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Mathura News: जिले के आठ वन क्षेत्रों में इकोरेस्टोरेशन कार्य आरंभ
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मथुरा। वन विभाग ने जिले के आठ वन क्षेत्रों में इकोरेस्टोरेशन का कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए पहले चरण में पौधरोपण के लिए चिह्नित भूमि को चेनलिंग फेंसिंग कर संरक्षित कराया जा रहा है। विभाग ने इसके लिए टेंडरिंग प्रक्रिया आरंभ कर दी है।
ब्रज के धार्मिक और पौराणिक महत्व के 36 वनों के विकास के साथ कोसी-सौंख-मथुरा रोड के चौड़ीकरण में पेड़ कटान की एवज में ततरौता में प्राप्त भूमि पर वृहद पौधरोपण किया जाना है। इसमें से आठ क्षेत्रों को वन विभाग ने इसके लिए चिह्नित किया है। इस चेनलिंग फेंसिंग की टेंडरिंग प्रक्रिया शुरु कर दी है। इसमें जतीपुरा में 50.2 लाख रुपये से पांच हेक्टेयर, नंदगांव में 100.5 लाख से 10 हेक्टेयर, रुपनगर में 100.5 लाख से 10 हेक्टेयर तथा शेरनगर में दो भागों में 201 लाख रुपये से 10-10 हेक्टेयर में चेनलिंग फेंसिंग होगी। वहीं ततरौता में तीन भागों में 84 हेक्टेयर भूमि पर 2.65 करोड़ रुपये से चेनलिंग फेंसिंग से संरक्षित किया जाएगा। इन क्षेत्रों से गैरलाभकारी और बिलायती बबूल के कंटीले जैसे पेड़ हटाकर चौड़ी पत्ती वाले उपयोगी देशज प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। इनमें बरगद, पीपल, कंजी, शीशम, जामुन, नीम, आम और कदंब आदि शामिल हैं।
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ईकोरेस्टोरेशन के लिए आठ क्षेत्रों का चयन किया गया है। इन क्षेत्रों में गैरजरुरी पेड़ हटाकर छायादार पौधरोपण रोपण किया जाना है। इससे पूर्व भूमि के संरक्षण के लिए चेनलिंग फेंसिंग कार्य कराए जाने का कार्य शुरू करा दिया है।
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वेंकट श्रीकर पटेल, डीएफओ
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ब्रज के धार्मिक और पौराणिक महत्व के 36 वनों के विकास के साथ कोसी-सौंख-मथुरा रोड के चौड़ीकरण में पेड़ कटान की एवज में ततरौता में प्राप्त भूमि पर वृहद पौधरोपण किया जाना है। इसमें से आठ क्षेत्रों को वन विभाग ने इसके लिए चिह्नित किया है। इस चेनलिंग फेंसिंग की टेंडरिंग प्रक्रिया शुरु कर दी है। इसमें जतीपुरा में 50.2 लाख रुपये से पांच हेक्टेयर, नंदगांव में 100.5 लाख से 10 हेक्टेयर, रुपनगर में 100.5 लाख से 10 हेक्टेयर तथा शेरनगर में दो भागों में 201 लाख रुपये से 10-10 हेक्टेयर में चेनलिंग फेंसिंग होगी। वहीं ततरौता में तीन भागों में 84 हेक्टेयर भूमि पर 2.65 करोड़ रुपये से चेनलिंग फेंसिंग से संरक्षित किया जाएगा। इन क्षेत्रों से गैरलाभकारी और बिलायती बबूल के कंटीले जैसे पेड़ हटाकर चौड़ी पत्ती वाले उपयोगी देशज प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। इनमें बरगद, पीपल, कंजी, शीशम, जामुन, नीम, आम और कदंब आदि शामिल हैं।
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ईकोरेस्टोरेशन के लिए आठ क्षेत्रों का चयन किया गया है। इन क्षेत्रों में गैरजरुरी पेड़ हटाकर छायादार पौधरोपण रोपण किया जाना है। इससे पूर्व भूमि के संरक्षण के लिए चेनलिंग फेंसिंग कार्य कराए जाने का कार्य शुरू करा दिया है।
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वेंकट श्रीकर पटेल, डीएफओ