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जेनर्म का शहर हो गया बेरहम
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Sat, 11 Jul 2015 11:13 PM IST
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पहली ही बारिश के बाद शहर में जल प्लावन की स्थिति हो गई है। यह वही शहर है जिसे कुछ साल पहले जेनर्म का सुनहरा ख्वाब दिखाया गया था। लेकिन, आज स्थिति भयावह है। हर तरफ मौत के गड्ढे, इनमें पड़कर गिरते बाइक सवार, नाले में फंसकर दुर्घटनाग्रस्त होतीं कार देखकर लगात है कि जेनर्म का शहर बेरहम हो गया है।
250 करोड़ रुपये की योजना पर पानी फिरते देख कान्हा की नगरी के लोग सोशल मीडिया के जरिए इस योजना को कोस रहे हैं। वहीं पालिका ने हालात बिगड़ते देख शहर में सभी प्रकार की खोदाई पर रोक लगा दी है।
कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जेनर्म) ने भगवान श्रीकृष्ण की नगरी को बदहाल कर दिया है। करीब 8-10 साल पहले शहर की जनता को ख्वाब दिखाया गया था कि जेनर्म शहर की शक्ल बदल देगी। सड़कें चमाचम होंगी और हर तरफ तरक्की की राह नजर आएगी। बरसात के पड़ते ही पानी एक झटके में खत्म हो जाएगा। कूड़ा देखने को नहीं मिलेगा।
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शहर में जेनर्म के लिए 1833 करोड़ की स्वीकृति कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से होने की बात भी बताई गई थी। लेकिन, आज लोग जेनर्म के नाम पर आग-बबूला हो जाते हैं। इसका कारण पहली बारिश के बाद शहर के हालात हैं। जल निगम ने जेनर्म के अंतर्गत सीवर पाइपलाइन बिछाने के लिए शहर की सड़कें खोद दी लेकिन उसके बाद पलट कर नहीं देखा। जिधर भी निगाह डालिए, सड़कें उखड़ी पड़ी हैं।
एक पखवाड़े पहले कृष्णापुरी में एक व्यक्ति की जान सीवर की भेंट चढ़ चुकी है। एक सप्ताह पहले रोटी गोदाम पर सीवर से संबंधित जमीन धंसी। यहां चार साल से सड़क खोदी पड़ी है। शुक्रवार की बरसात में मयूर विहार में सीवर के चेंबर के आसपास जमीन धंस गई। बाढ़पुरा में भी यही हालात हैं। डैंपियर नगर में तीन स्थानों पर सीवर से जुड़े क्षेत्र में जमीन धंस गई है। संत घाट पर परिक्रमा मार्ग भी इसी कारण धंस गया है। बरसात के दौरान इन रास्तों से निकलने वाले घबराहट में रहे कहीं उनकी जान न चली जाए।
जेनर्म के जो सुनहरे ख्वाब लोगों को दिखाए गए थे, उसकी बदहाली सीवर तक सीमित नहीं है। नालों के निर्माण में मनमानी ने जलभराव की समस्या बढ़ा दी है। बीएसए कालेज, कृष्णा नगर और महोली रोड क्षेत्र सहित शहर के 40 प्रतिशत हिस्से से गुजरने वाले कई नालों को समाहित करने वाले भैंसबहोरा नाले की चौड़ाई सिर्फ चार फीट कर दी। इससे जुड़े सभी क्षेत्रों में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है, जिससे पूरा शहर शुक्रवार की बरसात के बाद भी जूझता रहा।
पालिका अध्यक्ष मनीषा गुप्ता ने इस स्थिति को देखते हुए शहर में सभी प्रकार की खोदाई पर रोक लगा दी है। जल निगम और विद्युत कंपनी को निर्देशित किया है कि अग्रिम आदेश तक नए स्थानों पर खोदाई न करें। जहां पूर्व में खोदाई की गई है, पहले उसे दुरुस्त कर लें। उन्होंने बताया कि सीवर और विद्युत लाइनों के लिए की गई खुदाई ने शहर की शक्ल बिगाड़ दी है। इसे दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है।
मुसीबत बन रहा अतिक्रमण
शहर में नालों पर अतिक्रमण मुसीबत बन रहा है। नालों की सफाई में समस्या खड़ी हो रही है। जेनर्म में बनाए गए नालों को जल निगम ने इच्छानुसार मोड़ दिया। अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता नहीं समझी है। इससे अब इनकी सफाई में भी समस्या आ रही है।
दिन भर दौड़ते नजर आए पालिका कर्मी
शुक्रवार को शहर में जलभराव होने के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति पर डीएम राजेश कुमार की नाराजगी देख पालिका प्रशासन में करंट दौड़ गया। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी सहित अन्य सभी अफसर जल निकासी के प्रबंध करने में जुटे रहे। जल निगम और विद्युत लाइन बिछा रही कंपनी द्वारा खोदी गई सड़कों को भरने में जुटे रहे। भूतेश्वर रेलवे पुल, पुराने बस स्टैंड, नए बस स्टैंड के निकट रेलवे पुल के नीचे हुए भरे पानी को निकाला गया। इससे शनिवार को शहर में जलभराव कहीं नहीं हुआ। खुद चेयरमैन मनीषा गुप्ता ने शहर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया।
