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चातुर्मास आज से, 25 नवंबर को देव प्रबोधिनी से शुरू होगे विवाह मुर्हुत
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मथुरा। अब अगले पांच महीनों तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे। एक जुलाई देवशयनी एकादशी (बुधवार) से देव सो जाएंगे। पुराणों के अनुसार इन महीनों में भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं। इसके बाद कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु की योग निंद्रा पूर्ण होती है। साधु, संत एक स्थान पर रहकर भगवान की उपासना और स्वाध्याय करते हैं। चातुर्मास के दौरान भगवान की पूजा-पाठ, कथा, साधना, अनुष्ठान से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और भागवत के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है।
दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान मथुरा के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि प्रतिवर्ष देवता चार माह शयन करते थे, इस वर्ष पांच महीना शयन करेंगे। इस वर्ष अधिक मास (पुरुषोत्तम) होगा। उन्होंने बताया कि एक जुलाई को भगवान विष्णु सहित देवता क्षीर सागर में शयन करने जाएंगे और 25 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी पर देव जागेंगे।
राजलक्ष्मी ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य पं. अजय कुमार तैलंग ने बताया कि एक जुलाई को देवशयनी एकादशी है, इसी दिन से देव शयन करेंगे। इस दौरान मांगलिक कार्यक्रम बंद रहेंगे। बताया कि 6 जुलाई से श्रावण मास शुरू होगा और चार माह (श्रावण, भादों, अश्विनी और कार्तिक) चातुर्मास रहेगा, परंतु इस बार पुरुषोत्तम मास के कारण पांच माह तक विवाह, यज्ञोपवीत आदि कोई भी मुहूर्त नहीं हैं।
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25 नवंबर को देव प्रबोधनी एकादशी है, उसी दिन से देव जाग जाते हैं, उसी दिन मंदिरों में प्रभु के विवाह महोत्सव आदि मनाया जाएगा है। इस प्रकार चार माह और 25 दिन विवाह इत्यादि नही होंगे।
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दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान मथुरा के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि प्रतिवर्ष देवता चार माह शयन करते थे, इस वर्ष पांच महीना शयन करेंगे। इस वर्ष अधिक मास (पुरुषोत्तम) होगा। उन्होंने बताया कि एक जुलाई को भगवान विष्णु सहित देवता क्षीर सागर में शयन करने जाएंगे और 25 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी पर देव जागेंगे।
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राजलक्ष्मी ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य पं. अजय कुमार तैलंग ने बताया कि एक जुलाई को देवशयनी एकादशी है, इसी दिन से देव शयन करेंगे। इस दौरान मांगलिक कार्यक्रम बंद रहेंगे। बताया कि 6 जुलाई से श्रावण मास शुरू होगा और चार माह (श्रावण, भादों, अश्विनी और कार्तिक) चातुर्मास रहेगा, परंतु इस बार पुरुषोत्तम मास के कारण पांच माह तक विवाह, यज्ञोपवीत आदि कोई भी मुहूर्त नहीं हैं।
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25 नवंबर को देव प्रबोधनी एकादशी है, उसी दिन से देव जाग जाते हैं, उसी दिन मंदिरों में प्रभु के विवाह महोत्सव आदि मनाया जाएगा है। इस प्रकार चार माह और 25 दिन विवाह इत्यादि नही होंगे।