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किसानों पर ही जोर दिखा पाया प्रशासन
अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 04 Apr 2016 11:25 PM IST
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जवाहर बाग के सत्याग्रहियों से टकराव टालने के लिए किसानों कलक्ट्रेट के द्वार पर रोका
- फोटो : अमर उजाला
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कब्जा जमाए लोगों से जवाहर बाग को खाली कराने के लिए निकले किसानों और उद्यानकर्मियों को जिला प्रशासन ने कलक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया। ऐसा सत्याग्रहियों से टकराव को रोकने के लिए किया गया था। किसानों को रोकने के लिए मुख्य द्वार पर ही पीएसी तैनात थी और पुलिस से रस्सा लगा दिया था। पुलिस बल के चलते कोई व्यक्ति जवाहर बाग की ओर नहीं बढ़ पाया। इससे आक्रोशित किसानों ने डीएम के खिलाफ नारे लगाए और 16 दिन की मोहलत देकर वापस चले गए।
बता दें कि जवाहर बाग में अवैध कब्जा करने वालों के हाथों पिटने के बाद उद्यानकर्मी करीब एक पखवाडे़ से डीएम कार्यालय पर धरना दे रहे हैं। धरनारत कर्मचारियों को विभिन्न राजनीतिक, किसान और कर्मचारी संगठनों ने समर्थन दिया है। पहले से निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को किसान नेता रामबाबू कटैलिया के नेतृत्व में कलक्ट्रेट स्थित वट वृक्ष के नीचे एकत्रित होने के बाद कर्मचारी और किसानों ने जवाहर बाग की ओर कूच किया।
भीड़ को देखकर अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। अब तक कब्जा करने वाले आगे बेबस रहे प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा दी। कलक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर ही पीएसी और पुलिस को तैनात किया गया था जिस कारण कोई भी जवाहर बाग में प्रवेश नहीं कर पाया।
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आक्रोशित किसानों ने जिला प्रशासन और जवाहर बाग में अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लगभग आधा घंटे की मशक्कत के बाद एडीएम वित्त महेन्द्र प्रकाश, एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट विजय कुमार, सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी कर्मचारी और किसानों का नेतृत्व कर रहे किसान नेता रामबाबू कटैलिया और रालोद नेता कुंवर नरेन्द्र सिंह को मनाने में सफल हुए।
इसके बाद वटवृक्ष के नीचे आयोजित सभा में किसान नेता कटैलिया ने जवाहर बाग पर कब्जा कराने में शासन और प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल तक प्रशासन अब खुद जवाहर बाग खाली करा दे नहीं तो हजारों किसान कलक्ट्रेट को कब्जाने के बाद जवाहर बाग को मुक्त कराएंगे।
कुंवर नरेन्द्र सिंह ने कहा कि जवाहर बाग में दो साल से हजारों लोग कब्जा करके रह रहे हैं। उनके भोजन आदि सामग्री की व्यवस्था कहां से हो रही है। बाग की बिजली तक नहीं काटी गई है। हाईकोर्ट के आदेश को भी अफसर नहीं मान रहे हैं। अब इन लोगों को प्रशासन नहीं जिले के लोग ही हटाएंगे। इस मौके पर ताराचंद गोस्वामी, प्रेमसिंह, अनुज गर्ग, शिवदत्त चतुर्वेदी, देवेन्द्र पहलवान, गिर्राज वशिष्ट, लता सिंह चौहान, करन ठाकुर आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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बता दें कि जवाहर बाग में अवैध कब्जा करने वालों के हाथों पिटने के बाद उद्यानकर्मी करीब एक पखवाडे़ से डीएम कार्यालय पर धरना दे रहे हैं। धरनारत कर्मचारियों को विभिन्न राजनीतिक, किसान और कर्मचारी संगठनों ने समर्थन दिया है। पहले से निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को किसान नेता रामबाबू कटैलिया के नेतृत्व में कलक्ट्रेट स्थित वट वृक्ष के नीचे एकत्रित होने के बाद कर्मचारी और किसानों ने जवाहर बाग की ओर कूच किया।
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भीड़ को देखकर अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। अब तक कब्जा करने वाले आगे बेबस रहे प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा दी। कलक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर ही पीएसी और पुलिस को तैनात किया गया था जिस कारण कोई भी जवाहर बाग में प्रवेश नहीं कर पाया।
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आक्रोशित किसानों ने जिला प्रशासन और जवाहर बाग में अवैध कब्जा जमाए बैठे लोगों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लगभग आधा घंटे की मशक्कत के बाद एडीएम वित्त महेन्द्र प्रकाश, एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट विजय कुमार, सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी कर्मचारी और किसानों का नेतृत्व कर रहे किसान नेता रामबाबू कटैलिया और रालोद नेता कुंवर नरेन्द्र सिंह को मनाने में सफल हुए।
इसके बाद वटवृक्ष के नीचे आयोजित सभा में किसान नेता कटैलिया ने जवाहर बाग पर कब्जा कराने में शासन और प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल तक प्रशासन अब खुद जवाहर बाग खाली करा दे नहीं तो हजारों किसान कलक्ट्रेट को कब्जाने के बाद जवाहर बाग को मुक्त कराएंगे।
कुंवर नरेन्द्र सिंह ने कहा कि जवाहर बाग में दो साल से हजारों लोग कब्जा करके रह रहे हैं। उनके भोजन आदि सामग्री की व्यवस्था कहां से हो रही है। बाग की बिजली तक नहीं काटी गई है। हाईकोर्ट के आदेश को भी अफसर नहीं मान रहे हैं। अब इन लोगों को प्रशासन नहीं जिले के लोग ही हटाएंगे। इस मौके पर ताराचंद गोस्वामी, प्रेमसिंह, अनुज गर्ग, शिवदत्त चतुर्वेदी, देवेन्द्र पहलवान, गिर्राज वशिष्ट, लता सिंह चौहान, करन ठाकुर आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।