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पक्षियों का शिकार रोकने के लिए ली एनजीटी की शरण
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मथुरा। गोकुल बैराज के आसपास यमुना का किनारा पक्षियों का अभ्यारण स्थल बन गया है। तीन-चार साल से यहां सर्दियों के मौसम में देशी ही नहीं विदेेशी पक्षी भी अपना ठिकाना बना रहे हैं। यमुना के तट पर हरियाली के बीच पक्षियों के झुंड लोगों को भी आकर्षित कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इनका शिकार भी कर रहे हैं, इसे रोकने के लिए भाजपा नेता ने एनजीटी की शरण ली है।
भाजपा नेता कुंवर सिंह निषाद ने गोकुल बैराज क्षेत्र में पक्षियों के शिकार को प्रतिबंधित करने की शिकायत एनजीटी से की है। उन्होंने कहा है कि यमुना किनारे के इस क्षेत्र में वर्षभर पक्षियों की मौजूदगी रहती है। सर्दियों में विदेशी पक्षी भी यहां बड़ी संख्या में पहुंचने लगते हैं। लेकिन कुछ लोगों ने यहां पक्षियों का शिकार शुरू कर दिया है। इन्हें बचाने के लिए उन्होंने एनजीटी की शरण ली है। अक्तूबर के बाद यहां विदेशी पक्षियों के यहां आने का दौर शुरू हो जाता है, जो मार्च तक यहां देखे जा सकते हैं।
इसमें साइबेरियन डक, पैलीकॉन, ब्लैक नेक हेरॉक, व्हाइट नेक फिशर, क्रेन, ब्लैक नेक स्टार आदि पक्षी हैं। इसके अलावा देशी पक्षियों में सारस, लालसर बत्तख, जल कौव्या, बगुला, मोर, जंगली तीतर, जंगली मुर्गी, उल्लू, गौरेया भी शामिल बताई जाती है। करीब चार किलोमीटर के दायरे में इन पक्षियों की मौजूदगी यहां बरगद, पीपल, शीशम, जामुन, अर्जुन, नीम और पीपल सहित बबूल की हरियाली इस क्षेत्र को सर्दियों में और भी लुहावना बनाती है।
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भाजपा नेता कुंवर सिंह निषाद ने गोकुल बैराज क्षेत्र में पक्षियों के शिकार को प्रतिबंधित करने की शिकायत एनजीटी से की है। उन्होंने कहा है कि यमुना किनारे के इस क्षेत्र में वर्षभर पक्षियों की मौजूदगी रहती है। सर्दियों में विदेशी पक्षी भी यहां बड़ी संख्या में पहुंचने लगते हैं। लेकिन कुछ लोगों ने यहां पक्षियों का शिकार शुरू कर दिया है। इन्हें बचाने के लिए उन्होंने एनजीटी की शरण ली है। अक्तूबर के बाद यहां विदेशी पक्षियों के यहां आने का दौर शुरू हो जाता है, जो मार्च तक यहां देखे जा सकते हैं।
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इसमें साइबेरियन डक, पैलीकॉन, ब्लैक नेक हेरॉक, व्हाइट नेक फिशर, क्रेन, ब्लैक नेक स्टार आदि पक्षी हैं। इसके अलावा देशी पक्षियों में सारस, लालसर बत्तख, जल कौव्या, बगुला, मोर, जंगली तीतर, जंगली मुर्गी, उल्लू, गौरेया भी शामिल बताई जाती है। करीब चार किलोमीटर के दायरे में इन पक्षियों की मौजूदगी यहां बरगद, पीपल, शीशम, जामुन, अर्जुन, नीम और पीपल सहित बबूल की हरियाली इस क्षेत्र को सर्दियों में और भी लुहावना बनाती है।
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