{"_id":"6035490a8ebc3ee8f201f5c6","slug":"cultural-yamuna-kumbh-mathura-news-agr481993479","type":"story","status":"publish","title_hn":"मधुकरी से पेट भरने वाले लाला बाबा कुंभ में यमुना शुद्धिकरण की जगा रहे अलख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मधुकरी से पेट भरने वाले लाला बाबा कुंभ में यमुना शुद्धिकरण की जगा रहे अलख
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वृंदावन (मथुरा)। एकला चलो की तर्ज पर यमुना शुद्धिकरण की अलख जगाते चले आ रहे साधु लाला बाबा ने वृंदावन कुंभ में यमुना के तट पर अपना डेरा जमा दिया है। वे यहां बैठक कर पोस्टर आदि के माध्यम से यमुना को प्रदूषित न करने का आग्रह भक्तजनों से कर रहे हैं। अनेक लोगों को पूछने पर यमुना प्रदूषण में आम लोगों की सहभागिता से भी अवगत कराते हैं।
करीब 70 वर्षीय लाल बाबा पिछले करीब चार दशकों से कान्हा की नगरी में निवासरत है। मूल रूप से राजस्थान के झुझनू जिला के व्यापारी वर्ग से मोहनलाल अर्थात लाल बाबा ने कृष्ण की भक्ति के वशीभूत होकर चार दशक पहले वृंदावन वास का निर्णय लिया। भरे पूरे परिवार को छोड़कर वृंदावन चले आये। राजनीतिक शास्त्र, संस्कृत और आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित चुके लाल बाबा ने वृंदावन आकर अपनी पैतृक संपत्ति के रूप में मौजूद स्थान पर न रहते हुए मंदिर-मंदिर और द्वारे-द्वारे जाकर मधुकरी की और ठाकुर जी की आराधना में लीन रहने लगे।
नित्यप्रति ठाकुर श्रीबांकेबिहारी और श्रीराधावल्लभ मंदिर के दर्शन और यमुना स्नान का नियम बनाया। पिछले दो दशक से यमुना की बिगड़ी दशा को देख सरकार के साथ आम जनमानस को जागरूक करने की मुहिम चला दी। इसमें बाबा ने यमुना में आने वाली अज्ञात लाशों को निकालते हुए उनके दाह संस्कार भी करने लगे। यमुना के लिए उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर अनशन भी किया था। अब वे एक बार फिर वृंदावन कुंभ आ रहे साधु-संतों और भक्तजनों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। वे कहते हैं कि इन पोस्टरों पर लिखी बातों पर लोग अमल कर लें तो यमुना काफी हद तक साफ हो जाएगी। वे पॉलिथीन सहित कूड़ा, पूजा आदि सामग्री यमुना में न डालने की अपील ही तो लोगों से कर रहे हैं। खुद लोग देखें कि वे किस तरह यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
करीब 70 वर्षीय लाल बाबा पिछले करीब चार दशकों से कान्हा की नगरी में निवासरत है। मूल रूप से राजस्थान के झुझनू जिला के व्यापारी वर्ग से मोहनलाल अर्थात लाल बाबा ने कृष्ण की भक्ति के वशीभूत होकर चार दशक पहले वृंदावन वास का निर्णय लिया। भरे पूरे परिवार को छोड़कर वृंदावन चले आये। राजनीतिक शास्त्र, संस्कृत और आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित चुके लाल बाबा ने वृंदावन आकर अपनी पैतृक संपत्ति के रूप में मौजूद स्थान पर न रहते हुए मंदिर-मंदिर और द्वारे-द्वारे जाकर मधुकरी की और ठाकुर जी की आराधना में लीन रहने लगे।
विज्ञापन
नित्यप्रति ठाकुर श्रीबांकेबिहारी और श्रीराधावल्लभ मंदिर के दर्शन और यमुना स्नान का नियम बनाया। पिछले दो दशक से यमुना की बिगड़ी दशा को देख सरकार के साथ आम जनमानस को जागरूक करने की मुहिम चला दी। इसमें बाबा ने यमुना में आने वाली अज्ञात लाशों को निकालते हुए उनके दाह संस्कार भी करने लगे। यमुना के लिए उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर अनशन भी किया था। अब वे एक बार फिर वृंदावन कुंभ आ रहे साधु-संतों और भक्तजनों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। वे कहते हैं कि इन पोस्टरों पर लिखी बातों पर लोग अमल कर लें तो यमुना काफी हद तक साफ हो जाएगी। वे पॉलिथीन सहित कूड़ा, पूजा आदि सामग्री यमुना में न डालने की अपील ही तो लोगों से कर रहे हैं। खुद लोग देखें कि वे किस तरह यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं।
विज्ञापन