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अबला, सबला सी लगै यूं बरसाने की वाम...

Thu, 13 Feb 2020 08:39 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 13 Feb 2020 08:39 PM IST
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barsana holi song
लठामार होली खेलतीं महिलाएं। (फाइल फोटो) - फोटो : MATHURA
बरसाना (मथुरा)। इत गोपिन अनुराग हिये, उत मोहन की प्रीत, राधे जु ने डाल दी या ब्रज होली की रीत, अनुपम होली होत है, यहां लट्ठों की सरनाम, अबला, सबला सी लगै यूं बरसाने की वाम। लट्ठ धरे कंधा फिरै जिमहि भागवै ग्वाल, जिम महिषासुर मर्दिनी रण में चलती चाल। जी हां लट्ठों की सरनाम की अनुपम होली का आयोजन पूरे विश्व में सिर्फ बरसाना में होता है।
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द्वापर में राधा-कृष्ण ने सखी सखाओं संग राक्षसों को नारी शक्ति का एहसास, वहीं मुगलों से लड़ने को ब्रज की अबला, सबला नारियों को भट्ट जी ने सिखाया था लट्ठ चलाना।
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विदित हो द्वापर की लीलाएं विलुप्त के कगार पर पहुंच गईं। इनको 550 वर्ष पहले तमिलनाडु से आए श्रील नारायण भट्ट ने शुरू किया था। उस समय मुगलों का शासन था। मुगल शासक हिंदू नारियों को जबरन उठा कर ले जाते थे। इसलिए श्रील नारायण भट्ट ने ब्रज की नारियों को अबला से सबला का रूप दिया और होली के माध्यम से उन्हें लट्ठ चलाना सिखाया। जब से ही बरसाना की प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन होता चला आ रहा है। श्रीकृष्ण ने ब्रज गोपियों को राक्षसों से लड़ने के लिए लट्ठ चलाना सिखाया था।
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बरसाना की लड्डू होली भी प्राचीन
लड्डू होली का आयोजन भी प्राचीन है। जब बरसाना से होली का आमंत्रण लेकर राधारानी की सखी नंदगांव जाती हैं तो उस आमंत्रण को स्वीकार करने के बाद श्रीकृष्ण अपने दूत को बरसाना भेजते हैं। कृष्ण द्वारा होली का आमंत्रण स्वीकार करने की सूचना देने वाले दूत को सखी लड्डू खिलाती हैं तो वह इतना मदमस्त हो जाता है कि लड्डू खाता है और लुटाता है। तबसे से ही लड्डू होली की परंपरा चली आ रही है।
आज भी नंदगांव का पांडा बरसाना में होली का आमंत्रण स्वीकार करने के लिए आता है। ऐसे ही बरसाना की लठामार होली खेलने के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण नंदगांव लौटते है तो बरसाना की गोपियां उनसे होली का फगुआ मांगती हैं तो श्रीकृष्ण उन्हें नंदगांव में होली खेलने का आमंत्रण देते है। इसके बाद बरसाना की गोपियां फगुआ मांगने नंदगांव जाती हैं।

कृष्ण उन्हें अपनी भाभियों से पिटवा देते हैं। कहावत है कि बरसाना के लट्ठ की याद करें सब रात जब कृष्ण अपने सखाओं को बरसाना से पिटवा के ले जाते है तो सभी उन पर नाराज हो जाते हैं। तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब यह गोपियां फगुआ मांगने आएंगी हम इन्हें अपनी भाभियों से पिटवा देंगे। आज भी बरसाना की लठामार होली के बाद बरसाना की गोपियां फगुआ मांगने नंदगांव जाती हैं, लेकिन अब बरसाना के पुरुष सखी रूप में फगुआ मांगने जाते हैं। तबसे ही नंदगांव की लठामार होली का आयोजन होता चला आ रहा है।
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