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यहां काली रूप में विराजते हैं श्रीकृष्ण
अमर उजाला वृंदावन
Updated Fri, 08 Apr 2016 11:29 PM IST
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कृष्ण कालीपीठ
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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श्रीधाम वृंदावन राधाकृष्ण की रसमयी दिव्य लीलाओं के लिए विख्यात हो लेकिन यहां शक्ति पूजा का महात्म्य भी कम नहीं है। यहां गोपीनाथ बाजार स्थित कृष्ण कालीपीठ का महत्व पौराणिक है।
कृष्ण कालीपीठाधीश्वर डा. केशवाचार्य बताते हैं कि एक कथा के अनुसार राधा के विवाह की चर्चा अयन नाम के गोप से हो रही थी। अयन को पता चला कि राधा कृष्ण की भक्त हैं और वो काली भक्त तो उन्हें संदेह होने लगा।
अयन श्रीराधा के दर्शन करने गए तब श्रीराधा भगवान के सानिध्य में विराजमान थीं। अयन को आते देखकर श्रीराधा व्यग्रचित्त हो श्रीकृष्ण पुकारने लगी कि हे नाथ, अयन आ रहा है। मेरी रक्षा करें। बस फिर क्या था तत्क्षण एक चमत्कार हुआ और भगवान कृष्ण काली के रूप में आ गए।
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उनकी दो भुजाएं चतुर्भुजा में परिवर्तित हो गईं, वंशी खड्ग बन गई, गले में धारण वनमाला मुण्डमाला हो गई।
मार्कण्डेय पुराण के सप्तशती खंड में अष्टिका के वर्णित ललाट से उत्पन्न पौराणिक काली में अनेक रूप हैं जो मां दुर्गा की विभूतियों में एक हैं, किंतु इस सब से अपूर्व मां काली का एक विशिष्ट स्वरूप कृष्णकाली के रूप में है। जिसकी पूज्य वैष्णवी है। जिसका रूप न केवल आकर्षक है अपितु कृपामयी भी है।
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कृष्ण कालीपीठाधीश्वर डा. केशवाचार्य बताते हैं कि एक कथा के अनुसार राधा के विवाह की चर्चा अयन नाम के गोप से हो रही थी। अयन को पता चला कि राधा कृष्ण की भक्त हैं और वो काली भक्त तो उन्हें संदेह होने लगा।
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अयन श्रीराधा के दर्शन करने गए तब श्रीराधा भगवान के सानिध्य में विराजमान थीं। अयन को आते देखकर श्रीराधा व्यग्रचित्त हो श्रीकृष्ण पुकारने लगी कि हे नाथ, अयन आ रहा है। मेरी रक्षा करें। बस फिर क्या था तत्क्षण एक चमत्कार हुआ और भगवान कृष्ण काली के रूप में आ गए।
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उनकी दो भुजाएं चतुर्भुजा में परिवर्तित हो गईं, वंशी खड्ग बन गई, गले में धारण वनमाला मुण्डमाला हो गई।
मार्कण्डेय पुराण के सप्तशती खंड में अष्टिका के वर्णित ललाट से उत्पन्न पौराणिक काली में अनेक रूप हैं जो मां दुर्गा की विभूतियों में एक हैं, किंतु इस सब से अपूर्व मां काली का एक विशिष्ट स्वरूप कृष्णकाली के रूप में है। जिसकी पूज्य वैष्णवी है। जिसका रूप न केवल आकर्षक है अपितु कृपामयी भी है।