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Mathura News: मौसम का बदलाव नवजातों पर पड़ रहा भारी
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मथुरा। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। दिन में गर्मी और सुबह-शाम मौसम में बदलाव के कारण बच्चों में सर्दी, खांसी, जुकाम और सांस संबंधी परेशानी देखने को मिल रही है। ऐसे में अभिभावक बच्चों को लेकर महिला अस्पताल और जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों से मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कभी तेज धूप तो कभी बादल और बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है। इसका सबसे अधिक असर नवजात और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण मौसम में मामूली बदलाव भी उनकी सेहत को प्रभावित कर रहा है। अस्पतालों की बाल रोग ओपीडी में बच्चों को लेकर पहुंचने वाले अभिभावकों की संख्या बढ़ी है। रोजाना दोनों अस्पताल में 50 से 75 बच्चों को लेकर अभिभावक अस्पताल पहुंच रहे हैं। महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि नवजात बच्चों को मौसम के सीधे प्रभाव से बचाने की जरूरत है। बारिश में भीगने और ठंडी हवा के संपर्क में आने से बच्चों को बचाएं। कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें, लेकिन बच्चे को सीधे पंखे या ठंडी हवा के सामने न रखें। छोटे बच्चों के कपड़ों का भी विशेष ध्यान रखें और जरूरत के अनुसार उन्हें आरामदायक कपड़े पहनाएं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमन कुमार ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, दूध पीने में कमी या अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न करें। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। नवजात को बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा न दें। उन्होंने मौसम बदलने के दौरान बच्चों की साफ-सफाई, खानपान और आसपास के वातावरण पर विशेष ध्यान देने से उन्हें संक्रमण से बचाया जा सकता है।
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पिछले कुछ दिनों से मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कभी तेज धूप तो कभी बादल और बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है। इसका सबसे अधिक असर नवजात और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण मौसम में मामूली बदलाव भी उनकी सेहत को प्रभावित कर रहा है। अस्पतालों की बाल रोग ओपीडी में बच्चों को लेकर पहुंचने वाले अभिभावकों की संख्या बढ़ी है। रोजाना दोनों अस्पताल में 50 से 75 बच्चों को लेकर अभिभावक अस्पताल पहुंच रहे हैं। महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि नवजात बच्चों को मौसम के सीधे प्रभाव से बचाने की जरूरत है। बारिश में भीगने और ठंडी हवा के संपर्क में आने से बच्चों को बचाएं। कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें, लेकिन बच्चे को सीधे पंखे या ठंडी हवा के सामने न रखें। छोटे बच्चों के कपड़ों का भी विशेष ध्यान रखें और जरूरत के अनुसार उन्हें आरामदायक कपड़े पहनाएं।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमन कुमार ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, दूध पीने में कमी या अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न करें। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। नवजात को बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा न दें। उन्होंने मौसम बदलने के दौरान बच्चों की साफ-सफाई, खानपान और आसपास के वातावरण पर विशेष ध्यान देने से उन्हें संक्रमण से बचाया जा सकता है।
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