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पांच माह बाद रिपोर्ट, उसमें भी ‘खेल’
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Thu, 23 Jul 2015 11:12 PM IST
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जेनर्म की बीएसयूपी योजना के अंतर्गत मलिन बस्तियों में गरीबों के आवास निर्माण में करोड़ों रुपये का घपला हुआ है। इस पर शासन स्तर से कराई गई जांच के बाद कार्रवाई की फाइल जिला प्रशासन ने पांच माह तक दबाए रखी। अब एक पखवाड़े पहले हुई रिपोर्ट में भी अफसरों ने बचाने और फंसाने का खेल शुरू हो गया है।
बता दें कि नगर आयुक्त आगरा ने मथुरा में जेनर्म की बीएसयूपी (बेसिक सर्विसेज टू अर्बन पूअर) योजना के अंतर्गत हुए निर्माण कार्याें की जांच की थी। इसमें मलिन बस्ती राधेश्याम कालोनी में आवास निर्माण में अनियमितताओं की बात सामने आई और करोड़ों रुपये का घपला उजागर हुआ। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य नगरीय विकास
अभिकरण के निदेशक श्रीप्रकाश सिंह ने 10 फरवरी 2015 को शासन के आदेश पर डीएम राजेश कुमार मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसमें अपात्र लाभार्थियों को आवंटित भवन निरस्त करते हुए नियमानुसार आवंटन, तत्कालीन पीओ डूडा सहित दोषी उत्तरदायी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई, कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के संबंधित दोषी अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के अलावा जांच समिति द्वारा प्रस्तुत आख्या में प्रकाश में आई अनियमितताओं के आधार पर इस प्रकरण में नई एफआईआर कराने के निर्देश थे।
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निदेशक ने तत्काल कार्रवाई के साथ इससे अवगत कराने को भी कहा। इसके बावजूद करोड़ों रुपये के घपले की फाइल पांच माह तक दबी रही। 10 फरवरी 2015 के इस आदेश पर तीन जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें भी अफसरों ने दोषियों को बचाने और बाहरी लोगों को फंसाने का खेल खेला है। पूरे प्रकरण मेें योजना से जुड़े आलाधिकारियों को दूर रखते हुए मिलन भाटिया, राजवीर सिंह राघव, मुन्नीदेवी, मधु पारासर, जेएल त्रिपाठी, भरतराम मौर्या के खिलाफ थाना गोविंद नगर में पीओ डूडा सुभाषवीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। करोड़ों रुपये के घपले से जुड़े इस प्रकरण में शासन के आदेश पर जिले में पांच माह बाद कार्रवाई ने जिले के जिम्मेदार अफसरों की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्रवाई के निर्देश के बाद संबंधित मामले के आदेश और फाइल देर से प्राप्त हुए थे। आदेश के अनुपालन के क्रम में पीओ डूडा के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
राजेश कुमार
डीएम, मथुरा
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बता दें कि नगर आयुक्त आगरा ने मथुरा में जेनर्म की बीएसयूपी (बेसिक सर्विसेज टू अर्बन पूअर) योजना के अंतर्गत हुए निर्माण कार्याें की जांच की थी। इसमें मलिन बस्ती राधेश्याम कालोनी में आवास निर्माण में अनियमितताओं की बात सामने आई और करोड़ों रुपये का घपला उजागर हुआ। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य नगरीय विकास
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अभिकरण के निदेशक श्रीप्रकाश सिंह ने 10 फरवरी 2015 को शासन के आदेश पर डीएम राजेश कुमार मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसमें अपात्र लाभार्थियों को आवंटित भवन निरस्त करते हुए नियमानुसार आवंटन, तत्कालीन पीओ डूडा सहित दोषी उत्तरदायी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई, कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम के संबंधित दोषी अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के अलावा जांच समिति द्वारा प्रस्तुत आख्या में प्रकाश में आई अनियमितताओं के आधार पर इस प्रकरण में नई एफआईआर कराने के निर्देश थे।
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निदेशक ने तत्काल कार्रवाई के साथ इससे अवगत कराने को भी कहा। इसके बावजूद करोड़ों रुपये के घपले की फाइल पांच माह तक दबी रही। 10 फरवरी 2015 के इस आदेश पर तीन जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें भी अफसरों ने दोषियों को बचाने और बाहरी लोगों को फंसाने का खेल खेला है। पूरे प्रकरण मेें योजना से जुड़े आलाधिकारियों को दूर रखते हुए मिलन भाटिया, राजवीर सिंह राघव, मुन्नीदेवी, मधु पारासर, जेएल त्रिपाठी, भरतराम मौर्या के खिलाफ थाना गोविंद नगर में पीओ डूडा सुभाषवीर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। करोड़ों रुपये के घपले से जुड़े इस प्रकरण में शासन के आदेश पर जिले में पांच माह बाद कार्रवाई ने जिले के जिम्मेदार अफसरों की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्रवाई के निर्देश के बाद संबंधित मामले के आदेश और फाइल देर से प्राप्त हुए थे। आदेश के अनुपालन के क्रम में पीओ डूडा के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
राजेश कुमार
डीएम, मथुरा