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भगवा रंग में रंगी कान्हा की नगरी
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 12 Mar 2017 12:22 AM IST
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श्रीकांत शर्मा
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भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा केसरिया रंग में रंग गई है। पांच विधानसभाओं में से चार पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे। मांट विधानसभा जरूर बसपा के खाते में चली गई है। इस सीट से सात बार के विधायक श्यामसुंदर शर्मा ने आठवीं दफा फिर जीत दर्ज की है। जबकि चार बार के विधायक और कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। सपा-कांग्रेस गठबंधन पूरी तरह से साफ हो गया है। रालोद भी कहीं कुछ हासिल नहीं कर पाई है।
जितना सोचा था उससे भी कहीं ज्यादा मिला। भाजपा के जिस भी प्रत्याशी से बात की गई उनका यही कहना था। मथुरा विधानसभा सीट की जब काउंटिंग शुरू हुई तो श्रीकांत शर्मा ने पहले राउंड से जो बढ़त बनाई अंतिम राउंड तक बरकरार रही। उन्हें 1,43,361 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस के प्रदीप माथुर को 1,01,161 वोटों से हराया। 42,200 वोट हासिल करके प्रदीप माथुर दूसरे नंबर पर रहे। जबकि बसपा के योगेश द्विवेदी 31,168 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे।
छाता विधानसभा सीट से भाजपा के चौधरी लक्ष्मीनारायण विजयी रहे। वह भी पहले ही चरण के नतीजों से बढ़त बनाए हुए थे। अंतिम चरण तक सबसे आगे रहे। उन्हें 1,17,537 वोट मिले हैं। उन्होंने सपा समर्र्थित प्रत्याशी अतुल सिंह सिसौदिया को 63,838 वोटों से हराया। अतुल को 53,699 वोट मिले। बसपा के मनोज पाठक 41,290 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे।
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गोवर्धन विधानसभा सीट से भाजपा के कारिंदा सिंह ने जीत हासिल की है। कारिंदा भी लगातार आगे चलते रहे। नतीजों की दौड़ में चौबीस राउंड तक वह फर्स्ट ही बने रहे। उन्हें 93,538 वोट मिले हैं। भाजपा प्रत्याशी ने बसपा के राजकुमार रावत को 33,009 मतों से हराया। राजकुमार रावत 60,529 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। रालोद के कुंवर नरेंद्र सिंह को तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा। उन्हें 40,999 वोट मिले हैं।
मांट विधानसभा सीट के नतीजों में जरूर लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे। कभी भाजपा के एसके शर्मा आगे निकल जाते थे तो कभी रालोद के योगेश नौहवार। लेकिन अंत में बसपा के श्यामसुंदर शर्मा आठवीं दफा विधायक बन ही गए। उन्हें 65,862 वोट मिले हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी रालोद के योगेश नौहवार को 432 मतों से हराया। रालोद प्रत्याशी को 65,430 वोट मिले। भाजपा के एसके शर्मा 59,871 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
बलदेव विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी पूरन प्रकाश चौथी दफा फिर विधायक बन गए हैं। उन्होंने 88,411 मत हासिल करके रालोद के निरंजन सिंह धनगर को 13,208 मतों से हराया है। निरंजन सिंह को 75,203 वोट मिले हैं। बसपा प्रत्याशी प्रेमचंद्र कर्दम 53,539 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे।
रामलहर से भी बड़ी लहर आई
वर्ष 1991 में जब रामलहर थी तब मथुरा जिले में भाजपा ने विधानसभा की दो सीटें जीतीं थीं। उस वक्त मथुरा और छाता विधानसभा पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। वहीं 1993 में भाजपा ने गोकुल, गोवर्धन और मथुरा विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार चार सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया है। मांट विधानसभा सीट भाजपा हार जरूर गई लेकिन यहां भी वोटों की संख्या में बड़ी तेजी के साथ इजाफा हुआ है।
भाजपा प्रत्याशी एसके शर्मा कई दफा आगे निकल गए थे। सियासी लोगों का कहना है कि इस बार मोदी लहर में हर पार्टी उड़ गई है। कहीं ऐसा लगा ही नहीं कि चुनाव हुआ है। सब कुछ एकतरफा जैसा रहा है। सियासी धुरंधरों का मानना है कि नोटबंदी को विपक्षी दलों ने मुद्दा बनाया लेकिन उसका कहीं कोई असर हुआ नहीं। जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत दिया।
मथुरा में 15 साल बाद भाजपा की वापसी
