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वन चेतना केंद्र को विकसित करेगा विश्वबैंक

Thu, 28 Apr 2016 11:17 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 28 Apr 2016 11:17 PM IST
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development of forest range in mathura
वन चेतना केंद्र - फोटो : अमर उजाला
लगभग दो दशकों से उजड़े पड़े वन चेतना केंद्र में फिर से बहार आने वाली है। विश्व बैंक के प्रो-पूअर प्रोजेक्ट के तहत वन विभाग के उजड़े पड़े वन चेतना केंद्र को भी नया रूप दिया जाएगा। इस योजना के तहत लगभग 40 एकड़ में सुंदर वन तैयार किए जाने के साथ ही जगह-जगह मयूर संरक्षण गृह का निर्माण कराया जा रहा है। यहां शोधशाला का निर्माण किया जाएगा।
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मथुरा-वृंदावन मार्ग पर गांव धौरेरा और गांव अहिल्यागंज के बीच वन विभाग की ओर से 80 के दशक में वन चेतना केंद्र तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य लोगों को वन संपदा के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जागरूक करना था। लोगों को आकर्षित करने के उद्देश्य से वन विभाग ने कई प्रकार के जानवर और पक्षियों की कई प्रजातियां लाईं गईं। रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे यह उजड़ गया।
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पिछले दिनों वृंदावन में पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने आई विश्व बैंक की टीम ने वन विभाग के इस केंद्र को लोगों के लिए पिकनिक स्पाट के साथ ही शोधशाला के रूप में फिर से विकसित करने पर विचार किया। प्रदेश सरकार के आदेश पर वन विभाग ने वन चेतना केंद्र को विकसित करने का कार्य शुरू कर दिया है। जर्जर भवनों और चार दीवारी को दुरुस्त करने का कार्य तेजी से चल रहा है। बरसात के पानी के संरक्षण के लिए टैंकों की मरम्मत की जा रही है। बच्चों को आकर्षित करने के लिए झूले भी लगाए जाने की योजना है।
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रोपे जाएंगे तरह-तरह के पौधे 
वृंदावन। वन दरोगा श्यामवीर सिंह ने बताया कि मथुरा वृंदावन के मध्य वन चेतना केंद्र पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए मुफीद स्थान है। केंद्र को हराभरा बनाने के लिए कदंब, पीपल, जामुन, बरगद, शीशम, नीम, अमरूद आदि के 200 पौधे लगाए जाएंगे। मीठे पानी की समस्या को देखते हुए जंगल में नई बोरिंग कराई गई है।


मयूर संरक्षण गृह और शोधशाला भी होगी
राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए वन चेतना केंद्र में जगह-जगह मयूर संरक्षण गृह बनाए गए हैं। इनमें मोर की कई प्रजातियों का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा। लोगों को वन संपदा और पर्यावरण में वन की भूमिका के प्रति जागरूक करने के लिए वन चेतना केंद्र में वन शोधशाला का भी निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। बताया गया है कि लगभग 30 लाख की लागत से बनने जा रही इस शोधशाला के माध्यम से पर्यटकों, श्रद्धालुओं और आम लोगों को पर्यावरण और वन संपदाओं के संरक्षण के लिए जागरूक किया जाएगा। शोधार्थी यहां प्रशिक्षण भी ले सकेंगे।
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