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हर वर्ष भूजल स्तर चला जाता है २० सेमी नीचे
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मथुरा। कान्हा के ब्रज की जीवनदायिनी शक्ति कालिंदी (यमुना) जब से जल विमुख हुई है तब से जमीन के अंदर का पानी भी नीचे जा रहा है। हर वर्ष जलस्तर करीब २० सेमी नीचे खिसक रहा है। इस कारण सिंचाई से लेकर पेयजल के लिए लगाई गईं बोरिंग को भी रीबोर करना पड़ रहा है।
यमुना नदी में जल की पर्याप्तता के लिए भले ही मथुरा में गोकुल बैराज का निर्माण हो गया हो, लेकिन इससे यमुना की जल संचयिनी शक्ति पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इस कारण यमुना के आसपास बसे हुए गांव और शहरी क्षेत्र में भी भूगर्भ जल की कमी होने के साथ-साथ यह प्रदूषित भी होता जा रहा है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद के तीन ब्लॉक बल्देव, राया और नौहझील को अतिदोहित ब्लॉक माना गया है। यहां पर पानी का स्तर लगभग ४० मीटर तक पहुंच गया है।
यह लगातार नीचे जा रहा है। बलदेव के गांव बरौली अकोस, नौहझील के मानागढ़ी खाजपुर आदि गांवों को जल स्तर के लिहाज से अति संवेदनशील हैं। अन्य स्थानों पर जलस्तर करीब १२ मीटर पर है। एई लघु सिंचाई विकास कुमार ने बताया कि इन स्थानों पर जलस्तर में गिरावट अधिक होने के कारण सिंचाई विभाग की ओर से कोई बोरिंग नहीं की जाती है।
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छह महीने में १३०० हैंड पंप सूखे
विगत छह माह में करीब १३०० हैंडपंप का पानी सूख गया। इन्हें पंचायत राज विभाग की ओर से जल निगम के माध्यम से रीबोर कराया जा रहा है।
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पानी की हर बूंद जाएगी जमीन के अंदर
सरकार की कोशिशों को साकार करने में जुटे पंचायत राज विभाग की ओर से २ करोड़ ४८ लाख के सोख्ता प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इसमें उनके घरों की नालियों के पानी तक को सोख्ता में डालकर जमीन के अंदर डाला जा रहा है। ६८ ग्राम पंचायतों में ११ हजार सोख्ता पिट में से ८०० तैयार हो चुके हैं। डीपीआरओ किरन चौधरी ने बताया कि हम इसके अलावा ४२ कुआं को जीर्णोद्धार करा चुके हैं। हम तालाबों की खोदाई करवा कर उन्हें नहरों के पानी से भरेंगे।
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यमुना से छोड़ा जाता है ३४० क्यूसेक पानी
सिंचाई विभाग के एई राकेश कुमार ने बताया कि यमुना से हम ३४० क्यूसेक पानी लगातार छोड़ते हैं। इतना ही पानी ओखला से तथा इतना ही पानी गोकुल बैराज से छोड़ा जाता है। पिछले दिनों यमुना जल के प्रदूषण के स्तर से भी सुधार आया है।
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१०१ एमएलडी पानी की जरूरत, १८ की कमी
मथुरा। जलनिगम के सीवरेज एंड ड्रेनेज इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर योगेश शर्मा ने बताया कि मथुरा-वृंदावन को १०१ एमएलडी पानी की जरूरत है। २५ एमएलडी गंगाजल की सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा नगर निगम के ३५७ नलकूपों से ५८ एमएलडी पानी की पूर्ति की जाती है। १८ एमएलडी पानी स्वयं के संसाधनों से पूरा कर लिया जाता है। मथुरा-वृंदावन में पानी की बर्बादी नहीं हो रही है। साथ ही अभी तक खारे पानी की कोई शिकायत नहीं आई है। जल्द ही १८ एमएलडी की कमी को भी दूर कर लिया जाएगा।
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यमुना नदी में जल की पर्याप्तता के लिए भले ही मथुरा में गोकुल बैराज का निर्माण हो गया हो, लेकिन इससे यमुना की जल संचयिनी शक्ति पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इस कारण यमुना के आसपास बसे हुए गांव और शहरी क्षेत्र में भी भूगर्भ जल की कमी होने के साथ-साथ यह प्रदूषित भी होता जा रहा है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद के तीन ब्लॉक बल्देव, राया और नौहझील को अतिदोहित ब्लॉक माना गया है। यहां पर पानी का स्तर लगभग ४० मीटर तक पहुंच गया है।
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यह लगातार नीचे जा रहा है। बलदेव के गांव बरौली अकोस, नौहझील के मानागढ़ी खाजपुर आदि गांवों को जल स्तर के लिहाज से अति संवेदनशील हैं। अन्य स्थानों पर जलस्तर करीब १२ मीटर पर है। एई लघु सिंचाई विकास कुमार ने बताया कि इन स्थानों पर जलस्तर में गिरावट अधिक होने के कारण सिंचाई विभाग की ओर से कोई बोरिंग नहीं की जाती है।
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छह महीने में १३०० हैंड पंप सूखे
विगत छह माह में करीब १३०० हैंडपंप का पानी सूख गया। इन्हें पंचायत राज विभाग की ओर से जल निगम के माध्यम से रीबोर कराया जा रहा है।
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पानी की हर बूंद जाएगी जमीन के अंदर
सरकार की कोशिशों को साकार करने में जुटे पंचायत राज विभाग की ओर से २ करोड़ ४८ लाख के सोख्ता प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इसमें उनके घरों की नालियों के पानी तक को सोख्ता में डालकर जमीन के अंदर डाला जा रहा है। ६८ ग्राम पंचायतों में ११ हजार सोख्ता पिट में से ८०० तैयार हो चुके हैं। डीपीआरओ किरन चौधरी ने बताया कि हम इसके अलावा ४२ कुआं को जीर्णोद्धार करा चुके हैं। हम तालाबों की खोदाई करवा कर उन्हें नहरों के पानी से भरेंगे।
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यमुना से छोड़ा जाता है ३४० क्यूसेक पानी
सिंचाई विभाग के एई राकेश कुमार ने बताया कि यमुना से हम ३४० क्यूसेक पानी लगातार छोड़ते हैं। इतना ही पानी ओखला से तथा इतना ही पानी गोकुल बैराज से छोड़ा जाता है। पिछले दिनों यमुना जल के प्रदूषण के स्तर से भी सुधार आया है।
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१०१ एमएलडी पानी की जरूरत, १८ की कमी
मथुरा। जलनिगम के सीवरेज एंड ड्रेनेज इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर योगेश शर्मा ने बताया कि मथुरा-वृंदावन को १०१ एमएलडी पानी की जरूरत है। २५ एमएलडी गंगाजल की सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा नगर निगम के ३५७ नलकूपों से ५८ एमएलडी पानी की पूर्ति की जाती है। १८ एमएलडी पानी स्वयं के संसाधनों से पूरा कर लिया जाता है। मथुरा-वृंदावन में पानी की बर्बादी नहीं हो रही है। साथ ही अभी तक खारे पानी की कोई शिकायत नहीं आई है। जल्द ही १८ एमएलडी की कमी को भी दूर कर लिया जाएगा।