{"_id":"58d572354f1c1bb6681a746b","slug":"jawahar-bagh","type":"story","status":"publish","title_hn":"जवाहर बाग मामलाः लिखित आदेश देने से बचे थे यूपी सरकार के अधिकारी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जवाहर बाग मामलाः लिखित आदेश देने से बचे थे यूपी सरकार के अधिकारी
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sat, 25 Mar 2017 11:12 AM IST
विज्ञापन
jawahar bagh
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ से जवाहरबाग पर लिखित आदेश कम और मौखिक ज्यादा हुए। शासन में बैठे अफसर पत्राचार करने से भी बचते रहे। प्रशासन ने कब्जाधारियों को लेकर जो भी खुफिया रिपोर्ट शासन को भेजी उसमें अधिकांश का कोई जवाब ही नहीं आया। हां फोन पर गाइडलाइन जारी होती रही। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शांति व्यवस्था बनाए रखने को कहा जाता रहा। अब जब सीबीआई जवाहरबाग से संबंधित रिकार्ड तलाश रही है तो कई जरूरी दस्तावेज अधिकारी उपलब्ध ही नहीं करा पा रहे हैं।
रामवृक्ष यादव कैसे जवाहरबाग में दाखिल हुआ। क्या उसने अपने किसी सत्याग्रह की जानकारी प्रशासन को दी थी। प्रशासनिक अनुमति ली गई थी या नहीं। ये वह सवाल हैं जिनका जवाब सीबीआई ने ढूंढना शुरू कर दिया है। रामवृक्ष या उसके किसी समर्थक ने जो पत्र प्रशासन को दिया था वह भी मांगा जा रहा है। लेकिन ऐसा कोई पत्र मिल ही नहीं पा रहा है।
प्रशासन ने तो यहां तक कह दिया है कि उससे कोई अनुमति ली ही नहीं गई थी। रामवृक्ष अपने साथियों को लेकर जबरन घुस गया था। बताया जा रहा है कि लखनऊ के किसी अधिकारी ने आदेश किया था। लेकिन उस आदेश की कापी किसी के पास नहीं है। क्योंकि आदेश लिखित में नहीं बल्कि मौखिक था। अब यहां भी अफसर फंस रहे हैं।
विज्ञापन
प्रशासन ने जवाहरबाग खाली कराने के लिए कब्जाधारियों पर दबाव बनाने को बिजली और पानी बंद कर दिया था। लेकिन अगले ही दिन बिजली चालू कर दी गई थी।
इसके लिए भी लखनऊ से आदेश जारी हुआ मगर वह भी मौखिक ही था। जब मथुरा प्रशासन ने जवाहरबाग में इकट्ठा होती भीड़ को लेकर शासन में रिपोर्ट भेजी तो वहां से कहा गया कि यथास्थिति बनाई रखी जाए। कोई बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। जवाहरबाग में महिलाएं और बच्चे भी हैं। लेकिन इसका आदेश भी लिखित में नहीं हैं। यह आदेश भी फोन पर ही किया गया था।
8 मार्च को भेजी गई थी पहली रिपोर्ट
प्रशासन को 8 मार्च, 2014 को पहली रिपोर्ट मिली थी। जिसमें कहा गया था कि जवाहरबाग में लगातार भीड़ बढ़ रही है। प्रदेश के साथ ही बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और झारखंड तक से लोग पहुंच रहे हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस पत्र को शासन में भेज दिया था। हर पंद्रह दिन पर रिपोर्ट जाती रही लेकिन शासन ने किसी भी पत्र को गंभीरता से नहीं लिया। प्रशासन के पत्रों पर शासन में क्या-क्या कार्रवाई हुई, इसकी भी जांच सीबीआई कर रही है।
विज्ञापन
रामवृक्ष यादव कैसे जवाहरबाग में दाखिल हुआ। क्या उसने अपने किसी सत्याग्रह की जानकारी प्रशासन को दी थी। प्रशासनिक अनुमति ली गई थी या नहीं। ये वह सवाल हैं जिनका जवाब सीबीआई ने ढूंढना शुरू कर दिया है। रामवृक्ष या उसके किसी समर्थक ने जो पत्र प्रशासन को दिया था वह भी मांगा जा रहा है। लेकिन ऐसा कोई पत्र मिल ही नहीं पा रहा है।
विज्ञापन
प्रशासन ने तो यहां तक कह दिया है कि उससे कोई अनुमति ली ही नहीं गई थी। रामवृक्ष अपने साथियों को लेकर जबरन घुस गया था। बताया जा रहा है कि लखनऊ के किसी अधिकारी ने आदेश किया था। लेकिन उस आदेश की कापी किसी के पास नहीं है। क्योंकि आदेश लिखित में नहीं बल्कि मौखिक था। अब यहां भी अफसर फंस रहे हैं।
विज्ञापन
प्रशासन ने जवाहरबाग खाली कराने के लिए कब्जाधारियों पर दबाव बनाने को बिजली और पानी बंद कर दिया था। लेकिन अगले ही दिन बिजली चालू कर दी गई थी।
इसके लिए भी लखनऊ से आदेश जारी हुआ मगर वह भी मौखिक ही था। जब मथुरा प्रशासन ने जवाहरबाग में इकट्ठा होती भीड़ को लेकर शासन में रिपोर्ट भेजी तो वहां से कहा गया कि यथास्थिति बनाई रखी जाए। कोई बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। जवाहरबाग में महिलाएं और बच्चे भी हैं। लेकिन इसका आदेश भी लिखित में नहीं हैं। यह आदेश भी फोन पर ही किया गया था।
8 मार्च को भेजी गई थी पहली रिपोर्ट
प्रशासन को 8 मार्च, 2014 को पहली रिपोर्ट मिली थी। जिसमें कहा गया था कि जवाहरबाग में लगातार भीड़ बढ़ रही है। प्रदेश के साथ ही बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और झारखंड तक से लोग पहुंच रहे हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस पत्र को शासन में भेज दिया था। हर पंद्रह दिन पर रिपोर्ट जाती रही लेकिन शासन ने किसी भी पत्र को गंभीरता से नहीं लिया। प्रशासन के पत्रों पर शासन में क्या-क्या कार्रवाई हुई, इसकी भी जांच सीबीआई कर रही है।