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जवाहरबाग पर 30 दिन में दी गई थीं 24 रिपोर्ट
Amar Ujala
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:40 PM IST
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jawahar bagh
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जवाहरबाग खाली कराने में अफसर इतना क्यों डर रहे थे। वर्ष 2014 में 15 मार्च से 15 अप्रैल तक ही खुफिया एजेंसियों ने 24 रिपोर्ट डीएम और एसएसपी को दीं लेकिन हर रिपोर्ट को अनदेखा कर दिया गया। यहां तक कहा गया कि रामवृक्ष अपने समर्थकों की भीड़ जुटाने की तैयारी कर रहा है लेकिन फिर भी प्रशासनिक मशीनरी एक्शन मोड पर नहीं आई। खुफिया एजेंसियों ने न्यायिक आयोग को जो ब्योरा दिया है उससे साफ है कि मशीनरी या तो किसी के प्रेशर में थी या फिर मामले को हल्के में ले रही थी।
जवाहरबाग हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के समक्ष खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों की जो गवाही हुई है उसने तत्कालीन अफसरों के निर्णय लेने की क्षमता की पोल खोल दी है। एलआईयू और दूसरी एजेंसियां लगातार डीएम और एसएसपी को रामवृक्ष और उसके समर्थकों के बारे में रिपोर्ट देती रहीं, लेकिन किसी अधिकारी ने गंभीरता से नहीं लिया।
15 मार्च (2014) को जिस दिन रामवृक्ष अपने साथियों के साथ मथुरा पहुंचा और जवाहरबाग पर काबिज हो गया उस दिन ही शाम को एलआईयू ने अपनी रिपोर्ट दे दी थी। उसके बाद 20 मार्च को दी गई फिर 21, 25, 29 व 30 मार्च को रिपोर्ट दी गई। अप्रैल में भी 1 अप्रैल (2014) से लेकर 20 अप्रैल तक एक दिन छोड़कर रिपोर्ट जाती रहीं। तीस दिन के भीतर 24 रिपोर्ट डीएम और एसएसपी को भेजी गईं। हर रिपोर्ट में कहा गया कि कब्जाधारियों के मंसूबे ठीक नहीं हैं। यह व्यवस्था भंग कर सकते हैं। मगर अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी। जवाहरबाग खाली कराने के लिए न तो जिलाधिकारी ने कोई आदेश जारी किया और न ही एसएसपी ने। खुफिया एजेंसियों ने प्रशासन को सौंपी रिपोर्ट की कॉपी भी न्यायिक आयोग को उपलब्ध करा दी हैं। करीब 50 पेज रिपोर्ट के आयोग के सामने पेश किए गए हैं।
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रिपोर्ट में जो कहा गया
- स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह आंदोलन को लेकर ये लोग संगठित हो रहे हैं
- जवाहरबाग में आई भीड़ में शामिल लोग खुद को जयगुरुदेव का शिष्य बता रहे हैं
- एक रुपये में 40 लीटर पेट्रोल और 60 लीटर डीजल देने की मांग कर रहे थे
- खाली पड़ी सरकारी जमीन पर गरीबों को कब्जा देने की मांग कर रहे हैं
- पुराने जमाने की मुद्रा को दोबारा से चलाने की मांग
- रेल और बस यात्रा गरीबों के लिए मुफ्त देने की मांग कर रहे हैं
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जवाहरबाग हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के समक्ष खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों की जो गवाही हुई है उसने तत्कालीन अफसरों के निर्णय लेने की क्षमता की पोल खोल दी है। एलआईयू और दूसरी एजेंसियां लगातार डीएम और एसएसपी को रामवृक्ष और उसके समर्थकों के बारे में रिपोर्ट देती रहीं, लेकिन किसी अधिकारी ने गंभीरता से नहीं लिया।
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15 मार्च (2014) को जिस दिन रामवृक्ष अपने साथियों के साथ मथुरा पहुंचा और जवाहरबाग पर काबिज हो गया उस दिन ही शाम को एलआईयू ने अपनी रिपोर्ट दे दी थी। उसके बाद 20 मार्च को दी गई फिर 21, 25, 29 व 30 मार्च को रिपोर्ट दी गई। अप्रैल में भी 1 अप्रैल (2014) से लेकर 20 अप्रैल तक एक दिन छोड़कर रिपोर्ट जाती रहीं। तीस दिन के भीतर 24 रिपोर्ट डीएम और एसएसपी को भेजी गईं। हर रिपोर्ट में कहा गया कि कब्जाधारियों के मंसूबे ठीक नहीं हैं। यह व्यवस्था भंग कर सकते हैं। मगर अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी। जवाहरबाग खाली कराने के लिए न तो जिलाधिकारी ने कोई आदेश जारी किया और न ही एसएसपी ने। खुफिया एजेंसियों ने प्रशासन को सौंपी रिपोर्ट की कॉपी भी न्यायिक आयोग को उपलब्ध करा दी हैं। करीब 50 पेज रिपोर्ट के आयोग के सामने पेश किए गए हैं।
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रिपोर्ट में जो कहा गया
- स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह आंदोलन को लेकर ये लोग संगठित हो रहे हैं
- जवाहरबाग में आई भीड़ में शामिल लोग खुद को जयगुरुदेव का शिष्य बता रहे हैं
- एक रुपये में 40 लीटर पेट्रोल और 60 लीटर डीजल देने की मांग कर रहे थे
- खाली पड़ी सरकारी जमीन पर गरीबों को कब्जा देने की मांग कर रहे हैं
- पुराने जमाने की मुद्रा को दोबारा से चलाने की मांग
- रेल और बस यात्रा गरीबों के लिए मुफ्त देने की मांग कर रहे हैं