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कनकांचल व आदि बद्री पर्वत को वन क्षेत्र घोषित करने की मांग
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राधाकुंड। कनकाचल व आदिबद्री पर्वत को खनन मुक्त कराने के लिए साधु-संतों एवं ब्रजवासियों का धरना 300वें दिन भी जारी रहा। ज्ञात रहे एक अक्तूबर को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने साधु-संतों व ब्रजवासियों की प्रार्थना को स्वीकारते हुए ब्रज के दोनों आराध्य पर्वत कनकांचल व आदि बद्री को खनन मुक्त कर संरक्षित वन घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था।
सैद्धांतिक निर्णय लेने के एक महीने बाद भी अभी तक दोनों पर्वतों को वन क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं किया गया है। खनन माफिया बेखौफ होकर दोनों पर्वतों पर सभी नियमों को ताक पर रख कर खनन को अंजाम दे रहे हैं। आंदोलनकारियों की गोवर्धन क्षेत्र के पूंछरी का लौठा में 6000 लोगों की उपस्थिति में समीक्षा बैठक हुई। अध्यक्षता पूर्व विधायक प्रदीप माथुर ने की।
संरक्षण समिति के संरक्षक राधाकांत शास्त्री ने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक निर्णय लेकर दोनों पर्वतों के संरक्षण का मार्ग निश्चित कर दिया था, लेकिन खेद का विषय है कि सरकारी तंत्र की लचरता एवं प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण अभी तक दोनों पर्वतों को वन क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं किया गया है।
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प्रदीप माथुर ने कहा कि वर्ष 2009 में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने ही ब्रज के अधिकांश पर्वतीय क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया था। मानमंदिर के अध्यक्ष रामजी लाल शास्त्री, संत नरसिंह दास, महंत शिवरामदास हरि बोल, भूरा, ब्रजकिशोर, साध्वी गौरी, साध्वी श्रीजी एवं कई गांवों के सरपंच मौजूद थे।
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सैद्धांतिक निर्णय लेने के एक महीने बाद भी अभी तक दोनों पर्वतों को वन क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं किया गया है। खनन माफिया बेखौफ होकर दोनों पर्वतों पर सभी नियमों को ताक पर रख कर खनन को अंजाम दे रहे हैं। आंदोलनकारियों की गोवर्धन क्षेत्र के पूंछरी का लौठा में 6000 लोगों की उपस्थिति में समीक्षा बैठक हुई। अध्यक्षता पूर्व विधायक प्रदीप माथुर ने की।
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संरक्षण समिति के संरक्षक राधाकांत शास्त्री ने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक निर्णय लेकर दोनों पर्वतों के संरक्षण का मार्ग निश्चित कर दिया था, लेकिन खेद का विषय है कि सरकारी तंत्र की लचरता एवं प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण अभी तक दोनों पर्वतों को वन क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं किया गया है।
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प्रदीप माथुर ने कहा कि वर्ष 2009 में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने ही ब्रज के अधिकांश पर्वतीय क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया था। मानमंदिर के अध्यक्ष रामजी लाल शास्त्री, संत नरसिंह दास, महंत शिवरामदास हरि बोल, भूरा, ब्रजकिशोर, साध्वी गौरी, साध्वी श्रीजी एवं कई गांवों के सरपंच मौजूद थे।