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जवाहरबाग को लोहिया पार्क बनाने के प्रोजेक्ट पर ‘ब्रेक ’
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 05 Apr 2017 11:58 PM IST
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jawahar bagh
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दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों के खून से सने जवाहरबाग को लोहिया पार्क बनाने के प्रोजेक्ट पर फिलहाल ‘ब्रेक ’ लग गया है। जवाहरबाग में कराए जा रहे सभी निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं। शासन स्तर से बगैर टेंडर कार्य कराए जाने की जांच भी शुरू करा दी गई है।
जवाहरबाग खाली कराते वक्त दो जून 2016 को हुई हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की मौत हो गई थी। 27 कब्जाधारी भी मारे गए थे। जवाहरबाग की हिंसा प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश भर में गूंजी थी। जवाहरबाग पर दो साल तक रामवृक्ष और उसके समर्थकों का कब्जा रहा और हजारों लोगों की भीड़ ने बाग को तहसनहस कर डाला था। पेड़ जल गए थे। नलकूप खराब हो गए थे। चारदीवारी भी तोड़ दी गई थी। अखिलेश सरकार ने इस बदहाल पार्क को संवारने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया था।
जवाहरबाग को लोहिया पार्क के रूप में विकसित करने के लिए 66 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इसमें से पांच करोड़ जारी भी हो चुके हैं। राज्य निर्माण निगम को काम कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। निर्माण निगम ने बगैर टेंडर कराए ही लखनऊ के ठेकेदारों को काम दे दिया था। अमर उजाला ने 30 मार्च के अंक में ‘जवाहरबाग हिंसा के दाग मिटाने में भी धांधली’ खबर का प्रकाशित की तो यह मामला शासन तक पहुंच गया। इस पर शासन ने मामले की जांच बैठा दी। आनन फानन में निर्माण का काम रोक दिया गया, जो लेबर थी वह भी चली गई है।
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66 करोड़ का था जवाहरबाग के सुंदरीकरण का प्रोजेक्ट
15.93 करोड़ की शासन ने मंजूरी भी दे दी थी
पांच करोड़ निर्माण के लिए जारी भी कर दिए थे
मुकुल द्विवेदी, संतोष के नाम से पहचाना जाएगा जवाहरबाग
कैबिनेट मंत्री और प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट की जांच कराई जा रही है। इस पार्क को शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और संतोष यादव के नाम से पहचाना जाएगा। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि जवाहरबाग हिंसा में जो भी दोषी थे सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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जवाहरबाग खाली कराते वक्त दो जून 2016 को हुई हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की मौत हो गई थी। 27 कब्जाधारी भी मारे गए थे। जवाहरबाग की हिंसा प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश भर में गूंजी थी। जवाहरबाग पर दो साल तक रामवृक्ष और उसके समर्थकों का कब्जा रहा और हजारों लोगों की भीड़ ने बाग को तहसनहस कर डाला था। पेड़ जल गए थे। नलकूप खराब हो गए थे। चारदीवारी भी तोड़ दी गई थी। अखिलेश सरकार ने इस बदहाल पार्क को संवारने के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया था।
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जवाहरबाग को लोहिया पार्क के रूप में विकसित करने के लिए 66 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इसमें से पांच करोड़ जारी भी हो चुके हैं। राज्य निर्माण निगम को काम कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। निर्माण निगम ने बगैर टेंडर कराए ही लखनऊ के ठेकेदारों को काम दे दिया था। अमर उजाला ने 30 मार्च के अंक में ‘जवाहरबाग हिंसा के दाग मिटाने में भी धांधली’ खबर का प्रकाशित की तो यह मामला शासन तक पहुंच गया। इस पर शासन ने मामले की जांच बैठा दी। आनन फानन में निर्माण का काम रोक दिया गया, जो लेबर थी वह भी चली गई है।
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66 करोड़ का था जवाहरबाग के सुंदरीकरण का प्रोजेक्ट
15.93 करोड़ की शासन ने मंजूरी भी दे दी थी
पांच करोड़ निर्माण के लिए जारी भी कर दिए थे
मुकुल द्विवेदी, संतोष के नाम से पहचाना जाएगा जवाहरबाग
कैबिनेट मंत्री और प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट की जांच कराई जा रही है। इस पार्क को शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और संतोष यादव के नाम से पहचाना जाएगा। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि जवाहरबाग हिंसा में जो भी दोषी थे सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।