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Mathura: सदमे में कारोबारी परिवार, थम नहीं रहे आंसू...गुस्से ने उजाड़ की घर की खुशियां
Mon, 03 Nov 2025 02:26 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 03 Nov 2025 02:26 PM IST
सार
वृंदावन के प्रसिद्ध बीड़ी कारोबारी परिवार की खुशियां गुस्से ने उजाड़ दीं। पिता की हत्या करने के बाद बेटे ने खुद की भी जान ले ली। दोनों की मौत के बाद से परिवारीजन सदमे में हैं।
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बीड़ी कारोबारी पिता पुत्र का फाइल फोटो और पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
वृंदावन के प्रसिद्ध बीड़ी कारोबारी सुरेशचंद्र अग्रवाल और बेटे नरेशचंद्र अग्रवाल की मौत के बाद घर में मातम छाया हुआ है। नरेशचंद्र की मां और पत्नी के आंसू नहीं थम रहे हैं। वहीं बड़े भाई दिनेशचंद्र भी सदमे की हालत में हैं। रिश्तेदार और नजदीकी मित्र परिवारीजनों को ढांढस बंधा रहे हैं।
पिता और छोटे भाई नरेशचंद्र अग्रवाल की एक साथ मौत हो जाए से टूटे बडे़ भाई दिनेशचंद्र अग्रवाल का कहना है कि दोनों ही लोग उन पर जिम्मेदारी छोड़ गए। हंसता खेलता परिवार था। किसी की नजर लग गई। उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वह पुराने दिनों की बातें याद कर वे बार-बार भावुक हो रहे थे। हर कोई उस पल को कोस रहा है। नरेश के गुुस्से ने एक पल में ही पूरे परिवार को छिन्न भिन्न कर दिया।
व्यापारी नेता आलोक बंसल बताते हैं कि तीनों भाईयों में अटूट प्रेम था। वह कभी एक दूसरे की बात नहीं काटते थे, लेकिन नरेशचंद्र को जब शराब पीने की लत लगी थी कि तभी से वह बहुत जल्दी हाईपर हो जाते थे। कई बार उनको समझाया भी था लेकिन वह शौक नहीं छोड़ पाए। किसी को नहीं पता था कि यह शौक उनके लिए ही जानलेवा हो जाएगा।
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पिता और छोटे भाई नरेशचंद्र अग्रवाल की एक साथ मौत हो जाए से टूटे बडे़ भाई दिनेशचंद्र अग्रवाल का कहना है कि दोनों ही लोग उन पर जिम्मेदारी छोड़ गए। हंसता खेलता परिवार था। किसी की नजर लग गई। उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वह पुराने दिनों की बातें याद कर वे बार-बार भावुक हो रहे थे। हर कोई उस पल को कोस रहा है। नरेश के गुुस्से ने एक पल में ही पूरे परिवार को छिन्न भिन्न कर दिया।
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व्यापारी नेता आलोक बंसल बताते हैं कि तीनों भाईयों में अटूट प्रेम था। वह कभी एक दूसरे की बात नहीं काटते थे, लेकिन नरेशचंद्र को जब शराब पीने की लत लगी थी कि तभी से वह बहुत जल्दी हाईपर हो जाते थे। कई बार उनको समझाया भी था लेकिन वह शौक नहीं छोड़ पाए। किसी को नहीं पता था कि यह शौक उनके लिए ही जानलेवा हो जाएगा।
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