाना से गोपी छाक लेकर बैठी थीं।
कन्हैया ने ग्वालवालों के साथ छाक ली। नंदभवन, खूंटा, कारेलय, यशोदा कुंड, कदंब टेर, आसेश्वर, नंद बगीचा आदि स्थलों पर समाज गायन के दौरान प्रथम गोचारन कौ दिन आज, गाय चरावन कौ दिन आयौ, तुम जो मनावत सोई दिन आयौ, अहो दधि मथत घोष की रानी आदि पदों का गायन किया गया।
संध्या के समय कृष्ण कुंड पर कृष्ण की थकान मिटाने के लिए हास्य पदों का गायन किया गया। शाम को श्रीकृष्ण बलराम स्वरूपों के शृंगार को बड़ा किया गया। मंदिर के गर्भ ग्रह में माता यशोदा स्वरूप ने दोनों लालाओं की आरती उतारी।
कस्बे में जगह-जगह धार्मिक संस्थानों पर गायों की पूजा की गई। 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गोपाष्टमी पर्व का आनंद लिया।
नौ कुंतल फूलों से महका उठा कदंब टेर
नंदगांव। कदंब टेर नामक गोचारण स्थल को 10 कुंतल देशी-विदेशी फूलों से सजाया गया। कृष्ण बलराम का सुंदर फूल बंगला सजाया गया।
इस दौरान दिल्ली से आए लिली, रजनीगंधा, गुलाब, एंथोरियम, जलमरा सहित 24 से अधिक जिंस के फूलों से कृष्णकालीन स्थल को सजाया गया। बाबा ऋषिकेश दास ने बताया कि 20 कारीगरों ने करीब 17 घंटे काम कर कदंब टेर को सजाया है।
बहू के भैया की जय के लगाए नारे
नंदगांव। एक दशक बाद ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा गोचारण लीला में सम्मिलित हुए। पूर्व में बाबा अधिकांश उत्सवों पर नंदगांव आते थे। यात्रा की व्यस्तता के चलते बाबा का नंदगांव आने का क्रम टूट गया।
करीब एक दशक बाद बाबा गोचारण लीला में शामिल होने कदंब टेर पहुंचे। बाबा के पहुंचते ही नंदगांव के ग्वालों के चेहरे खिल उठे और सामूहिक रूप से बहू के भैया के जयकारों का घोष कर दिया।
इसके बाद बाबा से जम कर ठिठोली की। बाबा भी ठिठोली सुन मुस्कराते रहे। बाबा ने कृष्ण और बलराम स्वरूपों में विराजमान गोस्वामी बालकों का भोग लगाया। इसके बाद समाज गायन का आनंद लिया।
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नंदगांव में यह नजारा देख भक्तों के मन में द्वापर जी उठा। मान्यता है कि नंदगांव निवास के दौरान नंद-यशोदा ने गर्ग ऋषि से गाय चराने का मुहूर्त निकलवाया तो उन्होंने गोपाष्टमी को शुभ मुहूर्त बताया।
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द्वापरकालीन लीला को चित्रित करने के लिए कान्हा के गांव नंदगांव में गुरुवार को आनंद घन बाबा की मूर्ति के पास गोस्वामी कुमार छोटे-छोटे बच्चों यश और लव को श्रीकृष्ण और बलराम के रूप में सजाया गया।
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सुबह नौ बजे से श्रीकृष्ण बलराम के स्वरूपों में सजे बालकों के साथ ग्वालवालों के टोल पूरे कस्बे में प्रसाद के लिए घर-घर गए। जगह-जगह कन्हैया और उनकी टोली का स्वागत किया गया।
दोपहर में नंदभवन पहुंचे। नंदभवन में समाज गायन किया गया। इसके पश्चात श्रीकृष्ण बलराम सखा स्वरूप गोपों के साथकारे मंदिर, हाऊ विलाऊ, यशोदा कुंड, नंद बैठक, बंटा वाली कुंज होते हुए कदंब टेर पहुंचे, जहां बरसाना से गोपी छाक लेकर बैठी थीं।
कन्हैया ने ग्वालवालों के साथ छाक ली। नंदभवन, खूंटा, कारेलय, यशोदा कुंड, कदंब टेर, आसेश्वर, नंद बगीचा आदि स्थलों पर समाज गायन के दौरान प्रथम गोचारन कौ दिन आज, गाय चरावन कौ दिन आयौ, तुम जो मनावत सोई दिन आयौ, अहो दधि मथत घोष की रानी आदि पदों का गायन किया गया।
संध्या के समय कृष्ण कुंड पर कृष्ण की थकान मिटाने के लिए हास्य पदों का गायन किया गया। शाम को श्रीकृष्ण बलराम स्वरूपों के शृंगार को बड़ा किया गया। मंदिर के गर्भ ग्रह में माता यशोदा स्वरूप ने दोनों लालाओं की आरती उतारी।
कस्बे में जगह-जगह धार्मिक संस्थानों पर गायों की पूजा की गई। 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गोपाष्टमी पर्व का आनंद लिया।
नौ कुंतल फूलों से महका उठा कदंब टेर
नंदगांव। कदंब टेर नामक गोचारण स्थल को 10 कुंतल देशी-विदेशी फूलों से सजाया गया। कृष्ण बलराम का सुंदर फूल बंगला सजाया गया।
इस दौरान दिल्ली से आए लिली, रजनीगंधा, गुलाब, एंथोरियम, जलमरा सहित 24 से अधिक जिंस के फूलों से कृष्णकालीन स्थल को सजाया गया। बाबा ऋषिकेश दास ने बताया कि 20 कारीगरों ने करीब 17 घंटे काम कर कदंब टेर को सजाया है।
बहू के भैया की जय के लगाए नारे
नंदगांव। एक दशक बाद ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा गोचारण लीला में सम्मिलित हुए। पूर्व में बाबा अधिकांश उत्सवों पर नंदगांव आते थे। यात्रा की व्यस्तता के चलते बाबा का नंदगांव आने का क्रम टूट गया।
करीब एक दशक बाद बाबा गोचारण लीला में शामिल होने कदंब टेर पहुंचे। बाबा के पहुंचते ही नंदगांव के ग्वालों के चेहरे खिल उठे और सामूहिक रूप से बहू के भैया के जयकारों का घोष कर दिया।
इसके बाद बाबा से जम कर ठिठोली की। बाबा भी ठिठोली सुन मुस्कराते रहे। बाबा ने कृष्ण और बलराम स्वरूपों में विराजमान गोस्वामी बालकों का भोग लगाया। इसके बाद समाज गायन का आनंद लिया।