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Mathura News: खाते से 20 हजार रुपये काटने पर बैंक को फटकार
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रिफाइनरी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग मथुरा ने एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) टाउनशिप शाखा को उपभोक्ता के खाते से बिना वैध कारण 20 हजार रुपये काटने के मामले में फटकार लगाई है। पीड़ित को राहत देते हुए बैंक को मूल धनराशि, ब्याज और मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
मामला रविकांत दुबे की ओर से वर्ष 2017 में दायर उपभोक्ता वाद से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार 25 जून 2016 को बैंक ऑफ बड़ौदा से उनके एसबीआई खाते में ऑनलाइन माध्यम से 10-10 हजार रुपये की दो सफल ट्रांजेक्शन से 20 हजार रुपये जमा हुए थे। करीब दो माह बाद 26 अगस्त 2016 को एसबीआई ने बिना पूर्व सूचना और स्पष्ट कारण बताए उनके खाते से पूरी राशि काट ली।
सुनवाई के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा ने आयोग के समक्ष बैंक स्टेटमेंट, आरटीआई से प्राप्त जानकारी और अन्य अभिलेख प्रस्तुत कर बताया कि दोनों ट्रांजेक्शन सफलतापूर्वक एसबीआई खाते में हुए थे और राशि उनके ग्राहक के खाते में वापस नहीं आई। वहीं एसबीआई की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि राशि किस आधार पर काटी की गई, किस खाते में भेजी गई और उसका इलेक्ट्रॉनिक ट्रेल क्या था। इस पर आयोग ने वादी के पक्ष के फैसला सुवाया। आयोग ने वादी की मूल घनराशि 20 रुपये, सात प्रतिशत की दर से ब्याज, मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार रुपये और अन्य व्यय के लिए 5 हजार रुपये (कुल करीब 45 रुपये) देने का आदेश दिया है। संवाद
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मामला रविकांत दुबे की ओर से वर्ष 2017 में दायर उपभोक्ता वाद से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार 25 जून 2016 को बैंक ऑफ बड़ौदा से उनके एसबीआई खाते में ऑनलाइन माध्यम से 10-10 हजार रुपये की दो सफल ट्रांजेक्शन से 20 हजार रुपये जमा हुए थे। करीब दो माह बाद 26 अगस्त 2016 को एसबीआई ने बिना पूर्व सूचना और स्पष्ट कारण बताए उनके खाते से पूरी राशि काट ली।
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सुनवाई के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा ने आयोग के समक्ष बैंक स्टेटमेंट, आरटीआई से प्राप्त जानकारी और अन्य अभिलेख प्रस्तुत कर बताया कि दोनों ट्रांजेक्शन सफलतापूर्वक एसबीआई खाते में हुए थे और राशि उनके ग्राहक के खाते में वापस नहीं आई। वहीं एसबीआई की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि राशि किस आधार पर काटी की गई, किस खाते में भेजी गई और उसका इलेक्ट्रॉनिक ट्रेल क्या था। इस पर आयोग ने वादी के पक्ष के फैसला सुवाया। आयोग ने वादी की मूल घनराशि 20 रुपये, सात प्रतिशत की दर से ब्याज, मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार रुपये और अन्य व्यय के लिए 5 हजार रुपये (कुल करीब 45 रुपये) देने का आदेश दिया है। संवाद
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