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बच्चे की मौत पर क्लीनिक में तोड़फोड़,

Thu, 29 Sep 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Thu, 29 Sep 2016 01:05 AM IST
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child death in hospital, angry mobs attcking at  doctor
बच्चे की मौत के बाद सुरक्षा की दृष्टि से तैनात पुलिस - फोटो : mathura
राधा निवास वृंदावन स्थित एक क्लीनिक पर भर्ती बच्चे की बुधवार शाम 7 बजे को उपचार के दौरान मौत हो गई। गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने लापवाही का आरोप लगाते हुए चिकित्सक से मारपीट कर क्लीनिक पर तोड़फोड़ की। डाक्टर ने कमरे में छिपकर अपनी जान बचाई। तीमारदार अपने अपने रोगियों को लेकर बचाव के लिए इधर उधर छिपे। ग्रामीणों ने बच्चे का शव सड़क पर रखकर मथुरा-वृंदावन मार्ग जाम कर दिया।
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पुलिस डाक्टर को थाने ले गई। वहां दोनों पक्षों में समझौता हो गया।  गांव गोपालगढ़ निवासी रमाकांत उर्फ छोटे ने बुखार से पीड़ित 6 वर्षीय पुत्र शरद को मंगलवार की शाम रुक्मिणी आरोग्य  क्लीनिक में भर्ती कराया था। डा. एसएस जायसवाल ने उपचार के लिए 20 हजार रुपये जमा करा लिए। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की तबियत बुधवार सुबह से ही बिगड़ने लगी थी लेकिन चिकित्सक क्लीनिक पर मौजूद बच्चे की मां शशि, दादी सुदेवी से सब ठीक होने की बात करता रहा। शाम को बच्चे की तबियत फिर बिगड़ी लेकिन डा. एसएस जायसवाल ठीक होने का आश्वासन देते रहे।
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करीब 7 बजे शरद की मौत हो गई। परिजनों ने बच्चे की मौत के लिए डाक्टर को जिम्मेदार ठहराते हुए गांव गोपालगढ़ में खबर कर दी। बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चे के परिजन क्लीनिक पर पहुंच गए।  क्लीनिक के शीशे तोड़ दिए। सामान फेंक दिया। इसका विरोध करने पर डा. एसएस जायसवाल के साथ मारपीट कर दी। चिकित्सक ने एक कमरे में घुसकर अपनी जान बचाई। अस्पताल में भर्ती अन्य तीमारदार अपने अपने रोगियों को लेकर भाग खड़े हुए। गुस्साए ग्रामीणों ने बच्चे का शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। पुलिस डा. एसएस जायसवाल को ग्रामीणों के बीच से बचाकर कोतवाली लेकर आई। ग्रामीण भी थाने पहुंच गए। वहां भी दोनों पक्षों में बहस हुई। शरद के पिता रमाकांत और चाचा प्रवीन का आरोप है कि डा. जायसवाल की लापरवाही से बच्चे की मौत हुई है।
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अगर बुखार नहीं ठीक हो रहा था तो वह हमसे कह देते तो बच्चे को उपचार के लिए कहीं और ले जाते। डा. एसएस जायसवाल ने बताया कि उन्होंने उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की। सीओ सदर आलोक दुबे ने बताया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। डा. एसएस जायसवाल बालरोग विशेषज्ञ नहीं बल्कि गुरुकुल विश्व विद्यालय से चिकित्सा में आयुर्वेद शिरोमणि डिग्रीधारक बताए गए हैं। लोगों का कहना है कि एक वर्ष पूर्व भी इसी क्लीनिक पर एक बच्चे की मौत हो गई थी। 
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