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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   Bankebihariji's property is not only in Vrindavan but also in Pakistan

Vrindavan : वृंदावन ही नहीं, पाकिस्तान तक है बांकेबिहारीजी की संपत्ति; मंदिर प्रबंधन कमेटी जुटा रही है ब्योरा

Sat, 13 Sep 2025 06:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वृंदावन (मथुरा)
अमर उजाला नेटवर्क, वृंदावन (मथुरा) Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 13 Sep 2025 06:10 AM IST
सार

जानकारों के अनुसार, बांकेबिहारीजी की संपत्ति वृंदावन ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी है। यहां तक पाकिस्तान में भी बिहारी जी की संपत्ति है। कई ग्रंथों में इसका उल्लेख है।

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Bankebihariji's property is not only in Vrindavan but also in Pakistan
बांके बिहारी मंदिर - फोटो : instagram

विस्तार

श्रीबांकेबिहारी महाराज के मंदिर की संपत्ति का सर्वे शुरू होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मंदिर प्रबंधन कमेटी द्वारा अब चल-अचल संपत्तियों की सूची तैयार की जाएगी। जानकारों के अनुसार, बांकेबिहारीजी की संपत्ति वृंदावन ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी है। यहां तक पाकिस्तान में भी बिहारी जी की संपत्ति है। कई ग्रंथों में इसका उल्लेख है।

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इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि श्रीबांकेबिहारी की सेवार्थ उनके प्राकट्यकाल से लेकर अब तक बहुत सी चल-अचल संपत्तियां भेंट व दान में प्राप्त हुई हैं। प्रभु सेवार्थ भूमि, भवन, मंदिर, खेत, कीमती आभूषण आदि भेंट करने वाले भक्तों में हिंदू राजा-महाराजाओं के साथ-साथ मुस्लिम नवाबों के नाम भी शामिल रहे हैं। प्रबंधकीय उपेक्षा तथा सामाजिक उदासीनता की वजह से श्रीबांकेबिहारी महाराज और उनके प्राकट्यकर्ता रसिकशेखर श्री स्वामी हरिदासजी महाराज के घराने की देश-विदेश में मौजूद अरबों रुपये की तमाम प्राचीन संपत्तियां पिछले लंबे समय से स्वयं के कल्याण की बाट जोहते हुए अपने तारनहार का इंतजार कर रही हैं। 
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पुस्तकों व अभिलेखाें में प्रमाण दर्ज
इन पुरातन एवं नवीन धरोहरों को संरक्षित करने के उचित-पारदर्शी प्रयास ना किए जाने से गोस्वामी समाज की वर्तमान पीढ़ी को तो आराध्य प्रभु और अपने कुटुंब की अधिकांश ऐतिहासिक संपत्तियों की कोई विशेष जानकारी ही नहीं है। उक्त संपत्तियों से संबंधित बहुत से प्रमाण ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी द्वारा प्रकाशित श्रीस्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ, केलिमालजु, कृपा कोर, कथा हरिदासबिहारी की, मथुरा ए डिस्ट्रिक्ट मेमोयर, ब्रजभूमि इन मुगल टाइम्स सहित अनेक पुरातन अभिलेखों में दर्ज हैं।
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ये हैं संपत्तियां
इतिहासकार के अनुसार श्रीबांकेबिहारी जी महाराज की सेवार्थ सन् 1592 में जयपुर नरेश सवाई महाराजा मानसिंह ने तीन एकड़ जमीन, 1594 में मुगल सम्राट अकबर ने 25 बीघा जमीन वृंदावन और राधाकुंड में, वर्ष 1595 में हरिराम व्यासात्मज किशोरदास द्वारा किशोरपुरा भूखंड, 1596 में मित्रसेन कायस्थ व उनके सुपुत्र बिहारिनदास ने बिहारिनदेव टीलावाली भूमि, वर्ष 1748 में जयपुर नरेश सवाई महाराजा ईश्वरीसिंह ने 1.15 एकड़ जमीन, वर्ष 1769 ई. में भरतपुर और करौली सरकार द्वारा भूमिदान, 1780 ई. में विंध्याचल राजपरिवार ने भूमि व बहुमूल्य आभूषण, 1785 में ग्वालियर रियासत ने भूमि-भवन व आभूषण, साल 1960 में राजस्थान के भक्त परिवार ने कोटा में 90 बीघा जमीन और वर्ष 2005 के आसपास कोलकाता के एक भक्त ने वृंदावन में अपने मकान को सहर्ष दान किया है।

कई गांव दान में मिले
इतिहासकार बताते हैं कि 1440 के करीब संयुक्त भारत के पंजाब प्रांत में आने वाले मुल्तान जिला अंतर्गत चरणोदक नगर के उच्चग्राम में हरिदासजी के प्रपितामह विष्णुदेवजी को उनके सियालकोट निवासी शिष्य लक्ष्मीनारायण वर्मा ने एक घर व खेत दान में दिए थे। साल 1485 में हरिदासजी के पितामह गजाधरजी को मुल्तान के तत्कालीन लंगाह सल्तनत के शासक शाह हुसैन ने पांच गांव माफी दान किए थे। सेवायत के मुताबिक सन् 1525 में हरिदासजी के पिता आशुधीरजी को हरिगढ़ (अलीगढ़) के तत्कालीन गुर्जर राजा ने हरिदासपुर सहित पांच गांव दान दिए थे।

अन्य जगह भी हैं श्रीबिहारीजी के मंदिर व संपत्ति

  • इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि दिल्ली के फराशखाने में मंदिर, भवन, वर्तमान पाकिस्तान के मुल्तान, शक्कर सिंध एवं सियालकोट में मंदिर-हवेली आदि तो अत्यंत ऐतिहासिक और पुरातन हैं। इन सभी स्थानों का प्रमाणित विवरण अनेक ग्रंथों में उपलब्ध है। 
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