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250 करोड़ रुपये की योजना पर पानी फिरते देख कान्हा की नगरी के लोग सोशल मीडिया के जरिए इस योजना को कोस रहे हैं। वहीं पालिका ने हालात बिगड़ते देख शहर में सभी प्रकार की खोदाई पर रोक लगा दी है।
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कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जेनर्म) ने भगवान श्रीकृष्ण की नगरी को बदहाल कर दिया है। करीब 8-10 साल पहले शहर की जनता को ख्वाब दिखाया गया था कि जेनर्म शहर की शक्ल बदल देगी। सड़कें चमाचम होंगी और हर तरफ तरक्की की राह नजर आएगी। बरसात के पड़ते ही पानी एक झटके में खत्म हो जाएगा। कूड़ा देखने को नहीं मिलेगा।
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शहर में जेनर्म के लिए 1833 करोड़ की स्वीकृति कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से होने की बात भी बताई गई थी। लेकिन, आज लोग जेनर्म के नाम पर आग-बबूला हो जाते हैं। इसका कारण पहली बारिश के बाद शहर के हालात हैं। जल निगम ने जेनर्म के अंतर्गत सीवर पाइपलाइन बिछाने के लिए शहर की सड़कें खोद दी लेकिन उसके बाद पलट कर नहीं देखा। जिधर भी निगाह डालिए, सड़कें उखड़ी पड़ी हैं।
एक पखवाड़े पहले कृष्णापुरी में एक व्यक्ति की जान सीवर की भेंट चढ़ चुकी है। एक सप्ताह पहले रोटी गोदाम पर सीवर से संबंधित जमीन धंसी। यहां चार साल से सड़क खोदी पड़ी है। शुक्रवार की बरसात में मयूर विहार में सीवर के चेंबर के आसपास जमीन धंस गई। बाढ़पुरा में भी यही हालात हैं। डैंपियर नगर में तीन स्थानों पर सीवर से जुड़े क्षेत्र में जमीन धंस गई है। संत घाट पर परिक्रमा मार्ग भी इसी कारण धंस गया है। बरसात के दौरान इन रास्तों से निकलने वाले घबराहट में रहे कहीं उनकी जान न चली जाए।
जेनर्म के जो सुनहरे ख्वाब लोगों को दिखाए गए थे, उसकी बदहाली सीवर तक सीमित नहीं है। नालों के निर्माण में मनमानी ने जलभराव की समस्या बढ़ा दी है। बीएसए कालेज, कृष्णा नगर और महोली रोड क्षेत्र सहित शहर के 40 प्रतिशत हिस्से से गुजरने वाले कई नालों को समाहित करने वाले भैंसबहोरा नाले की चौड़ाई सिर्फ चार फीट कर दी। इससे जुड़े सभी क्षेत्रों में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है, जिससे पूरा शहर शुक्रवार की बरसात के बाद भी जूझता रहा।
पालिका अध्यक्ष मनीषा गुप्ता ने इस स्थिति को देखते हुए शहर में सभी प्रकार की खोदाई पर रोक लगा दी है। जल निगम और विद्युत कंपनी को निर्देशित किया है कि अग्रिम आदेश तक नए स्थानों पर खोदाई न करें। जहां पूर्व में खोदाई की गई है, पहले उसे दुरुस्त कर लें। उन्होंने बताया कि सीवर और विद्युत लाइनों के लिए की गई खुदाई ने शहर की शक्ल बिगाड़ दी है। इसे दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है।
मुसीबत बन रहा अतिक्रमण
शहर में नालों पर अतिक्रमण मुसीबत बन रहा है। नालों की सफाई में समस्या खड़ी हो रही है। जेनर्म में बनाए गए नालों को जल निगम ने इच्छानुसार मोड़ दिया। अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता नहीं समझी है। इससे अब इनकी सफाई में भी समस्या आ रही है।
दिन भर दौड़ते नजर आए पालिका कर्मी
शुक्रवार को शहर में जलभराव होने के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति पर डीएम राजेश कुमार की नाराजगी देख पालिका प्रशासन में करंट दौड़ गया। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी सहित अन्य सभी अफसर जल निकासी के प्रबंध करने में जुटे रहे। जल निगम और विद्युत लाइन बिछा रही कंपनी द्वारा खोदी गई सड़कों को भरने में जुटे रहे। भूतेश्वर रेलवे पुल, पुराने बस स्टैंड, नए बस स्टैंड के निकट रेलवे पुल के नीचे हुए भरे पानी को निकाला गया। इससे शनिवार को शहर में जलभराव कहीं नहीं हुआ। खुद चेयरमैन मनीषा गुप्ता ने शहर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया।