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ठाकुर बांकेबिहारी को फिर नहीं मिला कच्चा प्रसाद

Tue, 03 May 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला
अमर उजाला Updated Tue, 03 May 2016 11:39 PM IST
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fraction between bankebihari temple sevayat and managemet
बांकेबिहारी मंदिर
मसला ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन और सेवायतों के बीच का है लेकिन असमंजस है सबके लाड़ले ठाकुरजी के लिए। कच्चे प्रसाद के लिए सेवायत और मंदिर प्रबंधन के बीच सामंजस्य न बन पाने के चलते एक बार फिर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज राजभोग में भी पक्का प्रसाद ही ग्रहण कर रहे हैं। बीते दस दिन से कच्चा प्रसाद बना रहे सेवायतों ने भी मंदिर प्रबंधन से प्रसाद बनाने की मना कर दी है। 
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ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधक प्रशासन उमेश सारस्वत के अनुसार ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में बीते कई दिनों से ठाकुरजी को लगाए जाने वाले कच्चे भोग की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। जो सेवायत ठाकुरजी का कच्चा प्रसाद बना रहे थे उन्होंने अचानक मना कर दिया। इसके चलते मंदिर प्रबंधन और हवेली से आ रहा पक्का प्रसाद ही ठाकुरजी को लगाया जा रहा है।  
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मंगलवार को मंदिर प्रबंध कमेटी ने नोटिस चस्पा कर सेवायतों से ठाकुरजी के कच्चे प्रसाद के निर्माण का आग्रह किया। मंदिर प्रबंधन ने सेवायतों से दो दिन के अंदर अपना प्रस्ताव अनुबंध पत्र मंदिर प्रबंध कमेटी के सामने प्रस्तुत करने को कहा है। अन्यथा की स्थिति में अन्य विकल्पों पर भी विचार करने की चेतावनी दी है। मंदिर प्रबंधन के आग्रह के बाद भी देर शाम तक किसी सेवायत ने प्रसाद निर्माण के लिए पहल नहीं की। इसके चलते मंगलवार को भी ठाकुरजी को दोपहर के समय राजभोग में लगने वाला कच्चा प्रसाद नहीं बनाया जा सका। 
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ठाकुरजी के प्रसाद का खर्च लाखों में 
वृंदावन। जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के राजभोग और शयन भोग में विभिन्न प्रकार व्यंजन ग्रहण करते हैं। बताया गया है कि राजभोग और शयन भोग के प्रसाद पर हर माह लगभग 4.5 लाख का खर्चा आ रहा है। यह खर्च मंदिर प्रबंध कमेटी और बड़ी हवेली वहन करती है।


इसमें राजभोग के कच्चे प्रसाद का सामान और शयन भोग का पक्का प्रसाद का खर्च बड़ी हवेली की ओर से वहन किया जाता है। यही खर्च लगभग चार लाख रुपये प्रति माह है। इसके अलावा कई सेवायतों के यजमान भी ठाकुरजी को लगाए जाने वाले प्रसाद में सामर्थ्य और इच्छा के अनुसार सहभागिता करते हैं। 
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