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दशहरा पर किया दान पुण्य, नहीं हुए आराध्य के दर्शन
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राधारानी कुंड में स्नान करते श्रद्धालु।
- फोटो : MATHURA
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राधाकुंड। सोमवार को गंगा दशहरा पर्व पर लोगों ने राधारानी कुंड में स्नान किया। दान कर पुण्य कमाया। मंदिर बंद होने से श्रद्धालुओं को अपने आराध्य के दर्शन नहीं हुए। गंगा दशहरा को श्रद्धालुओं ने गिरिराज परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
कोरोना के भय के चलते गिरिराज परिक्रमा में सन्नाटा पसरा रहा। लोगों द्वारा घरों में रहकर स्नान दान किया। लोग सोशल डिस्टेसिंग की धज्जियां उड़ाते देखे गए। एसडीएम राहुल यादव ने बताया कि नई गाइड लाइन आने तक मंदिरों में दर्शन एवं कुंड और तालाबों में स्नान करने पर पूर्ण पाबंदी है।
‘मंदिर खुलने से श्रद्धालुओं को मिलेगा आत्मिक संतोष’
राधाकुंड। राज्य सरकार द्वारा 8 जून से मंदिरों को खोलने का निर्णय लिया है। ब्राह्मण व पंडा समाज ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया। पंडित बृजकिशोर गोस्वामी ने कहा की 2 महीने से भी अधिक समय से मंदिर भक्तों के लिए बंद थे।
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इसे लेकर ब्राह्मण समाज द्वारा कई बार मंदिरों को खोलने की मांग की गई थी। पंडा पुजारियों ने कहा की नगर की सारी अर्थव्यवस्था मंदिरों और गिरिराज परिक्रमा के आसपास ही घूमती है। मंदिर खुलने से यहां के रहने वालों की रोजी रोटी के साथ साथ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भक्ति का लाभ प्राप्त होगा। मंदिरों के खुलने से श्रद्धालुओं को आत्मिक संतोष मिलेगा।
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कोरोना के भय के चलते गिरिराज परिक्रमा में सन्नाटा पसरा रहा। लोगों द्वारा घरों में रहकर स्नान दान किया। लोग सोशल डिस्टेसिंग की धज्जियां उड़ाते देखे गए। एसडीएम राहुल यादव ने बताया कि नई गाइड लाइन आने तक मंदिरों में दर्शन एवं कुंड और तालाबों में स्नान करने पर पूर्ण पाबंदी है।
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‘मंदिर खुलने से श्रद्धालुओं को मिलेगा आत्मिक संतोष’
राधाकुंड। राज्य सरकार द्वारा 8 जून से मंदिरों को खोलने का निर्णय लिया है। ब्राह्मण व पंडा समाज ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया। पंडित बृजकिशोर गोस्वामी ने कहा की 2 महीने से भी अधिक समय से मंदिर भक्तों के लिए बंद थे।
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इसे लेकर ब्राह्मण समाज द्वारा कई बार मंदिरों को खोलने की मांग की गई थी। पंडा पुजारियों ने कहा की नगर की सारी अर्थव्यवस्था मंदिरों और गिरिराज परिक्रमा के आसपास ही घूमती है। मंदिर खुलने से यहां के रहने वालों की रोजी रोटी के साथ साथ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भक्ति का लाभ प्राप्त होगा। मंदिरों के खुलने से श्रद्धालुओं को आत्मिक संतोष मिलेगा।