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100 करोड़ टीकाकरण पर मनाया जश्न अब देखने वाला कोई नहीं
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मथुरा। देश में 100 करोड़ टीकाकरण पूरा होने पर जोरशोर से जश्न मनाया। देश की 100 हेरिटेज इमारतों को तिरंगी लाइटों से सजाया गया। इसमें शामिल वृंदावन के दो सबसे प्राचीन मंदिरों गोविंददेव और मदन मोहन में भी यह जश्न दो दिन तक चला। इसे देख कर लगा अब इन मंदिरों के हालात भी सुधर जाएंगे लेकिन जश्न मनाने के बाद ये मंदिर फिर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं।
वृंदावन में प्रतिदिन हजारों व त्योहारों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसी के चलते यह शहर लगातार जाम की समस्या से जूझता है। श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रांगण में हर समय सैकड़ों भक्त मौजूद रहते हैं। इसी मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित गोविंददेव मंदिर है। इसे ब्रज और वृंदावन का दूसरा सबसे पुराना मंदिर कहा जाता है लेकिन यहां आने वाले श्रद्धालुओं की बात करें तो संख्या नगण्य के समान ही है। यहां पर गिन-चुने भक्त ही पहुंचते हैं।
काली होती जा रही इमारत
मंदिर के गोस्वामी सुकुमार के अनुसार यह मंदिर मुगल काल में सन् 1590 में राजा मान सिंह ने बनवाया था। इसकी इमारत वृंदावन में अपने तरह की एक अलग इमारत है। तीन मंजिल के बने इस मंदिर की ऊंचाई करीब पांच मंजिला इमारत के बराबर है। लाल पत्थर से बना भवन देखरेख के अभाव में काला होता जा रहा है।
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बंदरों का रहता है डेरा
गोविंददेव मंदिर के प्रांगण में ही बंदरों का डेरा रहता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने से अधिक अपने सामान, चप्पल आदि के लिए चिंतित रहते हैं।
भूत वाले मंदिर के नाम से हो गया प्रसिद्ध
वृंदावन की पुरानी इमारतों में शामिल होने के कारण इस मंदिर को स्थानीय लोगों ने भूत वाला मंदिर नाम दे दिया है। एक बड़े से प्रांगण में फैले इस मंदिर के आसपास ज्यादातर सन्नाटा ही रहता है।
मदन मोहन मंदिर में रहती है गंदगी
वृंदावन के प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पीछे ही ब्रज का सबसे पुराना मदन मोहन मंदिर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। वृंदावन में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर बने इस मंदिर के प्रांगण में गंदगी का आलम है। मंदिर में एक महिला सफाई कर्मचारी तो है लेकिन उसका ध्यान लोगों के जूते-चप्पल की रखवाली करने के साथ ही रुपये बटोरने में अधिक रहता है। मंदिर के सेवायत ने बताया कि यहां पर दिनभर में चंद भक्त ही आते हैं। हालांकि विदेशी भक्त ऊंचाई पर बनी अलग सी इमारत को देखने कौतूहल बस आ जाते हैं।
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वृंदावन में प्रतिदिन हजारों व त्योहारों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसी के चलते यह शहर लगातार जाम की समस्या से जूझता है। श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रांगण में हर समय सैकड़ों भक्त मौजूद रहते हैं। इसी मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित गोविंददेव मंदिर है। इसे ब्रज और वृंदावन का दूसरा सबसे पुराना मंदिर कहा जाता है लेकिन यहां आने वाले श्रद्धालुओं की बात करें तो संख्या नगण्य के समान ही है। यहां पर गिन-चुने भक्त ही पहुंचते हैं।
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काली होती जा रही इमारत
मंदिर के गोस्वामी सुकुमार के अनुसार यह मंदिर मुगल काल में सन् 1590 में राजा मान सिंह ने बनवाया था। इसकी इमारत वृंदावन में अपने तरह की एक अलग इमारत है। तीन मंजिल के बने इस मंदिर की ऊंचाई करीब पांच मंजिला इमारत के बराबर है। लाल पत्थर से बना भवन देखरेख के अभाव में काला होता जा रहा है।
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बंदरों का रहता है डेरा
गोविंददेव मंदिर के प्रांगण में ही बंदरों का डेरा रहता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने से अधिक अपने सामान, चप्पल आदि के लिए चिंतित रहते हैं।
भूत वाले मंदिर के नाम से हो गया प्रसिद्ध
वृंदावन की पुरानी इमारतों में शामिल होने के कारण इस मंदिर को स्थानीय लोगों ने भूत वाला मंदिर नाम दे दिया है। एक बड़े से प्रांगण में फैले इस मंदिर के आसपास ज्यादातर सन्नाटा ही रहता है।
मदन मोहन मंदिर में रहती है गंदगी
वृंदावन के प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पीछे ही ब्रज का सबसे पुराना मदन मोहन मंदिर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। वृंदावन में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर बने इस मंदिर के प्रांगण में गंदगी का आलम है। मंदिर में एक महिला सफाई कर्मचारी तो है लेकिन उसका ध्यान लोगों के जूते-चप्पल की रखवाली करने के साथ ही रुपये बटोरने में अधिक रहता है। मंदिर के सेवायत ने बताया कि यहां पर दिनभर में चंद भक्त ही आते हैं। हालांकि विदेशी भक्त ऊंचाई पर बनी अलग सी इमारत को देखने कौतूहल बस आ जाते हैं।