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UP: ये हाल है सहकारी समितियों के भवनों का... हो चुके हैं जर्जर, बैठने में लगता है डर; खुले में बांट रहे खाद
Wed, 04 Dec 2024 01:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संंवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2024 01:58 PM IST
सार
मथुरा में सहकारी समितियों के भवनों का हाल चौंकाने वाला है। इनके भवन इस कदर जर्जर हो चुके हैं, जिससे यहां बैठने में भी डर लगता है।
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मथुरा। जर्जर हालत में खड़ा सहकारी गोदाम।
- फोटो : mathura
विस्तार
मथुरा के बाजना में किसानों को खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्र में बनाए गए कई साधन सहकारी समितियों के भवन जर्जर हो गए हैं। क्षतिग्रस्त भवनों में खाद और बीज को सुरक्षित रखना कठिन हो गया है। इससे कर्मचारी और किसान परेशान हैं।
नौहझील ब्लाक के दिलुपट्टी न्याय पंचायत में चार दशक पूर्व समिति के भवन का निर्माण कराया गया था। रख-रखाव के अभाव में यह जर्जर हो गया है। बरसात में छत से पानी टपकने के कारण सचिव और कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। खाद-बीज के सुरक्षित रख-रखाव की व्यवस्था नहीं होने से समय से पूर्व मिल रही खाद का उठान करने से सचिव कतराते हैं। वहीं मुदलिया साधन सहकारी समिति के बाहर की दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। कर्मचारी अंदर बैठने से डरते हैं।
कई वर्ष से यहां ताला बंद है। समिति का भवन ढहने के कगार पर हैं। समिति के सरपंच लोकेश अजय, सोनू, जहान, नानक सेठ, सतेंद्र का कहना है कि समितियों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में धान व गेहूं की खरीद कैसे की जा सकती है।
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नौहझील ब्लाक के दिलुपट्टी न्याय पंचायत में चार दशक पूर्व समिति के भवन का निर्माण कराया गया था। रख-रखाव के अभाव में यह जर्जर हो गया है। बरसात में छत से पानी टपकने के कारण सचिव और कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। खाद-बीज के सुरक्षित रख-रखाव की व्यवस्था नहीं होने से समय से पूर्व मिल रही खाद का उठान करने से सचिव कतराते हैं। वहीं मुदलिया साधन सहकारी समिति के बाहर की दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। कर्मचारी अंदर बैठने से डरते हैं।
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कई वर्ष से यहां ताला बंद है। समिति का भवन ढहने के कगार पर हैं। समिति के सरपंच लोकेश अजय, सोनू, जहान, नानक सेठ, सतेंद्र का कहना है कि समितियों की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में धान व गेहूं की खरीद कैसे की जा सकती है।
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