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Russia Ukraine war:‘सफर में अटकी रहीं सांसें, पता नहीं कब हो जाए धमाका’
Wed, 02 Mar 2022 10:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 10:49 PM IST
सार
मथुरा के विजय सिंह लोधी की सांसें अटकी हुई हैं। यूक्रेन के हालातों को देख वे बेटी से पल- पल की अपडेट ले रहे हैं। बेटी ने बताया कि वह सुरक्षित है और यूक्रेन से हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गई है। उसने यूक्रेन के दहशतभरे हालातों को भी बयां किया।
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आशा गुंजिता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रूस और यूक्रेन के बीच जंग का दर्द उनसे पूछो, जिनके बच्चे यूक्रेन में फंसे हैं। मां-बाप सो नहीं पा रहे हैं। तमाम मुसीबतों को पार करते हुए वहां फंसे मेडिकल छात्र-छात्राएं हिम्मत नहीं हार रहे हैं और परिजनों से कह रहे हैं कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, जल्दी वापस आऊंगा। ऐसा ही आशा गुंजिता के पिता विजय सिंह लोधी राजपूत को जगी है। उनकी बेटी ट्रेन के माध्यम से यूक्रेन से हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गई है। इसके लिए 1300 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा। सफर के दौरान छात्रा की सांसें अटकी रहीं कि सफर के दौरान कब धमाका हो जाए।
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एमबीबीएस तृतीय वर्ष की है छात्रा
विजय सिंह लोधी राजपूत निवासी 180 श्रीजी शिवाशा एस्टेट, गोवर्धन रोड मथुरा ने बताया उनकी बेटी गुंजिता सिंह एमबीबीएस तृतीय वर्ष बोगोमुलेट यूनिवर्सिटी कीव यूक्रेन से पढ़ाई कर रही थी। मंगलवार को बेटी ने ट्रेन में बैठकर राजधानी कीव को छोड़ दिया था और बुधवार को पड़ोसी देश हंगरी पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि जब बेटी यूक्रेन से हंगरी के लिए ट्रेन से जा रही थी तो रास्ते में कई बार चेकिंग की गई।
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भारत का नाम सुनते ही मिल रही मदद
उन्होने बताया कि जैसे ही बेटी को कोई पूछता कि कहां से हो, तो भारत का नाम सुनते ही मदद के लिए तैयार हो जाता था। बेटी किसी तरह से यूक्रेन सीमा पार करके हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गई है। वहां पर भारत सरकार की मदद से बेटी को हॉस्टल में ठहराया गया है। खाने-पीने समेत सभी सुविधाएं मिल रही हैं।
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