जनपद में पंद्रह साल बाद भाजपा की जबरदस्त वापसी हुई है। वर्ष 2002 के बाद भाजपा किसी भी चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाई थी। 2002 में एक सीट जीती थी, केवल गोवर्धन विधानसभा सीट। उसके बाद हर बार भाजपा प्रत्याशी हारते रहे। लेकिन इस बार पांच विधानसभा सीट में से चार सीटों पर भगवा परचम लहरा गया है।
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जितना सोचा था उससे भी कहीं ज्यादा मिला। भाजपा के जिस भी प्रत्याशी से बात की गई उनका यही कहना था। मथुरा विधानसभा सीट की जब काउंटिंग शुरू हुई तो श्रीकांत शर्मा ने पहले राउंड से जो बढ़त बनाई अंतिम राउंड तक बरकरार रही। उन्हें 1,43,361 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस के प्रदीप माथुर को 1,01,161 वोटों से हराया। 42,200 वोट हासिल करके प्रदीप माथुर दूसरे नंबर पर रहे। जबकि बसपा के योगेश द्विवेदी 31,168 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे।
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छाता विधानसभा सीट से भाजपा के चौधरी लक्ष्मीनारायण विजयी रहे। वह भी पहले ही चरण के नतीजों से बढ़त बनाए हुए थे। अंतिम चरण तक सबसे आगे रहे। उन्हें 1,17,537 वोट मिले हैं। उन्होंने सपा समर्र्थित प्रत्याशी अतुल सिंह सिसौदिया को 63,838 वोटों से हराया। अतुल को 53,699 वोट मिले। बसपा के मनोज पाठक 41,290 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे।
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गोवर्धन विधानसभा सीट से भाजपा के कारिंदा सिंह ने जीत हासिल की है। कारिंदा भी लगातार आगे चलते रहे। नतीजों की दौड़ में चौबीस राउंड तक वह फर्स्ट ही बने रहे। उन्हें 93,538 वोट मिले हैं। भाजपा प्रत्याशी ने बसपा के राजकुमार रावत को 33,009 मतों से हराया। राजकुमार रावत 60,529 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। रालोद के कुंवर नरेंद्र सिंह को तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा। उन्हें 40,999 वोट मिले हैं।
मांट विधानसभा सीट के नतीजों में जरूर लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे। कभी भाजपा के एसके शर्मा आगे निकल जाते थे तो कभी रालोद के योगेश नौहवार। लेकिन अंत में बसपा के श्यामसुंदर शर्मा आठवीं दफा विधायक बन ही गए। उन्हें 65,862 वोट मिले हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी रालोद के योगेश नौहवार को 432 मतों से हराया। रालोद प्रत्याशी को 65,430 वोट मिले। भाजपा के एसके शर्मा 59,871 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
बलदेव विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी पूरन प्रकाश चौथी दफा फिर विधायक बन गए हैं। उन्होंने 88,411 मत हासिल करके रालोद के निरंजन सिंह धनगर को 13,208 मतों से हराया है। निरंजन सिंह को 75,203 वोट मिले हैं। बसपा प्रत्याशी प्रेमचंद्र कर्दम 53,539 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे।
रामलहर से भी बड़ी लहर आई
वर्ष 1991 में जब रामलहर थी तब मथुरा जिले में भाजपा ने विधानसभा की दो सीटें जीतीं थीं। उस वक्त मथुरा और छाता विधानसभा पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। वहीं 1993 में भाजपा ने गोकुल, गोवर्धन और मथुरा विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार चार सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया है। मांट विधानसभा सीट भाजपा हार जरूर गई लेकिन यहां भी वोटों की संख्या में बड़ी तेजी के साथ इजाफा हुआ है।
भाजपा प्रत्याशी एसके शर्मा कई दफा आगे निकल गए थे। सियासी लोगों का कहना है कि इस बार मोदी लहर में हर पार्टी उड़ गई है। कहीं ऐसा लगा ही नहीं कि चुनाव हुआ है। सब कुछ एकतरफा जैसा रहा है। सियासी धुरंधरों का मानना है कि नोटबंदी को विपक्षी दलों ने मुद्दा बनाया लेकिन उसका कहीं कोई असर हुआ नहीं। जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत दिया।
मथुरा में 15 साल बाद भाजपा की वापसी
जनपद में पंद्रह साल बाद भाजपा की जबरदस्त वापसी हुई है। वर्ष 2002 के बाद भाजपा किसी भी चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाई थी। 2002 में एक सीट जीती थी, केवल गोवर्धन विधानसभा सीट। उसके बाद हर बार भाजपा प्रत्याशी हारते रहे। लेकिन इस बार पांच विधानसभा सीट में से चार सीटों पर भगवा परचम लहरा गया है।