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Mathura News: गैस संकट से गौरी गोपाल आश्रम में कोयले की तपिश
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वृंदावन। गौरी गोपाल आश्रम में प्रतिदिन करीब 30 हजार लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, जिसमें साधु-संत, श्रद्धालु, तीर्थयात्री और जरूरतमंद शामिल होते हैं। यहां की रसोई में गैस सिलिंडर के संकट के बाद कोयले और उपलों का उपयोग किया जा रहा है।
गैस सिलिंडरों की बढ़ती खपत और आपूर्ति में आ रही कठिनाइयों के चलते आश्रम प्रबंधन ने यह वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की है। रसोई की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए आश्रम प्रबंधन ने झारखंड से एक ट्रक कोयला मंगवाया है। यह कोयला प्रोसेस्ड किया हुआ है। दावा किया गया है कि इससे धुआं नहीं होगा। आश्रम की रसोई को क्षेत्र की सबसे बड़ी रसोइयों में से एक माना जाता है।
बड़ी मात्रा में भोजन बनाने के लिए यहां प्रतिदिन 50 से अधिक गैस सिलिंडरों की खपत होती थी। हाल के दिनों में गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के कारण आश्रम को परेशानी का सामना करना पड़ा। रसोई की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए आश्रम प्रबंधन ने झारखंड से एक ट्रक कोयला मंगवाया है। अब रसोई में भट्टियों में कोयले का उपयोग कर भोजन बनाया जा रहा है।
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गैस सिलिंडरों की बढ़ती खपत और आपूर्ति में आ रही कठिनाइयों के चलते आश्रम प्रबंधन ने यह वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की है। रसोई की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए आश्रम प्रबंधन ने झारखंड से एक ट्रक कोयला मंगवाया है। यह कोयला प्रोसेस्ड किया हुआ है। दावा किया गया है कि इससे धुआं नहीं होगा। आश्रम की रसोई को क्षेत्र की सबसे बड़ी रसोइयों में से एक माना जाता है।
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बड़ी मात्रा में भोजन बनाने के लिए यहां प्रतिदिन 50 से अधिक गैस सिलिंडरों की खपत होती थी। हाल के दिनों में गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के कारण आश्रम को परेशानी का सामना करना पड़ा। रसोई की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए आश्रम प्रबंधन ने झारखंड से एक ट्रक कोयला मंगवाया है। अब रसोई में भट्टियों में कोयले का उपयोग कर भोजन बनाया जा रहा है।
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