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प्रदोष व्रत करने से इसी लोक में शुभ फल प्राप्त हो जाता है
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मथुरा। सावन मास में प्रदोष व्रत की महिमा अपार है। इस बार यह प्रदोष व्रत बृहस्पतिवार को है। व्रत के करने से देवाधिदेव महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि स्कंद पुराण एवं प्रदोष रत्नाकर के अनुसार प्रत्येक महीने में दो बार त्रयोदशी तिथि आती है, जिसमें प्रदोष व्रत किया जाता है। सावन मास की तो अपार महिमा है। प्रदोष व्रत वाले दिन सायं काल प्रदोष बेला में देवाधिदेव देव महादेव एवं पार्वती जी की पूजा की जाती है, इसके करने से इसी जन्मों में धन-धान्य सुख-समृद्धि सौभाग्य स्त्री पुत्र एवं संपदा की वृद्धि होती है।
उन्होंने बताया कि प्रदोष व्रत करने से मूर्ख व्यक्ति भी पढ़ लिख कर विद्वान हो जाता है, निर्धन धनवान हो जाता है और मरने वाला व्यक्ति भी आयुष्मान हो जाता है। इस व्रत को करने से कुंवारी कन्या के लिए मनचाहा वर मिलता है जिसके पुत्र नहीं होता उसके पुत्र की प्राप्ति होती है।
पूजा का विधान
जिस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है उस दिन प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में जग जावेदेवाधिदेव महादेव पार्वती जी का ध्यान करें तथा आज प्रदोषव्रत कर करूंगा ऐसा संकल्प करें। दिन भर पूजा की सभी वस्तुएं एकत्रित करें। इनमें रोली, चावल, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य, बेलपत्र, धतूरा, फूलमाला, गंगाजल, इत्र, भांग पंचामृत की सभी वस्तु फल एवं प्रसाद पूजन की सभी वस्तु एकत्रित कर लें। सायंकाल स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करके शिव मंदिर में जाएं। वहां ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए देवाधिदेव महादेव की 16 उपचारों से पूजा-अर्चना करें। अभिषेक एवं रुद्री पाठ ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करें। आरती पुष्पांजलि करके अपने घर आ जाएं। प्रसाद ग्रहण करें। ऐसा करने से सभी मनोकामना इसीलोक में पूर्ण हो जाती हैं।
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ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि स्कंद पुराण एवं प्रदोष रत्नाकर के अनुसार प्रत्येक महीने में दो बार त्रयोदशी तिथि आती है, जिसमें प्रदोष व्रत किया जाता है। सावन मास की तो अपार महिमा है। प्रदोष व्रत वाले दिन सायं काल प्रदोष बेला में देवाधिदेव देव महादेव एवं पार्वती जी की पूजा की जाती है, इसके करने से इसी जन्मों में धन-धान्य सुख-समृद्धि सौभाग्य स्त्री पुत्र एवं संपदा की वृद्धि होती है।
उन्होंने बताया कि प्रदोष व्रत करने से मूर्ख व्यक्ति भी पढ़ लिख कर विद्वान हो जाता है, निर्धन धनवान हो जाता है और मरने वाला व्यक्ति भी आयुष्मान हो जाता है। इस व्रत को करने से कुंवारी कन्या के लिए मनचाहा वर मिलता है जिसके पुत्र नहीं होता उसके पुत्र की प्राप्ति होती है।
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पूजा का विधान
जिस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है उस दिन प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में जग जावेदेवाधिदेव महादेव पार्वती जी का ध्यान करें तथा आज प्रदोषव्रत कर करूंगा ऐसा संकल्प करें। दिन भर पूजा की सभी वस्तुएं एकत्रित करें। इनमें रोली, चावल, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य, बेलपत्र, धतूरा, फूलमाला, गंगाजल, इत्र, भांग पंचामृत की सभी वस्तु फल एवं प्रसाद पूजन की सभी वस्तु एकत्रित कर लें। सायंकाल स्नान करके सफेद वस्त्र धारण करके शिव मंदिर में जाएं। वहां ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए देवाधिदेव महादेव की 16 उपचारों से पूजा-अर्चना करें। अभिषेक एवं रुद्री पाठ ओम नम: शिवाय मंत्र का जप करें। आरती पुष्पांजलि करके अपने घर आ जाएं। प्रसाद ग्रहण करें। ऐसा करने से सभी मनोकामना इसीलोक में पूर्ण हो जाती हैं।
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