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नेपाल तक डील करते थे वाहन लुटेरे

Tue, 08 Mar 2016 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मथ्ाुरा
अमर उजाला ब्यूरो मथ्ाुरा Updated Tue, 08 Mar 2016 11:05 PM IST
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vehical thieves gang have been busted in mathura
पुलिस ने 16 लक्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन पुलिस की कार्रवाई में पकड़े गए वाहन चोरी के आरोपी दिल्ली, एनसीआर और आसपास के इलाकों से 1000 से अधिक गाड़ियों को चोरी कर चुके हैं। इन गाड़ियों को नेपाल व देश के ही छह राज्यों में सस्ती दरों पर बेच गया। पुलिस ने दो लोगों की निशानदेही पर 16 लक्जरी गाड़ियां बरामद की हैं।
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एसएसपी डा. राकेश सिंह ने बताया कि आगरा के थाना अछनेरा के गांव अबुआपुरा निवासी शिवम उर्फ शिवा, धर्मेंद्र कुमार निवासी गोवर्धन हाल निवासी ग्राम लड़ाम्दा थाना जगदीशपुरा आगरा को वृंदावन पुलिस ने पकड़ा था। इनकी निशानदेही पर फार्च्यूनर, तीन सफारी, हुंडई वेरना, ऑपटेरा, टाटा इंडिको, जेन एस्टिलो, दो इनोवा, तीन स्विफ्ट डिजायर, आर्टिगा, आई 10 और वैगनआर कार बरामद की गईं। सभी गाड़ियां दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र से लूटी गई हैं।
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पकड़े गए दोनों युवकों के साथी फुरकान उर्फ समीर, इमरान निवासी जली कोठी चील घर चौराहा मेरठ, भूपेश खिरवार, सुनील खिरवार, उसका भाई सोनू खिरवार और कृष्णवीर सिंह उर्फ लल्ला निवासी पथौली थाना शाहगंज आगरा फरार हैं। एसएसपी ने बताया कि पूरा गैंग दिल्ली, एनसीआर इलाके गाड़ियों को लूट कर नेपाल, तमिलनाडु, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में सस्ती दरों पर बेच देता था। कार्रवाई पर एसएसपी ने पुलिस टीम को 15000 रुपये का ईनाम दिया है। वार्ता के दौरान एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और सीओ सदर आरके गौतम मौजूद रहे।
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दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों के कागज दिखाकर करते थे डील
चोरी और लूट की लक्जरी गाड़ियों को बेचने के लिए वाहन चोर गैंग के सदस्य पुरानी और दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों को लोगों से कबाड़े के भाव खरीदकर उनके कागजात पर नई गाड़ियां दर्शा देते थे। इसमें इंजन और चेसिस नंबर की अदला-बदली भी की जाती थी। इससे उन्हें गाड़ियों की मनचाही कीमत मिल जाती थी।


एआरटीओ से होती थी ट्रांसफर  
एसएसपी ने बताया कि दुर्घटना की अवस्था में पूरी तरह कबाड़ा हो चुकी गाड़ियोें के कागजात के आधार पर चोरी और लूट की नई गाड़ियों के कागजात बनाकर गैंग के सदस्य संबंधित एआरटीओ कार्यालय से गाड़ियां खरीददारों के नाम ट्रांसफर करा देते थे। इन गाड़ियों पर कई खरीददारों ने पुरानी गाड़ियों पर लोन भी करा लिया जाता था।
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