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छह महीने में मात्र 340 जांच हो पाईं जिला अस्पताल में
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मथुरा। वैश्विक महामारी कोरोना की जांच बढ़ाने को प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा लगातार दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं लेकिन इसके बाद भी जिला अस्पताल में पिछले छह महीने में मात्र 340 कोरोना के टेस्ट हुए, जिसमें से 171 निगेटिव केस पॉजिटिव पाए गए। यह सभी जांच ट्रूूनाट से हुई हैं। जांच के इस प्रतिशत को देखें तो हर दिन एक रोगी भी जिला अस्पताल कोरोना की जांच के लिए नहीं पहुंचा। इससे स्पष्ट है कि या तो कोरोना के प्रति लोगों में जागरूकता नहीं है या लोगों में सरकारी जांच के प्रति विश्वास नहीं है।
हालांकि जिला अस्पताल के फीवर क्लीनिक पर लॉकडाउन के दौरान भी प्रतिदिन संभावित रोगियों की संख्या काफी नजर आती थी लेकिन जांच के आंकड़ों से पता चलता है कि इनमें से जांच कराने वालों की संख्या काफी कम रही। बताया जा रहा है कि स्वयं जिला अस्पताल के अधिकारी और कर्मचारियों ने भी अपनी जांचें प्राइवेट तौर पर कराई हैं। तत्कालीन सीएमएस रहे डाक्टर आरएस मौर्या द्वारा भी अपनी कोरोना जांच प्राइवेट क्लीनिक पर कराई गई थी। इसके अलावा अन्य चिकित्सकों द्वारा जांच सरकारी के बजाय प्राइवेट लैब पर कराई गई। जिसका एक कारण यह है कि संभावित कोरोना पीड़ित के आते ही जिला अस्पताल के कर्मचारी और चिकित्सक उसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसके बाद मरीज जांच के लिए दूसरे स्थान पर जाना ही बेहतर समझता है।
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हालांकि जिला अस्पताल के फीवर क्लीनिक पर लॉकडाउन के दौरान भी प्रतिदिन संभावित रोगियों की संख्या काफी नजर आती थी लेकिन जांच के आंकड़ों से पता चलता है कि इनमें से जांच कराने वालों की संख्या काफी कम रही। बताया जा रहा है कि स्वयं जिला अस्पताल के अधिकारी और कर्मचारियों ने भी अपनी जांचें प्राइवेट तौर पर कराई हैं। तत्कालीन सीएमएस रहे डाक्टर आरएस मौर्या द्वारा भी अपनी कोरोना जांच प्राइवेट क्लीनिक पर कराई गई थी। इसके अलावा अन्य चिकित्सकों द्वारा जांच सरकारी के बजाय प्राइवेट लैब पर कराई गई। जिसका एक कारण यह है कि संभावित कोरोना पीड़ित के आते ही जिला अस्पताल के कर्मचारी और चिकित्सक उसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसके बाद मरीज जांच के लिए दूसरे स्थान पर जाना ही बेहतर समझता है।
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