{"_id":"07d3f67f0163c740128f1ceb0c0ea144","slug":"epa-brings-yamuna-waves-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ईपीए लेकर आएगा यमुना की अविरल धारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ईपीए लेकर आएगा यमुना की अविरल धारा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 23 Mar 2015 11:46 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐतिहासिक आंदोलन के बाद ईपीए लागू करने की मांग पर अमल करने के सरकारी वादे
विज्ञापन
पर ही अविरल यमुना की आस जगी है। इसी पर्यावरण संरक्षण एक्ट के दम पर
पूर्व में गंगा का प्रवाह रोकने की कोशिशों को सख्ती से रोका गया था। ईपीए
के वादे को पूरा कराने के लिए यमुना मां के भक्त हर दिन प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखेंगे।
15 मार्च से कोसी के हिंदू इंटर कालेज से निकले पदयात्री तमाम बाधाओं के बाद केंद्र सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हुए। उनकी दो प्रमुख मांग ईपीए (इनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एक्ट) और यमुना के समानांतर नाले बनाने की थी। आंदोलन के संरक्षक पुष्टिमार्गीय आचार्य पंकज बाबा ने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी दोनों मांगे मान ली हैं और इस पर काम भी शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने टीम भी बना दी है जो कुछ दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। इसमें इस बात का उल्लेख रहेगा कि अविरल यमुना के लिए कितने जल का प्रवाह आवश्यक है। यह रिपोर्ट आने के बाद ईपीए लागू कराने की प्रक्रिया शुरू कराने का भरोसा गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिया है।
दिन जाएगी चिट्ठी
ऐतिहासिक आंदोलन के बाद ईपीए लागू करने की मांग पर अमल करने के सरकारी वादे पर ही अविरल यमुना की आस जगी है। इसी पर्यावरण संरक्षण एक्ट के दम पर पूर्व में गंगा का प्रवाह रोकने की कोशिशों को सख्ती से रोका गया था। ईपीए के वादे को पूरा कराने के लिए यमुना मां के भक्त हर दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखेंगे।
यमुना मुक्तिकरण आंदोलन स्थगित होने के साथ ही अब हर दिन सैकड़ों पत्र प्रधानमंत्री को लिखे जाएंगे। इसमें ईपीए और नाला निर्माण के वादे को उन्हें याद दिलाया जाएगा। केंद्र से दो माह का समय मिला है इस अवधि में यह अभियान जारी रहेगा। गुजरात इस अभियान का केंद्र बनेगा और वहां से पीएम मोदी पर ईपीए को लेकर खत के जरिए दबाव बनाया जाएगा।
ईपीए में निहित है असीम शक्ति
इनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट में असीम शक्ति है। 1986 के इस एक्ट से ही 2010 में गंगा के प्रवाह में बाधक बन रहे तीन बड़े प्रोजेक्ट को रुकवाया गया था। बरसाना की पहाड़ियों का संरक्षण भी इसी से हुआ। इस एक्ट के तहत प्राकृतिक स्वरूप यथावत रखा जा सकता है।
आज सफलता का उत्सव
कृष्ण कृपा धाम वृंदावन में मंगलवार को यमुना मुक्तियात्रा से जुड़े संत, समाजसेवी और भक्त उत्सव मनाएंगे। इस पर आंदोलन को मिली सफलता के इस उत्सव में संत रमेश बाबा, साध्वी ऋंतभरा, ज्ञानानंद जी महाराज प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे।
15 मार्च से कोसी के हिंदू इंटर कालेज से निकले पदयात्री तमाम बाधाओं के बाद केंद्र सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हुए। उनकी दो प्रमुख मांग ईपीए (इनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एक्ट) और यमुना के समानांतर नाले बनाने की थी। आंदोलन के संरक्षक पुष्टिमार्गीय आचार्य पंकज बाबा ने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी दोनों मांगे मान ली हैं और इस पर काम भी शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने टीम भी बना दी है जो कुछ दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। इसमें इस बात का उल्लेख रहेगा कि अविरल यमुना के लिए कितने जल का प्रवाह आवश्यक है। यह रिपोर्ट आने के बाद ईपीए लागू कराने की प्रक्रिया शुरू कराने का भरोसा गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिया है।
दिन जाएगी चिट्ठी
ऐतिहासिक आंदोलन के बाद ईपीए लागू करने की मांग पर अमल करने के सरकारी वादे पर ही अविरल यमुना की आस जगी है। इसी पर्यावरण संरक्षण एक्ट के दम पर पूर्व में गंगा का प्रवाह रोकने की कोशिशों को सख्ती से रोका गया था। ईपीए के वादे को पूरा कराने के लिए यमुना मां के भक्त हर दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखेंगे।
यमुना मुक्तिकरण आंदोलन स्थगित होने के साथ ही अब हर दिन सैकड़ों पत्र प्रधानमंत्री को लिखे जाएंगे। इसमें ईपीए और नाला निर्माण के वादे को उन्हें याद दिलाया जाएगा। केंद्र से दो माह का समय मिला है इस अवधि में यह अभियान जारी रहेगा। गुजरात इस अभियान का केंद्र बनेगा और वहां से पीएम मोदी पर ईपीए को लेकर खत के जरिए दबाव बनाया जाएगा।
ईपीए में निहित है असीम शक्ति
इनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट में असीम शक्ति है। 1986 के इस एक्ट से ही 2010 में गंगा के प्रवाह में बाधक बन रहे तीन बड़े प्रोजेक्ट को रुकवाया गया था। बरसाना की पहाड़ियों का संरक्षण भी इसी से हुआ। इस एक्ट के तहत प्राकृतिक स्वरूप यथावत रखा जा सकता है।
आज सफलता का उत्सव
कृष्ण कृपा धाम वृंदावन में मंगलवार को यमुना मुक्तियात्रा से जुड़े संत, समाजसेवी और भक्त उत्सव मनाएंगे। इस पर आंदोलन को मिली सफलता के इस उत्सव में संत रमेश बाबा, साध्वी ऋंतभरा, ज्ञानानंद जी महाराज प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे।