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मास्टर डाटा मिलान करने में अधिकारी हुए परेशान
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मथुरा। 562 उच्च शिक्षण संस्थाओं तथा उनमें चल रहे 1536 कोर्स में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के मास्टर डाटा के मिलान में समाज कल्याण विभाग के अधिकारी परेशान हो गए। 40 प्रतिशत से अधिक शिक्षण संस्थाओं ने केवल ऑनलाइन डाटा ही फीड किया था, जिसके चलते इन शिक्षण संस्थाओं से रिकॉर्ड मंगाया गया है। उधर, समाज कल्याण विभाग द्वारा की जा रही गहरी छानबीन से शिक्षण संस्थानों के संचालक परेशान हैं। उनको डर है कि मास्टर डाटा में सच्चाई सामने आने से उनके फर्जीवाड़े की कलई खुल जाएगी।
शिक्षण संस्थाओं के संचालक ऑनलाइन मास्टर डाटा में अपने यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या और उनकी फीस में गड़बड़ी करते थे। जिसकी जानकारी समाज कल्याण अधिकारी से लेकर इस पोर्टल से जुड़े अन्य अधिकारियों को भी रहती थी। इसकी जानकारी लगने पर पूर्व समाज कल्याण अधिकारी द्वारा भेजे जाने वाले डाटा को विभाग द्वारा रोक लिया गया।
शासन ने इस दफा डाटा की जांच करने के लिए पांच सदस्यीय समिति तैयार की। समिति द्वारा मास्टर डाटा लॉक करने के बाद जांच की तो 60 प्रतिशत शिक्षण संस्थाओं का रिकॉर्ड ही नहीं मिला। ऑनलाइन रिकॉर्ड न होने पर समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर गुप्ता द्वारा सभी शिक्षण संस्थाओं से कार्यालयी प्रति मंगाई गई। यह प्रति मिलने के बाद समाज कल्याण अधिकारी द्वारा इनकी जांच की गई। जांच में काफी समय लग गया। जिसमें शिक्षण संस्थाओं की ऑनलाइन दर्ज की गई सीट और फीस के रिकॉर्ड में काफी अंतर मिला। समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि अब जल्द ही मास्टर डाटा पूर्ण कर शासन को भेज दिया जाएगा।
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शिक्षण संस्थाओं के संचालक ऑनलाइन मास्टर डाटा में अपने यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या और उनकी फीस में गड़बड़ी करते थे। जिसकी जानकारी समाज कल्याण अधिकारी से लेकर इस पोर्टल से जुड़े अन्य अधिकारियों को भी रहती थी। इसकी जानकारी लगने पर पूर्व समाज कल्याण अधिकारी द्वारा भेजे जाने वाले डाटा को विभाग द्वारा रोक लिया गया।
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शासन ने इस दफा डाटा की जांच करने के लिए पांच सदस्यीय समिति तैयार की। समिति द्वारा मास्टर डाटा लॉक करने के बाद जांच की तो 60 प्रतिशत शिक्षण संस्थाओं का रिकॉर्ड ही नहीं मिला। ऑनलाइन रिकॉर्ड न होने पर समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर गुप्ता द्वारा सभी शिक्षण संस्थाओं से कार्यालयी प्रति मंगाई गई। यह प्रति मिलने के बाद समाज कल्याण अधिकारी द्वारा इनकी जांच की गई। जांच में काफी समय लग गया। जिसमें शिक्षण संस्थाओं की ऑनलाइन दर्ज की गई सीट और फीस के रिकॉर्ड में काफी अंतर मिला। समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि अब जल्द ही मास्टर डाटा पूर्ण कर शासन को भेज दिया जाएगा।
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