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कभी नौका विहार से कमाते थे रोटी, अब ढकेल लगाकर भी नहीं भर पा रहे पेट

Thu, 02 Jul 2020 06:30 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2020 06:30 PM IST
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वृंदावन (मथुरा)। श्री बांकेबिहारी के भक्तों को यमुना में नौका विहार कराते हुए आनंदित होने वाले 250 नाविक परिवार अब दो जून की रोटी के लिए परेशान हैं। चार माह से ठाकुर जी के भक्तों के वृंदावन आने की प्रतीक्षा करने वाले अनेक नाविकों ने तो अब अपना काम ही बदल दिया है। कोई मजदूरी के लिए भटक रहा है तो किसी ने फल-सब्जी की ढकेल लगा ली है, फिर भी भरपेट भोजन की जुगाड़ नहीं हो पा रही।
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भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला स्थलियों में सर्वाधिक श्रद्धालु वृंदावन ही दर्शन के लिए आते रहे हैं। इस दौरान लॉकडाउन से पहले वृंदावन की रौनक देखते ही बनती थी। खासकर यमुना के घटों पर विभिन्न क्षेत्रों की मौजूदगी से यहां की रंगत देखते ही बनती थी। पर्यटन विभाग के मुताबिक दो से तीन हजार श्रद्धालु प्रतिदिन नौका विहार करते थे।
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इससे करीब 250 से 300 नाविकों के परिवार हंसी खुशी पल रहे थे, लेकिन चार माह में स्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। यमुना के घाटों पर हर वक्त सन्नाटा पसरा रहता है। नाविकों के परिवारों के समझ दो जून की रोटी के लाले पड़ गए हैं। यमुना के घाटों पर कान्हा के भक्तों का इंतजार करने वाले इन नाविकों ने नावों को छोड़कर मजदूरी की तलाश शुरू कर दी है। लेकिन, स्थितियां फिर भी खराब हैं।
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नाविक बोले, पूछिए मत कैसे गुजर रही है
लॉकडाउन से पहले 400-500 रुपये प्रतिदिन कमाते थे। शनिवार और रविवार को कमाई एक हजार रुपये से अधिक हो जाती थी, लेकिन अब तो नौका विहार के लिए कोई नहीं आता है। बहुत परेशानी का ये दौर चल रहा है। पूछिए मत कैसे-कैसे गुजर हो रही है।
कन्हैया, नाविक
पहली बार नाव बनाई थी। करीब 40 हजार रुपये इस पर खर्च आया। कुछ अपने पास पैसे थे, कुछ कर्ज लिया, लेकिन नाव बनी और लॉकडाउन ने उसे चलने ही नहीं दिया। किराए पर खेती लेकर काम करने की कोशिश की तो पिछले दिनों यमुना में आए पानी ने फसल को चौपट कर दिया। अब फल-सब्जी की ढकेल लगा रहे हैं।
लक्ष्मण, नाविक
श्रद्धालु नहीं आ रहे है तो नाव खड़ी है। परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी के लिए जाते हैं। कभी मिलती है कभी नहीं। समझ नहीं आ रहा कि क्या होगा। कैसे परिवार का पेट पलेगा। यह सब स्थितियां कब तक ऐसे ही रहेंगी।

सोनपाल, नाविक
एक साल पहले यमुना में आई बाढ़ के लिए तीन नावों को वृंदावन से शेरगढ़ के बाबूगढ़ गांव में राहत कार्य के लिए ले जाया गया था। इसका भुगतान अब तक छाता तहसील ने नहीं किया है। लॉक डाउन में उम्मीद थी कि ये मजदूरी मिल जाएगी, परंतु तहसीलकर्मी उनकी सुनने को तैयार नहीं हैं।
कल्लू केवट
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