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रेड जोन में मथुरा, प्रशासन की बढ़ी चिंता
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मथुरा। कोविड-19 प्रभाव वाले क्षेत्रों की नई सूची जारी होते ही मथुरा के प्रशासनिक अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। केंद्र सरकार ने मथुरा को रेड जोन में शामिल किया है। इससे परेशान अफसरों ने अब कोरोना के बढ़ते प्रकोप से निपटने की नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
पिछले लगभग 8 दिन से मथुरा में हर दिन कोरोना वायरस के नए केस सामने आ रहे हैं। कई दिन तो एक से अधिक केस भी सामने आए हैं। शुक्रवार को मथुरा में पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। क्वारंटीन मरीजों की संख्या दो हजार से अधिक पहुंच गई है। वृंदावन का सौ शैय्या हॉस्पिटल भी इसी श्रेणी में है। यहां 8 डॉक्टरों के साथ 30 से अधिक स्टाफ को क्वारंटीन कर उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए। शहर का बड़ा हिस्सा सील कर दिया गया है। इन स्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने मथुरा को यलो जोन से निकालकर रेड जोन में डाल दिया है। इस स्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता और बढ़ा दी है।
यलो जोन से रेड जोन में जाने वाली यह रिपोर्ट मथुरा में प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही को भी उजागर करती है। अब इस नई चिंताजनक स्थिति से निपटने के लिए शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने नई रणनीति बनाने का काम शुरू कर दिया।
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रेड जोन के मायने और होगी कड़ाई
रेड जोन का मतलब है कोविड-19 से खतरे वाले इलाके। इस जोन में वो इलाके आते हैं, जहां कई लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और ये संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे इलाके जिनकी वजह से संक्रमण की संख्या बढ़ने की आशंका हो, वो सभी इलाके रेड जोन में आते हैं। रेड जोन में शामिल सभी इलाकों के लोगों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जाती है।
इन जोन में आने वाले लोगों को घरों से निकलने की कोई छूट नहीं है। किसी आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिसपर कॉल करके मदद मांगी जा सकती है। इस जोन में जरूरी चीजों की सप्लाई की जिम्मेदारी प्रशासन के हाथों में रहती है। इस जोन में आने वाले सभी इलाकों में सख्त पहरा लगाया जाता है और नियमों का पालन न करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाती है। बता दें कि रेड जोन को हॉटस्पॉट भी कहा जाता है।
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पिछले लगभग 8 दिन से मथुरा में हर दिन कोरोना वायरस के नए केस सामने आ रहे हैं। कई दिन तो एक से अधिक केस भी सामने आए हैं। शुक्रवार को मथुरा में पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। क्वारंटीन मरीजों की संख्या दो हजार से अधिक पहुंच गई है। वृंदावन का सौ शैय्या हॉस्पिटल भी इसी श्रेणी में है। यहां 8 डॉक्टरों के साथ 30 से अधिक स्टाफ को क्वारंटीन कर उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए। शहर का बड़ा हिस्सा सील कर दिया गया है। इन स्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने मथुरा को यलो जोन से निकालकर रेड जोन में डाल दिया है। इस स्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता और बढ़ा दी है।
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यलो जोन से रेड जोन में जाने वाली यह रिपोर्ट मथुरा में प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही को भी उजागर करती है। अब इस नई चिंताजनक स्थिति से निपटने के लिए शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने नई रणनीति बनाने का काम शुरू कर दिया।
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रेड जोन के मायने और होगी कड़ाई
रेड जोन का मतलब है कोविड-19 से खतरे वाले इलाके। इस जोन में वो इलाके आते हैं, जहां कई लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और ये संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे इलाके जिनकी वजह से संक्रमण की संख्या बढ़ने की आशंका हो, वो सभी इलाके रेड जोन में आते हैं। रेड जोन में शामिल सभी इलाकों के लोगों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जाती है।
इन जोन में आने वाले लोगों को घरों से निकलने की कोई छूट नहीं है। किसी आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिसपर कॉल करके मदद मांगी जा सकती है। इस जोन में जरूरी चीजों की सप्लाई की जिम्मेदारी प्रशासन के हाथों में रहती है। इस जोन में आने वाले सभी इलाकों में सख्त पहरा लगाया जाता है और नियमों का पालन न करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाती है। बता दें कि रेड जोन को हॉटस्पॉट भी कहा जाता है।