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बालू खनन: पकड़े छह, जेल सिर्फ एक को
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 09 Jun 2015 11:53 PM IST
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खनन निरीक्षक पर जानलेवा हमले के बाद भी पुलिस की कार्रवाई में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जिन छह लोगों को आगरा पुलिस के साथ खनन निरीक्षक ने स्थानीय पुलिस को सौंपा था, उनमें से सिर्फ एक को ही मंगलवार को जेल भेजा गया।
खनन के खेल में माफिया और सरकारी तंत्र की मिलीभगत जगजाहिर है। यमुना के खादरों को माफिया खोखला कर चुके हैं। रिफाइनरी, फरह, बलदेव, महावन, वृंदावन, मांट, शेरगढ़ और छाता क्षेत्र के दर्जनों गांव इसके गवाह हैं। हाईकोर्ट से बालू खनन प्रतिबंधित होने के बाद भी धड़ल्ले से हो रहे खनन की भनक पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को नहीं है।
अब तक तमाशा देख रहे खनन अफसर की नींद इलाहाबाद मंडल में कमिश्नर और डीएम के खिलाफ कार्रवाई होने के बाद टूटी लेकिन पुलिस अभी भी नींद में है। सोमवार को खनन निरीक्षक पर हमले के बाद जिन छह लोगों को पकड़ कर पुलिस को सौंपा गया था, उसमें से सिर्फ मुनेश कुमार को जेल भेजा गया है। घटना के दौरान भागने में सफल रहे रूपा को अब तक पुलिस नहीं पकड़ सकी है।
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गौरतलब रहे कि गत दिवस भी खनन निरीक्षक ने आगरा पुलिस के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया था। मथुरा पुलिस ने तो घटना के बाद भी मदद करने से इंकार कर दिया था। यही स्थिति मंगलवार को भी बनी रही।
ट्रैक्टरों की खामोशी
बीते दिवस तक जिन रास्तों पर भोर होने से पहले ही रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली दौड़ते थे, उन रास्तों पर मंगलवार को खामोशी पसरी रही। खनन से जुड़े क्षेत्रों में भी यही हाल था।
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खनन के खेल में माफिया और सरकारी तंत्र की मिलीभगत जगजाहिर है। यमुना के खादरों को माफिया खोखला कर चुके हैं। रिफाइनरी, फरह, बलदेव, महावन, वृंदावन, मांट, शेरगढ़ और छाता क्षेत्र के दर्जनों गांव इसके गवाह हैं। हाईकोर्ट से बालू खनन प्रतिबंधित होने के बाद भी धड़ल्ले से हो रहे खनन की भनक पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को नहीं है।
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अब तक तमाशा देख रहे खनन अफसर की नींद इलाहाबाद मंडल में कमिश्नर और डीएम के खिलाफ कार्रवाई होने के बाद टूटी लेकिन पुलिस अभी भी नींद में है। सोमवार को खनन निरीक्षक पर हमले के बाद जिन छह लोगों को पकड़ कर पुलिस को सौंपा गया था, उसमें से सिर्फ मुनेश कुमार को जेल भेजा गया है। घटना के दौरान भागने में सफल रहे रूपा को अब तक पुलिस नहीं पकड़ सकी है।
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गौरतलब रहे कि गत दिवस भी खनन निरीक्षक ने आगरा पुलिस के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया था। मथुरा पुलिस ने तो घटना के बाद भी मदद करने से इंकार कर दिया था। यही स्थिति मंगलवार को भी बनी रही।
ट्रैक्टरों की खामोशी
बीते दिवस तक जिन रास्तों पर भोर होने से पहले ही रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली दौड़ते थे, उन रास्तों पर मंगलवार को खामोशी पसरी रही। खनन से जुड़े क्षेत्रों में भी यही हाल था।