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मिट्टी के दीयों की मार्केटिंग कर रहे संघ प्रचारक

Thu, 27 Oct 2016 10:52 PM IST
पुनीत शर्मा
पुनीत शर्मा Updated Thu, 27 Oct 2016 10:52 PM IST
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earthen lamps publicity by rss
सांकेतिक चित्र - फोटो : Getty images
कुम्हार के चाक पर तैयार होने वाले दीयों की मार्केटिंग इस बार संघ कर रहा है। संघ के प्रचारक गांवों और मोहल्लों में जाकर दीपावली पर इन दीयों को जलाने के लिए तो प्रेरित कर ही रहे हैं इसका वैज्ञानिक आधार भी बता रहे हैं। चाइनीज झालरों की टक्कर को देसी झालर बनाने की भी ट्रेनिंग शाखाओं के जरिए दी गई है।
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दीपावली पर सबसे ज्यादा चाइनीज इलेक्ट्रानिक आइटम की बिक्री होती है। चाहे झालर हों या झूमर। हर साल करोड़ों की बिक्री हो जाती है। लेकिन इस साल चीन की ओर से बार-बार पाकिस्तान की मदद करना और सेना कैंप पर हमला करने वाले आतंकियों से चीन निर्मित हथियार बरामद होने के बाद चाइनीज आइटम का विरोध बढ़ गया है।
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आरएसएस ने भी इसका बीड़ा उठाया है। हर शहर और मुहल्ले में लगने वाली शाखाओं में लोगों को बताया गया कि वह अपने आसपास में बताएं कि देश में बनने वाले इलेक्ट्रानिक उपकरण ही इस्तेमाल करें। संघ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रचारक पदम सिंह ने बताया कि प्रचारकों ने हर गांव में मीटिंग करके लोगों से मिट्टी के दीये जलाने की अपील की। इसका बड़ा असर हो भी रहा है।
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उनका कहना है कि अगले साल से व्यापक असर नजर आएगा। मिट्टी के दीयों की बिक्री बढ़ी भी है। पिछले वर्ष तक जो लोग अपने घरों को केवल झालर से रोशन करते थे वह इस बार अधिक से अधिक दीये जलाएंगे। आरएसएस के लोगों ने कई जिलों में दीयों का वितरण भी कराया है।

सुबह की शाखा के बाद घरों को लौटने वाले लोग दीये बांट रहे हैं। आगरा, अलीगढ़, कानपुर, फैजाबाद, मेरठ, मुरादाबाद, गोरखपुर, झांसी और सहारनपुर में तो बाकायदा लोगों को झालर बनाने की ट्रेनिंग दी गई। लोगों ने बड़ी आसानी के साथ झालर बना भी ली। इन झालर और दीयों का प्रचार सोशल मीडिया के जरिए भी किया गया है।


15 लाख स्वयंसेवकों ने उठाया बीड़ा
उत्तर प्रदेश में संघ के करीब पंद्रह लाख स्वयंसेवक माने जाते हैं। एक-एक स्वयंसेवक को दस-दस परिवारों का जिम्मा सौंपा गया था। इन पर जिम्मेदारी थी कि वह अपने पड़ोसियों को समझाएं कि चाइनीज आइटम का बहिष्कार करें। मिट्टी के दीयों का प्रयोग किया जाए। दीये खरीदने के बाद बांटे भी गए हैं।  
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