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जेएनयू में सेमिनार के विरोध से संतों में उबाल
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वृंदावन। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में ‘रामायण के जरिए नेतृत्व पाठ’ विषय पर आयोजित हो रही ऑनलाइन सेमिनार के विरोध से संतों में उबाल है। ब्रजभूमि कल्याण परिषद की ऑनलाइन मीटिंग में इस पर आक्रोश जताया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि श्रीराम जैसा शासन करने वाला संसार में दूसरा कोई नहीं है। अगर विद्यार्थी उनके शासन काल से किस प्रकार देश में शासन करना चाहिए कि शिक्षा लेते हैं तो इसमें गलत क्या है। इसका विरोध नहीं होना चाहिए। परिषद के ब्रज मंडल अध्यक्ष आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि जेएनयू किसी धर्म जाति से जुड़ी हुई संस्था नहीं है। उसमें भगवान श्रीराम के शासन करने की क्षमता पर अगर कोई सेमिनार होती है तो वह देश एवं विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाली है।
ऑनलाइन आक्रोश व्यक्त करने वालों में भक्ति किंकर श्रीधर महाराज, भक्ति वेदांत मधुसूदन महाराज, महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज, गोकुल चंद गोस्वामी, आचार्य बल्लभ, पंडित विजय शर्मा, महंत सुरेशानंद, महामंडलेश्वर चित्रप्रकाशानंद महाराज, महंत रामदेव चतुर्वेदी, रेवती रमन दास, महंत चेतनदास रामस्वरूप दास, ब्रह्मचारी महंत स्वामी आदित्यनाथ महाराज हैं।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि श्रीराम जैसा शासन करने वाला संसार में दूसरा कोई नहीं है। अगर विद्यार्थी उनके शासन काल से किस प्रकार देश में शासन करना चाहिए कि शिक्षा लेते हैं तो इसमें गलत क्या है। इसका विरोध नहीं होना चाहिए। परिषद के ब्रज मंडल अध्यक्ष आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि जेएनयू किसी धर्म जाति से जुड़ी हुई संस्था नहीं है। उसमें भगवान श्रीराम के शासन करने की क्षमता पर अगर कोई सेमिनार होती है तो वह देश एवं विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाली है।
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ऑनलाइन आक्रोश व्यक्त करने वालों में भक्ति किंकर श्रीधर महाराज, भक्ति वेदांत मधुसूदन महाराज, महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज, गोकुल चंद गोस्वामी, आचार्य बल्लभ, पंडित विजय शर्मा, महंत सुरेशानंद, महामंडलेश्वर चित्रप्रकाशानंद महाराज, महंत रामदेव चतुर्वेदी, रेवती रमन दास, महंत चेतनदास रामस्वरूप दास, ब्रह्मचारी महंत स्वामी आदित्यनाथ महाराज हैं।
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