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केंद्रीय मंत्री से पदयात्रियों ने कहा: अब बस यमुना की अविरल धार
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा/कोसीकलां
Updated Mon, 16 Mar 2015 11:26 PM IST
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यमुना मुक्तिकरण पदयात्रा में यमुना भक्तों को मनाने पहुंची केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती का पदयात्रियों के सामने कोई भी दांव काम नहीं आ सका। यात्री अविरल, निर्मलधारा पर ही अडिग रहे। समय देने की मांग पर उमा भारती को भारी विरोध का सामना भी करना पड़ा। यात्रियों ने हाईवे जाम किया और नारेबाजी कर उन्हें परिणाम भुगतने की चेतावनी देकर पदयात्रा आगे बढ़ा दी।
कोसी से शुरू होकर दिल्ली के लिए जा रही यमुना मुक्तिकरण अभियान के तहत पदयात्रा के हरियाणा में दूसरे पड़ाव के बीच दोपहर को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती पदयात्रियों को मनाने के लिए पहुंची। उनके साथ विजय कौशल महाराज भी थे। मांगों को सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें यमुना का दर्द पता है। वह जानती हैं कि यमुना महारानी की हालत बिना रक्त के शृंगार से सजी महिला जैसी है। उनकी और उनकी सरकार की भी यमुना को अविरल और निर्मल बनाने की इच्छा है। इसके लिए गंगा एक्शन प्लान के तृतीय भाग में यमुना को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि वे जानती हैं कि इसमें नाले गिर रहे हैं। लेकिन इनके बंद करने मात्र से काम नहीं बनेगा। इससे भी कहीं अधिक चाहिए। ऐसा यूपी- हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त प्रयास से ही हो सकता है। इसके लिए उन्होंने 20 मार्च को दिल्ली में यमुना प्राधिकरण बोर्ड की बैठक बुलाई है। जिसमें चारों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और सचिवों को बुलाया गया है। उसी में यमुना पर फैसले होंगे।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे नहीं चाहती थीं कि संत रमेश बाबा इस पदयात्रा को शुरू करें। वे उनसे पहले ही मिलना चाहती थीं और पूरी योजना के बारे में बताना चाहती थीं। लेकिन पदयात्रा शुरू हो गई। कोई बात नहीं सरकार पदयात्रियों के साथ है। उन्होंने पदयात्रियों से यमुना छठ अर्थात 25 मार्च तक का समय मांगा।
अभी मंत्री बोल ही रही थीं कि बीच में से पदयात्रियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। विजय कौशल महाराज ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन वे असफल रहे। ऐसे में उन्होंने भी पदयात्रियों की हां में हां कर आंदोलन को सुचारु रखने की बात कही। लेकिन लोग आंदोलित होते गए। ’उमा भारती वापस जाओ’ के नारे लगाए जाने लगे और पदयात्रा को आगे कूच करा दिया।
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कोसी से शुरू होकर दिल्ली के लिए जा रही यमुना मुक्तिकरण अभियान के तहत पदयात्रा के हरियाणा में दूसरे पड़ाव के बीच दोपहर को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती पदयात्रियों को मनाने के लिए पहुंची। उनके साथ विजय कौशल महाराज भी थे। मांगों को सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें यमुना का दर्द पता है। वह जानती हैं कि यमुना महारानी की हालत बिना रक्त के शृंगार से सजी महिला जैसी है। उनकी और उनकी सरकार की भी यमुना को अविरल और निर्मल बनाने की इच्छा है। इसके लिए गंगा एक्शन प्लान के तृतीय भाग में यमुना को भी शामिल किया गया है।
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उन्होंने कहा कि वे जानती हैं कि इसमें नाले गिर रहे हैं। लेकिन इनके बंद करने मात्र से काम नहीं बनेगा। इससे भी कहीं अधिक चाहिए। ऐसा यूपी- हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त प्रयास से ही हो सकता है। इसके लिए उन्होंने 20 मार्च को दिल्ली में यमुना प्राधिकरण बोर्ड की बैठक बुलाई है। जिसमें चारों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और सचिवों को बुलाया गया है। उसी में यमुना पर फैसले होंगे।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे नहीं चाहती थीं कि संत रमेश बाबा इस पदयात्रा को शुरू करें। वे उनसे पहले ही मिलना चाहती थीं और पूरी योजना के बारे में बताना चाहती थीं। लेकिन पदयात्रा शुरू हो गई। कोई बात नहीं सरकार पदयात्रियों के साथ है। उन्होंने पदयात्रियों से यमुना छठ अर्थात 25 मार्च तक का समय मांगा।
अभी मंत्री बोल ही रही थीं कि बीच में से पदयात्रियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। विजय कौशल महाराज ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया लेकिन वे असफल रहे। ऐसे में उन्होंने भी पदयात्रियों की हां में हां कर आंदोलन को सुचारु रखने की बात कही। लेकिन लोग आंदोलित होते गए। ’उमा भारती वापस जाओ’ के नारे लगाए जाने लगे और पदयात्रा को आगे कूच करा दिया।