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‘सृष्टि की संतुलनकर्ता हैं राधारानी’
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 21 Oct 2015 06:19 PM IST
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नवरात्र के उपलक्ष्य में छटीकरा मार्ग स्थित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आश्रम में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के मध्य बुधवार से श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभांरभ किया गया।
व्यासपीठ से आचार्य मृदुलकृष्ण गोस्वामी ने कहा कि भगवती राधारानी ही परांबा हैं। वे ही समस्त सृष्टि की सृजनहार, पालनहार और सृष्टि की संतुलनकर्ता हैं।
जिस प्रकार से समग्र नदियों का जल सागर में जा मिलता है। उसी प्रकार प्रत्येक देवी-देवता की पूजा-अर्चना भी ठाकुर बांकेबिहारी और राधारानी की ही पूजा-अर्चना है।
उन्होंने कहा कि शक्ति उपासना के पावन पर्व पर राधारानी के प्रेम पावन स्वरूप भगवान कृष्णचंद्र की लीलाओं का श्रवण, दर्शन, मनन, चिंतन और पूजन अक्षय पुण्य प्रदाता होने के साथ प्रभु श्यामाश्याम की अहैतुकी कृपा प्रदान करने वाला भी है।
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इससे पूर्व बैंडबाजों की सुमधुर ध्वनि और बांकेबिहारी महाराज के जयकारों के मध्य भागवतजी की भव्य मंगल कलश शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। इस अवसर पर आचार्य अतुलकृष्ण गोस्वामी, आचार्य रामाभिलास मिश्र, प्रेमदेव अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
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व्यासपीठ से आचार्य मृदुलकृष्ण गोस्वामी ने कहा कि भगवती राधारानी ही परांबा हैं। वे ही समस्त सृष्टि की सृजनहार, पालनहार और सृष्टि की संतुलनकर्ता हैं।
जिस प्रकार से समग्र नदियों का जल सागर में जा मिलता है। उसी प्रकार प्रत्येक देवी-देवता की पूजा-अर्चना भी ठाकुर बांकेबिहारी और राधारानी की ही पूजा-अर्चना है।
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उन्होंने कहा कि शक्ति उपासना के पावन पर्व पर राधारानी के प्रेम पावन स्वरूप भगवान कृष्णचंद्र की लीलाओं का श्रवण, दर्शन, मनन, चिंतन और पूजन अक्षय पुण्य प्रदाता होने के साथ प्रभु श्यामाश्याम की अहैतुकी कृपा प्रदान करने वाला भी है।
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इससे पूर्व बैंडबाजों की सुमधुर ध्वनि और बांकेबिहारी महाराज के जयकारों के मध्य भागवतजी की भव्य मंगल कलश शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। इस अवसर पर आचार्य अतुलकृष्ण गोस्वामी, आचार्य रामाभिलास मिश्र, प्रेमदेव अग्रवाल आदि उपस्थित थे।