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रामराज्य के लिए शाकाहार और सदाचार अपनाएं: पंकज महाराज
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भंडारा सत्संग में भक्तों का अभिवादन करते पंकज महाराज।
मथुरा। बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी पंकज महाराज ने रामराज्य की स्थापना के लिए लोगों से शाकाहार अपनाने और बुद्धि नाशक वस्तुओं का त्याग करने का आह्वान किया। उन्होंने ब्रह्मा-लोमस ऋषि संवाद, कर्मकांड, सुख-शांति की प्राप्ति, संतों की महिमा तथा योग के महत्व को भी विस्तार से समझाया।
जयगुरुदेव नाम योग साधना मंदिर में चल रहे 14वें वार्षिक भंडारा सत्संग मेले में मंगलवार को प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग की साधनाएं कलयुग में उसी रूप में संभव नहीं हैं। वर्तमान में मनुष्य के पास न तो पर्याप्त समय है और न ही साधना की क्षमता। ऐसे में केवल बाहरी कर्मकांड, तीर्थ, व्रत और उपवास से प्रभु की प्राप्ति संभव नहीं है। प्रभु की प्राप्ति इसी मानव शरीर में संतों के बताए मार्ग और सत्संग के माध्यम से हो सकती है।पंकज महाराज ने कहा कि मनुष्य संसार में जिन संबंधों को अपना मानता है, वही कई बार दुख का कारण बन जाते हैं। ऐसे में वास्तविक सहारा वही महात्मा हैं, जो जीव को उसके निजधाम तक पहुंचाने का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि जयगुरुदेव नाम स्वयं अनामी महाप्रभु का है।
उन्होंने कहा कि संतों का उद्देश्य जीवों को अज्ञान और दुखों से निकालकर उनके वास्तविक घर तक पहुंचाना है। जब तक जीव का अपने मूल स्वरूप और परमात्मा से मिलन नहीं होगा, तब तक संसार में स्थायी सुख और शांति नहीं मिल सकती। भौतिक तरक्की के बावजूद मनुष्य के चेहरे पर चिंता और असंतोष दिखाई देता है, क्योंकि जीवन से नैतिक मूल्य और संवेदनाएं कम होती जा रही हैं।पंकज महाराज ने आगामी तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा सत्संग मेले की घोषणा की। बताया कि यह आयोजन 28 से 30 जुलाई तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में होगा। बताया कि वह 22 मई से आंबेडकर नगर में 38 दिवसीय सत्संग यात्रा पर तथा 5 जून को आजमगढ़ स्थित जयगुरुदेव आश्रम खानपुर में सत्संग कार्यक्रम होगा।
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सोमवार रात पंकज महाराज ने मंदिर एवं सत्संग भवन में पूजन कर जीवों के कल्याण के लिए प्रार्थना की। पूजन कार्यक्रम 21 मई तक चलेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला परिसर को 30 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। व्यवस्था के संचालन के लिए 39 अलग-अलग विभाग बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद, शरबत, सत्तू और ठंडे पेयजल की व्यापक व्यवस्था की गई है। वहीं दहेज रहित सामूहिक विवाह कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। 21 मई तक अन्य विवाह समारोह भी आयोजित किए जाएंगे।
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जयगुरुदेव नाम योग साधना मंदिर में चल रहे 14वें वार्षिक भंडारा सत्संग मेले में मंगलवार को प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग की साधनाएं कलयुग में उसी रूप में संभव नहीं हैं। वर्तमान में मनुष्य के पास न तो पर्याप्त समय है और न ही साधना की क्षमता। ऐसे में केवल बाहरी कर्मकांड, तीर्थ, व्रत और उपवास से प्रभु की प्राप्ति संभव नहीं है। प्रभु की प्राप्ति इसी मानव शरीर में संतों के बताए मार्ग और सत्संग के माध्यम से हो सकती है।पंकज महाराज ने कहा कि मनुष्य संसार में जिन संबंधों को अपना मानता है, वही कई बार दुख का कारण बन जाते हैं। ऐसे में वास्तविक सहारा वही महात्मा हैं, जो जीव को उसके निजधाम तक पहुंचाने का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि जयगुरुदेव नाम स्वयं अनामी महाप्रभु का है।
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उन्होंने कहा कि संतों का उद्देश्य जीवों को अज्ञान और दुखों से निकालकर उनके वास्तविक घर तक पहुंचाना है। जब तक जीव का अपने मूल स्वरूप और परमात्मा से मिलन नहीं होगा, तब तक संसार में स्थायी सुख और शांति नहीं मिल सकती। भौतिक तरक्की के बावजूद मनुष्य के चेहरे पर चिंता और असंतोष दिखाई देता है, क्योंकि जीवन से नैतिक मूल्य और संवेदनाएं कम होती जा रही हैं।पंकज महाराज ने आगामी तीन दिवसीय गुरु पूर्णिमा सत्संग मेले की घोषणा की। बताया कि यह आयोजन 28 से 30 जुलाई तक जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में होगा। बताया कि वह 22 मई से आंबेडकर नगर में 38 दिवसीय सत्संग यात्रा पर तथा 5 जून को आजमगढ़ स्थित जयगुरुदेव आश्रम खानपुर में सत्संग कार्यक्रम होगा।
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सोमवार रात पंकज महाराज ने मंदिर एवं सत्संग भवन में पूजन कर जीवों के कल्याण के लिए प्रार्थना की। पूजन कार्यक्रम 21 मई तक चलेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला परिसर को 30 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। व्यवस्था के संचालन के लिए 39 अलग-अलग विभाग बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद, शरबत, सत्तू और ठंडे पेयजल की व्यापक व्यवस्था की गई है। वहीं दहेज रहित सामूहिक विवाह कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। 21 मई तक अन्य विवाह समारोह भी आयोजित किए जाएंगे।