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श्री महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज बने नाभा पीठ द्वाराचार्य
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वृंदावन (मथुरा)। वृंदावन कुंभ में यमुना के तट पर सुदामा कुटी के श्रीमहंत सुतीक्ष्ण दास महाराज को श्री नाभा पीठ द्वाराचार्य की उपाधि से अलंकृत किया गया। इसी के साथ महंत अमर दास महाराज व महंत राम रत्न दास महाराज को श्रीमहंत की उपाधि प्रदान की गई।
वृंदावन वैष्णव कुंभ में बृहस्पतिवार से शुरू हुआ उपाधि का दौर दूसरे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को वृंदावन सुदामा कुटी के श्रीमहंत और महंत को उपाधि प्रदान की गई। इससे पूर्व सुदामा कुटी से शाही हनुमान जी के निशानों के साथ यात्रा निकाली गई। जो कुंभ भ्रमण कर श्री अनी दिगम्बर अखाड़ा पहुंची। यहां भगवान के समक्ष तीर्थ पुरोहित शरद बिहारी गौड़, गिरधर गोपाल गौड़, सुभाष पहलवान लाला व मयंक बिहारी गौड़ ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कराया।
गणपति पूजन, कलश पूजन, नव ग्रह पूजन एवं विविध पूजन के पश्चात तीनों अनी अखाड़े निर्मोही, निर्वाणी एवं दिगम्बर के श्रीमहंतों ने संत सुतीक्ष्ण दास महाराज को चद्दर पहनाकर नाभा पीठ द्वाराचार्य की उपाधि से अलंकृत किया। इसके पश्चात संत अमर बिहारी दास महाराज व राम रत्न दास महाराज को श्रीमहंत की उपाधि से अलंकृत किया। यहां चार सम्प्रदाय महंत फूल डोल बिहारी दास महाराज, पीपा पीठाधीश्वर बाबा बलराम दास महाराज, अग्र पीठाधीस्वर स्वामी राघवाचार्य महाराज सहित समस्त द्वाराचार्य, महामंडलेश्वर ने चद्दर पहनाई। इसके पश्चात भागवताचार्य मनोज मोहन शास्त्री, आचार्य मृदुल कांत शास्त्री, तीर्थ पुरोहित नीरज गौतम, अनमोल गौतम ने भी महाराज को पुष्प माला पहनाकर बधाई दी।
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यहां से महाराजश्री बैंडबाजे की मधुर ध्वनि के बीच शोभायात्रा के रूप में टाटिया स्थान होते हुए ज्ञान गुदड़ी स्थित पंडित श्री जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली के निवास पर पहुंची। यहां श्री भक्तमाली जी की लाली वृंदावनी व पं रसिक शर्मा ने अभिनंदन के साथ इस पद की प्राप्ति के बाद श्री नाभापीठ श्री सुदामा कुटी द्वारा भक्त भगवंत सेवा की मंगल कामना की। इस अवसर पर पं अनूप शर्मा, पं राधा रमन पाठक, अभिराज, यदु नंदन, वासु, पुजारी लक्ष्मी कांत, बाबू लाल, राहुल तिवारी आदि ने भी संतों का स्वागत किया।
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वृंदावन वैष्णव कुंभ में बृहस्पतिवार से शुरू हुआ उपाधि का दौर दूसरे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को वृंदावन सुदामा कुटी के श्रीमहंत और महंत को उपाधि प्रदान की गई। इससे पूर्व सुदामा कुटी से शाही हनुमान जी के निशानों के साथ यात्रा निकाली गई। जो कुंभ भ्रमण कर श्री अनी दिगम्बर अखाड़ा पहुंची। यहां भगवान के समक्ष तीर्थ पुरोहित शरद बिहारी गौड़, गिरधर गोपाल गौड़, सुभाष पहलवान लाला व मयंक बिहारी गौड़ ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कराया।
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गणपति पूजन, कलश पूजन, नव ग्रह पूजन एवं विविध पूजन के पश्चात तीनों अनी अखाड़े निर्मोही, निर्वाणी एवं दिगम्बर के श्रीमहंतों ने संत सुतीक्ष्ण दास महाराज को चद्दर पहनाकर नाभा पीठ द्वाराचार्य की उपाधि से अलंकृत किया। इसके पश्चात संत अमर बिहारी दास महाराज व राम रत्न दास महाराज को श्रीमहंत की उपाधि से अलंकृत किया। यहां चार सम्प्रदाय महंत फूल डोल बिहारी दास महाराज, पीपा पीठाधीश्वर बाबा बलराम दास महाराज, अग्र पीठाधीस्वर स्वामी राघवाचार्य महाराज सहित समस्त द्वाराचार्य, महामंडलेश्वर ने चद्दर पहनाई। इसके पश्चात भागवताचार्य मनोज मोहन शास्त्री, आचार्य मृदुल कांत शास्त्री, तीर्थ पुरोहित नीरज गौतम, अनमोल गौतम ने भी महाराज को पुष्प माला पहनाकर बधाई दी।
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यहां से महाराजश्री बैंडबाजे की मधुर ध्वनि के बीच शोभायात्रा के रूप में टाटिया स्थान होते हुए ज्ञान गुदड़ी स्थित पंडित श्री जगन्नाथ प्रसाद भक्तमाली के निवास पर पहुंची। यहां श्री भक्तमाली जी की लाली वृंदावनी व पं रसिक शर्मा ने अभिनंदन के साथ इस पद की प्राप्ति के बाद श्री नाभापीठ श्री सुदामा कुटी द्वारा भक्त भगवंत सेवा की मंगल कामना की। इस अवसर पर पं अनूप शर्मा, पं राधा रमन पाठक, अभिराज, यदु नंदन, वासु, पुजारी लक्ष्मी कांत, बाबू लाल, राहुल तिवारी आदि ने भी संतों का स्वागत किया।