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Mathura News: वृंदावन में दिन ढलते ही छा जाता है अंधेरा, नगर निगम बेबस
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वृंदावन। बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र सहित प्रमुख मंदिरों और मार्गों पर दिन ढलते ही अंधेरा छा जाता है। करोड़ों रुपये की लागत से लगी स्ट्रीट लाइट पिछले एक साल से शोपीस बनीं हैं। नतीजतन देर शाम मंदिर जाने वाले भक्तों को अंधेरे से गुजरना पड़ता है। नगर निगम भी पिछले छह माह से स्टोर में स्ट्रीट लाइट न होने से वृंदावन को उजाला देने में बेबस है। वहीं अंधेरी कुंज गलियों में लोगों को आपराधिक घटनाओं का डर सता रहा है।
करोड़ों की लागत के विकास कार्यों की परियोजनाओं का हिस्सा इन लाइटों के रखरखाव पर नगर निगम का कोई ध्यान नहीं है, जिससे मुख्यमंत्री के सपनों की तीर्थ नगरी का मॉडल विकसित करने के प्रयासों को पंख नहीं लग पा रहे हैं। विश्व बैंक की प्रो-पूअर योजना में बांकेबिहारी मंदिर के आसपास की 22 गलियों, परिक्रमा मार्ग में कलात्मक स्ट्रीट लाइट लगाई गईं। करोड़ों की लागत से लगी स्ट्रीट लाइटें कुछ भी उजाला नहीं कर सकीं। इनमें से अधिकांश लाइटें देखरेख के अभाव में टूट गईं।
दर्जनों ऐसे पोल खड़े हैं, जिनमें बल्ब ही नहीं हैं। पिछले वर्षों में इसे स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए कई बड़े बजट की परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाया गया है। बावजूद इसके नगर में लगीं स्ट्रीट लाइटें शोपीस साबित हो रहीं हैं और सेवाकुंज, अठखंभा, व्यास घेरा, लोई बाजार, सीएफसी चौराहा, पुराना बजाजा आदि क्षेत्रों में अंधेरा छाया रहता है।
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नगर निगम के प्रकाश व्यवस्था प्रभारी विजय नारायण मौर्य का कहना है कि गत मई माह से स्टोर में न ही बल्ब हैं और ना ही स्ट्रीट लाइटें हैं। 1700 लाइटों को टेंडर हो रहा है। टेंडर पास हो जाने के बाद भी वृंदावन में लाइट लगाई जाएंगी।
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करोड़ों की लागत के विकास कार्यों की परियोजनाओं का हिस्सा इन लाइटों के रखरखाव पर नगर निगम का कोई ध्यान नहीं है, जिससे मुख्यमंत्री के सपनों की तीर्थ नगरी का मॉडल विकसित करने के प्रयासों को पंख नहीं लग पा रहे हैं। विश्व बैंक की प्रो-पूअर योजना में बांकेबिहारी मंदिर के आसपास की 22 गलियों, परिक्रमा मार्ग में कलात्मक स्ट्रीट लाइट लगाई गईं। करोड़ों की लागत से लगी स्ट्रीट लाइटें कुछ भी उजाला नहीं कर सकीं। इनमें से अधिकांश लाइटें देखरेख के अभाव में टूट गईं।
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दर्जनों ऐसे पोल खड़े हैं, जिनमें बल्ब ही नहीं हैं। पिछले वर्षों में इसे स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए कई बड़े बजट की परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाया गया है। बावजूद इसके नगर में लगीं स्ट्रीट लाइटें शोपीस साबित हो रहीं हैं और सेवाकुंज, अठखंभा, व्यास घेरा, लोई बाजार, सीएफसी चौराहा, पुराना बजाजा आदि क्षेत्रों में अंधेरा छाया रहता है।
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नगर निगम के प्रकाश व्यवस्था प्रभारी विजय नारायण मौर्य का कहना है कि गत मई माह से स्टोर में न ही बल्ब हैं और ना ही स्ट्रीट लाइटें हैं। 1700 लाइटों को टेंडर हो रहा है। टेंडर पास हो जाने के बाद भी वृंदावन में लाइट लगाई जाएंगी।